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डेयरी फार्मिंग : सरकार ने बनाया मेगा प्लान, 60 लाख लीटर तक बढ़ेगा दूध उत्पादन

डेयरी फार्मिंग : सरकार ने बनाया मेगा प्लान, 60 लाख लीटर तक बढ़ेगा दूध उत्पादन
पोस्ट - November 12, 2022 शेयर पोस्ट

प्रतिदिन दूध उत्पादन को 60 लाख लीटर तक बढ़ाने का लक्ष्य किया निर्धारित

ग्रामीण लोगों की खेती-बाड़ी के अलावा पशुपालन और डेयरी फार्मिंग भी अर्थव्यवस्था का मुख्य साधन है। आज के समय में यह किसानों की आय का एक अहम जरिया बना हुआ है। अब ग्रामीण लोग गांव में रहकर ही इससे अच्छी खासी इनकम अर्जित भी कर रहे है। एवं अन्य लोगों को रोजगार भी दे रहे है। पशुपालन और डेयरी फार्मिंग को और अधिक बेहतर बनाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारें भी अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रही है। ऐसे में पशुपालन को बढ़ावा देने एवं रोजगार के नये अवसर पैदा करने के लिए नई तकनीकों का सहारा भी लिया जा रहा हैं। इस बीच यूपी की योगी सरकार अपने राज्य में दुग्ध उत्पादकता और किसानों की आय में वृद्धि हो सके इस दिशा में काम कर रही है। राज्य में दुग्ध उत्पादकता में सुधार और दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से गोवंशियों के अनुवांशिकीय उन्नयन और स्वदेशी नस्लों के विकास एवं संरक्षण के लिए केंद्र सरकार की राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत कृत्रिम गर्भाधान अभियान को चालने की योजना बनाई है। सरकार ने इस अभियान के तहत राज्य में प्रतिदिन दूध उत्पादन को 60 लाख लीटर तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। आकड़ों के मुताबिक इन दिनों राज्य में 90 लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन हो रहा है, जिसे बढ़ाकर 150 लाख लीटर प्रति दिन तक ले जाने का प्रयास हैं।

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राज्य के सभी 75 जिलों को करेगा कवर

विशेषज्ञों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए ’राष्ट्रीय गोकुल मिशन' के तहत एक हजार करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे। यह ’राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ का हिस्सा है, जिसे दिसंबर 2014 में स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और विकास पर ध्यान देने के साथ-साथ गोजातीय आबादी के दूध उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि केंद्र की इस परियोजना के तहत प्रदेश में दूध उत्पादन और मवेशियों की आबादी बढ़ाने के लिए कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम चलाया जाएगा। हाल के दिनों में सबसे बड़े अभियानों में से एक है। इस अभियान के तहत प्रदेश सरकार 100 दिनों के भीतर दुधारू पशुओं (गाय-भैंस) की आबादी में 75 लाख कृत्रिम गर्भाधान करने का प्रयास करेगी। स्वतंत्रता के 75वें वर्ष (आजादी का अमृत महोत्सव) के साथ, यह अभियान 15 नवंबर 2022 को बाराबंकी से शुरू किया जाएगा। और यह अभियान अगले साल 25 फरवरी 2023 तक प्रदेश के सभी 75 जिलों को कवर करेगा।

राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा चुके है 605 कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम

आंकड़ों के मुताबिक विशेषज्ञों का कहना है कि साल 2019-20 के दौरान, कृत्रिम गर्भाधान (एनएआईपी) को राष्ट्रीय स्तर पर 605 जिलों में कार्यक्रम को आयोजित किया गया था, जहां 50 प्रतिशत से कम कृत्रिम गर्भाधान कवरेज था। इस साल इसमें मुख्य रूप से चुने हुए करीब 300 जिलों के गांवों को शामिल किया गया था। इस दौरान उच्च आनुवंशिक योग्यता वाले सांडों के वीर्य से 50 लाख से अधिक गोवंश का गर्भाधान किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई गोवंशियों के अनुवांशिकीय उन्नयन और स्वदेशी नस्लों के विकास एवं संरक्षण करके उनकी उत्पादकता बढ़ाने की प्रमुख रणनीतियों में से एक है। वर्तमान में, औसत कृत्रिम गर्भाधान कवरेज लगभग 30 प्रतिशत है। वहीं, बाकि 70 प्रतिशत या तो गैर-नस्ल छोड़ दिए जाते हैं या अज्ञात आनुवंशिक योग्यता वाले बैल के साथ पैदा होते हैं। इस वजह से 50 प्रतिशत से कम कवरेज वाले जिलों में मिशन मोड में कृत्रिम गर्भाधान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें 113 आकांक्षी जिले शामिल हैं।

