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टॉप 10 केंद्र सरकार की योजनाएं, जाने योजनाओ के लाभ और उद्देश्य

टॉप 10 केंद्र सरकार की योजनाएं, जाने योजनाओ के लाभ और उद्देश्य
पोस्ट -14 दिसम्बर 2022 शेयर पोस्ट

किसानों के लिए कौन – कौनसी कृषि सरकारी योजनाएं, नए साल में किसानों को मिलेगा ज्यादा फायदा, जानें पूरी जानकारी

केंद्र सरकार की ओर से किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कई प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही है। इन योजनाओं को चलाने का उद्देश्य देश के किसानों का जीवन स्तर में सुधार करना है। सरकार इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को आर्थिक संबल बनाने का प्रयास भी कर रही है। देश में किसानो को कृषि क्षेत्र में छोटी से बड़ी हर आवश्यकता हो इन योजनाओं के माध्यम से दिया जा रहा है। ताकि किसानों को कृषि के क्षेत्र में किसी भी तरह की कोई समस्याओं का सामना न करना पड़े। केंद्र सरकार की ओर संचालित इन सरकारी योजनाओं का लाभ पूरे देशभर में लगभग सामान्य रूप से किसान उठा सकते है। पूरे देशभर में ये योजनाएं केंद्र सरकार द्वारा सामान्य रूप से चलाई जाती है। केंद्र की ओर संचालित इन योजनाओं से अधिक से अधिक किसान जुड सके, इसके लिए सरकार विभिन्न प्रकार के कृषि सम्मेलन और विशेष जागरूक अभियानों को भी चलाती है। आज के दौर में देश के अधिकतर किसान जागरुक होकर केंद्र सरकार की इन योजनाओं से जुड चुके है और योजनाओं का लाभ उठा कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रहे है। हालाकि आज भी देश के कई हिस्सों में ऐसे भी किसान है जिन्हें सरकार द्वारा चलाई जा रही इन योजनाओं के बारें में जानकारी नही है और वे अभी तक अनजान बने हुए है। लेकिन ट्रैक्टरगुरु के इस लेख में हम ऐसे किसानों के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित महत्वूर्ण योजनाओं में से टॉप 10 सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर आए है। ताकि इन योजनाओं का लाभ आने वाले नए साल में किसान उठा सके।

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प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PM Kisan Sampada Yojana)

केंद्र सरकार गांव-गरीब-किसान को आगे बढ़ाने और आय में वृद्धि कर उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए सरकार किसानों और बाजार के बीच की दूरी कम करने, ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने, बिचौलियों का दखल खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना को शुरु किया गया। इस योजना का संचालन खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से कृषि समुद्री प्रसंस्करण और खाद्य समूहों प्रसंस्करण का विकास किया जा सकेगा। इस योजना के तहत देश के किसानों की आय में वृद्धि करने व खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने का कार्य किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2020 में इस योजना के अंतर्गत 32 नए प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया गया था। इन प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन के लिए सरकार द्वारा 406 करोड रुपए की राशि आवंटित की गई थी। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा इस योजना का विस्तार कर इसे मार्च 2026 तक बढ़ाया गया है। जिसके लिए सरकार द्वारा 4600 करोड़ रूपए की राशि आवंटित की गई है। इस योजना के तहत कृषि समुद्री प्रसंस्करण एवं खाद्य प्रसंस्करण समूहों का विकास किया जाएगा। 

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना

किसान को प्रोसेसिंग व उपज की बाजार में उचित दाम पर बिक्री में सहयोग जैसी सुविधाएं मिले। इसको ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना को 2020 में शुरू किया था। योजना के माध्यम से किसानों को कृषि क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए 10 लाख रुपए तक की सरकारी मदद दी जाती है। इसके अलावा योजना के तहत किसान और युवाओं को कृषि क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए आर्थिक अनुदान एवं प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। यह योजना वित्त वर्ष 2024-25 तक के लिए संचालित हैं। इस योजना के माध्यम से देश के छोटे और लघु खाद्य उद्योगों के राजस्व में प्रगति लाई‌ जाएंगी। इस योजना के तहत किसान कृषि क्षेत्र में प्रसंस्करण उद्योग सरलता से लगा सकते हैं। केंद्र सरकार द्वारा इस योजना पर 10 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार क्रमश: 60: 40 के अनुपात में बांटेगी। अब तक केंद्र सरकार की इस योजना से खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों में लगे लगभग 62 हजार लोग लाभान्वित हो चुके हैं।

