Drone Didi Scheme Central Government : मोदी 3.0 सरकार महिलाओं की उन्नति और उनका सशक्तिकरण करने पर जोर दे रही है। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही “ड्रोन दीदी योजना” के तहत महिलाओं को लखपति दीदी बनाया जा रहा है। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पिछले 100 दिनों में इस योजना के तहत देशभर में 11 लाख से ज्यादा लखपति दीदियां बनी हैं। यह योजना महिलाओं को ड्रोन उड़ाने, मरम्मत करने का प्रशिक्षण देने के साथ ही ड्रोन के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान कर रही है। खेती में ड्रोन के उपयोग को बढ़ाने और किसानों तक ड्रोन सेवाओं की आसान पहुंच बनाने में भी यह योजना मदददार साबित हो रही है। मौजूदा दौर में यह योजना महिलाओं को स्वरोजगार सुनिश्चित कर रही है, जिससे महिलाओं को रोजगार के साथ सम्मान भी मिल रहा है। वहीं, केंद्र सरकार की इस योजना से अब महिलाओं को 8-8 लाख रुपए का फायदा होने वाला है। मोदी सरकार की इस ड्रोन दीदी योजना के तहत अब कई राज्यों के लगभग 3 हजार महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को इस वर्ष ड्रोन दिया जाएगा, जिसके लिए महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप (एसएचजी) को अपने सभी आवश्यक कागजात पूरे करने होंगे।
कृषि मंत्रालय के अनुसार, इस योजना का मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार किया जा चुका है। योजना के तहत देशभर की कुल 14500 महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप (एसएचजी) को ड्रोन दिए जाएंगे। इस साल के बचे हुए तीन माह (अक्टूबर से दिसंबर) में तीन हजार ड्रोन बांटे जाएंगे। इस माह के अंत तक इससे संबंधित निर्देश राज्यों को दिए जाएंगे, जिसके बाद ड्रोन बांटे जाने एवं एसएचजी से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
कृषि मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा समय देशभर में करीब 10 करोड़ महिलाएं एसएचजी से जुड़ी हुई है। इन महिलाओं को ड्रोन दीदी योजना के अंतगर्त 8 लाख रुपए की सब्सिडी दी जाएगी। इस योजना में एक ड्रोन पैकेज की संभावित कीमत 10 लाख रुपए के करीब होगी, जिस पर एसएचजी को आठ लाख रुपए यानी 80 फीसदी सब्सिडी मिलेगी और 20 प्रतिशत यानी 2 लाख रुपए का लोन किया जाएगा।
योजना के तहत चयन की शर्तों के अनुसार, सबसे ज्यादा ड्रोन उत्तर प्रदेश के एसएचजी दिए जाएंगे, दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र और तीसरे नंबर पर कर्नाटक को दिए जाएंगे। ड्रोन का लाभ लेने के लिए एसएचजी को आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। इस योजना में राज्यों को ड्रोन देने के लिए चयन हेतु तीन आधार (मानदंड) तय किए गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा कृषि योग्य जमीन, सक्रिय सेल्फ हेल्प ग्रुप (एसएचजी) और ऐसे क्षेत्र जहां नैनो फर्टिलाइजर (Nano Fertilizer) का अधिक इस्तेमाल किया जाता हो, शामिल है। इन तीनों मानदंडों के तहत उत्तर प्रदेश को सबसे ज्यादा ड्रोन दिए जाएंगे।
मंत्रालय के अनुसार, ड्रोन के साथ चार एक्स्ट्रा बैट्री, चार्जिंग हब, चार्ज करने के लिए जेनसेट और एक ड्रोन बॉक्स भी दिया जाएगा। इसके अलावा, इस योजना के तहत ड्रोन उड़ाने वाली महिला को ड्रोन पायलट को डेटा विश्लेषण और ड्रोन के रखरखाव के लिए एक और साथी महिला को को-पायलट का प्रशिक्षण दिया जाएगा। 15 दिन के इस ट्रेनिंग सत्र में महिलाओं को ड्रोन का इस्तेमाल करके अलग-अलग कृषि कार्यों के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी।
इस योजना के तहत एसएचजी को दिए जाने वाले ड्रोन का इस्तेमाल नैनो फर्टिलाइजर और कीटनाशक के छिड़काव के लिए किया जाएगा। ड्रोन के लिए स्वयं सहायता समूह का चयन राज्य समिति के माध्यम से किया जाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञ समिति से जुड़े रहेंगे। इसमें देश के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस माह के अंत तक इस प्रोसेस में तेजी आने की उम्मीद है।
बता दें कि केंद्र सरकार ड्रोन दीदी योजना के तहत अगले दो वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 की अवधि के दौरान कुल 1261 करोड़ रुपए खर्च कर रही है, जिसके तहत देश के कई राज्यों में प्रगतिशील एसएचजी को कृषि ड्रोन दिए जाएंगे। ड्रोन के उपयोग को बढ़ाने और किसानों तक ड्रोन सेवाओं की आसान पहुंच बनाने में सरकार की यह पहल मददगार होगी।
ड्रोन से कीटनाशक एवं खाद का फसलों पर छिड़काव करने हेतु महिलाओं को ड्रोन उड़ाने का पायलट प्रशिक्षण और 15 हजार रुपए मासिक का मानदेय भी दिया जाएगा, जबकि को-पायलट महिला को प्रति माह 10 हजार रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा, ड्रोन की मरम्मत के लिए अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण और 5 हजार रुपए प्रति माह दिए जाएंगे। प्रशिक्षण के लिए महिला सदस्य की आयु 18 वर्ष या इससे अधिक होनी चाहिए। ड्रोन पर अनुदान लाभ लेने हेतु ड्रोन उड़ाने का पायलट प्रशिक्षण और मरम्मत की ट्रेनिंग एसएचजी महिला सदस्य को लेना अनिवार्य होगा।
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