देश के दुग्ध उत्पादन का 16.60 प्रतिशत उत्पादित करता है दुग्ध

आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश पूरे देश के दुग्ध उत्पादन का 16.60 प्रतिशत दुग्ध उत्पादित करता है। यानि देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक वाला राज्य है। प्रदेश में प्रतिदिन 8.72 करोड़ लीटर से ज्यादा दूध का उत्पादन होता है। जिसमें से 48 प्रतिशत खपत राज्य में होती है। इसके बाद शेष बचे उत्पादन को बाकि राज्यों में सप्लाई कर दिया जाता है। हालांकि, राज्य में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता (384 ग्राम) राष्ट्रीय औसत 400 ग्राम से कम है। पशुधन विकास बोर्ड (एलडीबी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरविंद सिंह ने कहा, अभी उत्पादन बढ़ाने की योजना बीते दिनों तैयार कर ली गई थी। इसके लिए राज्य सरकार ने बजट भी निर्धारित कर दिया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान अभियान चलाने की योजना बनाई जा चुकी है, इस अभियान से राज्य में दूध उत्पादन में तेजी आने और आत्मनिर्भर बनाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम गर्भाधान अभियान के तहत पशु मालिक किसानों एवं डेयरी संचालकों के दरवाले तक मुफ्त सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। 

गाय-भैंस की आबादी बढ़ने की उम्मीद

विशेषज्ञों ने कहा कि राज्य में संगठित क्षेत्र में 110 डेयरी प्लांट है, जिनमें सहकारी क्षेत्र के तहत 13 डेयरी प्लांट आते हैं। प्रदेश का डयेरी उद्योग सहकारी मॉडल की दिशा निर्देश पर आधारित है, जो छोटे और सीमांत डेयरी किसानों एवं महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और नया आयाम देने में दुग्ध उत्पादन का अहम योगदान है। इस 100 दिवसीय अभियान को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम गर्भाधान के इस अभियान से हम अच्छे परिणामों की उम्मीद है। इस अभियान से उच्च दूध देने वाली गोजातीय आबादी (गायों और भैंसों) में लगभग 30 लाख कृत्रिम गर्भाधान प्रक्रिया की प्रभावकारिता को देखते हुए गाय-भैंस की आबादी बढ़ने की उम्मीद है। परिणामस्वरूप दूध उत्पादन में वृद्धि हो सकेगी। पशुपाल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रजनीश दुबे का कहना है कि इससे राज्य में दूध का उत्पादन मौजूदा 90 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़कर 150 लाख लीटर प्रतिदिन होने का अनुमान है। 

राज्य में 319 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा हो रहा दुग्ध उत्पादन

पशुपाल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रजनीश दुबे का कहना है कि उत्तर प्रदेश वर्तमान में 319 लाख मीट्रिक टन दूध का उत्पादन कर रहा है। देश में 16.60 प्रतिशत शेयर के साथ उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाला राज्य है। यदि पिछले पांच सालों की बात करें तो दुग्ध उत्पादन में प्रदेश में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, देश के अन्य राज्य जैसे राजस्थान 256 लाख मीट्रिक टन दूध का उत्पादन कर दूसरे, मध्य प्रदेश 171 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन कर तीसरे एवं 153 लाख मीट्रिक टन दुग्ध का उत्पादन कर गुजरात चौथे और 152 लाख मीट्रिक टन का दूध उत्पादन कर आंध्र प्रदेश पांचवें स्थान पर है।

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