प्रधानमंत्री किसान एफपीओ योजना

किसानों की स्थिति सुधारने एवं कृषि सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न वित्तीय सहायता योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिनमें से पीएम किसान एफपीओं योजना भी एक है। इस एफपीओ की पूरा नाम फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन है। इस योजना का लाभ देश के सभी किसानों को दिया जाता है। पीएम किसान एफपीओं योजना एक प्रकार का किसान उत्पादक संगठन है, जो किसानों के हित में कार्य करता है और कंपनी एक्ट के अंतर्गत रजिस्टर्ड होता है।  इस योजना के तहत ऐसे संगठनों को बढ़ावा दिया जाएगा, जो खेती-बाड़ी से जुड़ा व्यवसाय करते है।  किसान संगठनों को खेती-बाड़ी से जुड़े व्यवसाय को शुरू करने के लिए 15 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। पीएम किसान एफपीओ योजना का लाभ उठाने के लिए कम से कम 11 किसानों को संगठित होकर अपनी कृषि कंपनी बनानी होती है। एफपीओ योजना के तहत किसानों द्वारा गठित संगठनों या कंपनी को सरकार द्वारा वह सभी फायदे प्रदान किए जाएंगे जो एक कंपनी को प्रदान किए जाते हैं। इस योजना के अंतर्गत दी जाने वाली राशि 3 सालों में प्रदान की जाएगी। 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने एवं फसल स्वास्थ्य के उचित प्रबंधन के लिए फसल सुरक्षा समाधान के उद्देश्य से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को साल 2016 में शुरू किया था। केंद्र सरकार की ओर से इस योजना का संचालन निरंतर रूप से किया जा रहा है। योजना के माध्यम से किसानों को किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा से खराब हुई फसल नुकसान का मुआवजा उपलब्ध करती है। इसमें फसल की बुआई के पहले चक्र से लेकर फसल की कटाई के बाद तक का चक्र शामिल होता है। पीएम फसल बीमा योजना के तहत किसानों को खरीफ फसल का 2.5-3.5 फीसदी, रबी फसल का 1.5-2 फीसदी और बागवानी फसलों के लिए 05 प्रतिशत का भुगतान बीमा कंपनी को करना होता है, जिस पर उन्हें बीमा दिया जाता है। बता दें कि मानवीय कारणों से नष्ट होने पर फसल का बीमा नहीं मिलता। 

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना

देश के किसानों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देने के लिए केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा 1 दिसम्बर 2018 को पीएम किसान सम्मान निधि योजना को शुरू किया गया था। केंद्र सरकार की यह योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के जरिये देश के किसानों को सालाना 6 हजार रुपये आर्थिक मदद की जाती है, जो हर 4 महीने के अंतराल में किसानों के खाते में दो-दो हजार रुपये की तीन किस्तों में भेजे जाते हैं। पीएम किसान योजना की पहली किस्त का पैसा एक अप्रैल से जुलाई के बीच भेजा जाता है। योजना के अन्तर्गत प्रारंभ में छोटे और सीमान्त किसानों को ही जिनके पास पास 2 हेक्टेयर (4.9 एकड़) से कम भूमि हो पात्र माना गया था परंतु बाद में इसे विस्तार देते हुए सभी कृषकों के लिए लागू कर दिया गया। इसके अलावा बंटाई किसानों के लिए हिस्सा प्रमाण पत्र, आधार कार्ड आदि शामिल है। छोटे किसानों के लिए यह योजना अत्यन्त उपयोगी सिद्ध हुई है। बुवाई से पहले नगदी संकट से जूझने वाले किसानों को इस नगदी से बीज, खाद और अन्य इनपुट की उपलब्धता में सुविधा हो रही है।

किसान क्रेडिट कार्ड योजना

किसान क्रेडिट कार्ड योजना देश के किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए शुरू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कृषि, मछली पालन और पशु पालन जैसे क्षेत्रों में किसानों की क्रेडिट जरूरतों को बिना किसी गड़बड़ी के पूरा किया जा सके। इसकी शुरूआत नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट ने की थी। इसमें कम ब्याज पर किसानों को कर्ज दिया जाता है। हाल ही में किसान क्रेडिट कार्ड योजना को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से जोडा गया है। केसीसी के माध्यम से किसानों को 3 लाख रुपये तक का लोन 4 प्रतिशत ब्याज दर  पर  मिलता है। केसीसी के जरिये किसान 1.60 लाख रूपए का लोन बिना गारंटी के उठा सकते हैं। किसान सम्मान निधि योजना से जुड़े हुए सभी लाभ ले सकते हैं। सभी सरकारी, निजी, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक से इस कार्ड को बनावा सकते हैं।

कृषि यंत्रीकरण पर उपमिशन

खेती-किसानी में आधुनिक कृषि यंत्रों को बढ़ती उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से कृषि यंत्र सब्सिडी योजना को शुरू किया। किसानों को सस्ती दर पर कृषि यंत्र उपलब्ध हो सके इसके लिए कृषि विभाग द्वारा 50-90 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी दी जाती है। देश के अलग-अलग राज्यों में सब्सिडी का लाभ वहां की सरकार द्वारा निर्धारित सब्सिडी तय किए गए नियमों के अनुसार दिया जाता है। विभाग प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फॉर इनसीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेज्ड्यू योजना के तहत किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्र उपलब्ध करवाएं जाते हैं। पहले यह अनुदान कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध करवाएं जाते थे। बता दें कि खेती में नई-नई मशीनों के आने के बाद फसल उत्पादन में फर्क दिखा है। पहले के मुकाबले किसानों का मुनाफा भी बढ़ा है। 

चारा और चारा विकास योजना

पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय पशुपालन और डेयरी विभाग ने साल 2014-15 में राष्ट्रीय पशुधन मिशन शुरू किया था। राष्ट्रीय पशुधन मिशन ने भोजन एवं चारे के विकास सहित ग्रामीण इलाकों में मुर्गी, भेड़, बकरी और सुअर पालन के क्षेत्र में उद्यमिता विकास एवं नस्ल सुधार और पशु उत्पादकता में वृद्धि के माध्यम से रोजगार पैदा हुए है। इसके अलावा मांस, अंडा, बकरी का दूध, ऊन और चारे के उत्पादन में भी वृद्धि करने में मदद मिली है। साथ ही, इसके उत्पादन में घरेलू मांग को पूरा करने के बाद निर्यात आय में भी वृद्धि हुई है। यह योजना पशुपालकों की मांग को कम करने के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित किसानों को 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है तथा पाशों के लिए भूमि संरक्षित किया जा रहा है।

डेयरी उद्यमिता विकास योजना

पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार डेयरी उद्यमिता विकास योजना चला रही है। योजना के तहत वह व्यक्ति जो डेयरी खोलना चाहते है, या पुरानी डेयरी का विकास करना चाहते है, उन्हें नाबार्ड वित बैंक द्वारा 25 प्रतिशत तक का सरकारी सब्सिडी पर लोन प्रदान किया जायेगा। वहीं एसटी/एससी किसानों को 33.33 प्रतिशत तक का सरकारी सब्सिडी पर लोन प्रदान किया जाता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन नागरिकों को डेयरी के प्रति प्रोत्साहित कर रोजगार प्रदान करना है, जिनकी रोजगार की वास्तविक स्थिति आज भी सामान्य नहीं हैं। नाबार्ड की इस योजना के किसान, व्यक्तिगत उद्यमी, गैर सरकारी संगठन, कंपनियां आवेदन कर सकती हैं। साथ ही किसान इसके लिए प्रशिक्षण आदि भी ले सकता है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

कृषि के क्षेत्र में सिंचाई की समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को साल 2015 में लॉन्च किया गया था। योजना का उद्देश्य खेती में ,फसलों को पानी उपलब्ध करना था। क्योंकि फसलों के अच्छे उत्पादन के लिए पानी बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस योजना के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई, स्प्रिन्किलर सिंचाई, फब्बारा सिंचाई एवं सुक्ष्म सिंचाई जैसे तत्व शामिल किये गए है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना तहत अलग-अलग राज्य सरकारें अपने स्तर पर किसानों को सब्सिडी का लाभ प्रदान करती हैं। पीएम कृषि सिंचाई योजना के तहत अलग-अलग राज्य सरकारें अपने स्तर पर किसानों को ड्रिप व स्प्रिंकल सिंचाई को पद्धति को बढ़ावा देने लिए इन सिंचाई यंत्रों की खरीद खर्च पर सब्सिडी मुहैया कराए जा रहे हैं। 

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