देश के किसानों की आय दोगुनी करने और रोजगार के नये अवसर बनाने को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार कई तरह की योजनाएं शुरू की गई है। इन योजनाओं के माध्यम से सरकार ज्यादा से ज्यादा किसानों को हर संभव मदद देने का प्रयास करती हैं। दरअसल किसानों के पास खेती-बाड़ी के अलावा पशुपालन भी उनकी आय का दूसरा सबसे बड़ा माध्यम है। ऐसे में सरकार द्वारा पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पशुपालकों के लिए पशु किसान क्रेडिट कार्ड योजना को शुरू की है। इस योजना के तहत पशुपालक किसानों को सरकार की ओर से गाय, भैंस पालन के लिए लोन दिया जाता हैं। सरकार दुग्ध उत्पादकता और किसानों की आय में वृद्धि हो सके इस दिशा में लगातार काम कर रही है। आकड़ों के मुताबिक साल 2021-22 में उत्पादकता में सुधार और दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से गोवंशियों के अनुवांशिकीय उन्नयन और स्वदेशी नस्लों के विकास एवं संरक्षण के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन को 2,400 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ 5 साल के लिए बढ़ा दिया गया है। ताकि किसान और पशुपालकों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जा सके। यदि आप पशुपालक किसान है और पशुपालन करते हैं तो ट्रैक्टरगुरू की यह पोस्ट आपके लिए बड़े काम की हैं। इस पोस्ट में हम आपकों सरकार द्वारा शुरू राष्ट्रीय गोकुल मिशन, पशु किसान क्रेडिट कार्ड योजना से जुड़ी सभी जानकारी जैसे आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, लाभ आदि प्रदान करेगें। यदि आप भी इन योजना के बारें में जुड़ी सभी जानकारी प्राप्त कर योजना का लाभ लेना चाहते है, तो इस पोस्ट को अंत तक पूरा पढ़े।
हमारे देश में गाय को काफी महत्व दिया जाता है। गायों के संरक्षक, उत्पादकता में सुधार और दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार की पशुपालन और डेयरी विभाग की तरफ से कई सारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। केन्द्र सरकार ने साल 2014 में 2055 करोड़ रूपये के बजट के साथ राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना की शुरूआत की थी। राष्ट्रीय गोकुल मिशन को वैज्ञानिक तरीके से दूध उत्पादन और उत्पादकता में सुधार के लिए स्वदेशी गोजातीय नस्लों के विकास और संरक्षण की पहल के रूप में शुरू किया गया है जिसमें बेहतर पोषण और कृषि प्रबंधन शामिल है, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के साथ राष्ट्रीय गोकुल मिशन के कार्यान्वयन की घोषणा की। राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के अंतर्गत स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा देने के साथ-साथ विदशी नस्लों के पशुओं के संरक्षण तथा दुग्ध उत्पादन बढ़ानें पर कार्य कर रही है। पिछले कुछ सालों में देखा गया कि किसानों के बीच विदेशी नस्ल के मवेशियों को पालन की आदत बढ़ी है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये विदेशी पशु जलवायु परिवर्तन से सामंजस्य नहीं बिठा पाते हैं। ऐसे में इनका पालन करना बेहतर विकल्प नहीं हैं। पशुपालन और डेयरी विभाग के आंकड़ों के अनुसार भारत में इसमें से 80 प्रतिशत मवेशी स्वदेशी और गैर-वर्णित नस्ल के हैं।
केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गयी राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी गौवंशीय पशुओं की नस्लों में सुधार करना, उनके संरक्षण तथा दुग्ध उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के साथ ही उसकी गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। सरकार इस योजना के माध्यम से किसानों और पशुपालकों को वह सभी सुविधाएँ प्रदान करना चाहती है, जिससे वह आसानी से पशुपालन कर सके और इसका लाभ प्राप्त कर आय बढ़ाने के साथ ही अपनें जीवन स्तर को ऊपर उठा सके। साथ ही सरकार उत्पादकता में सुधार और दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से गोवंशियों के अनुवांशिकीय उन्नयन और स्वदेशी नस्लों के विकास एवं संरक्षण के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन को 2,400 करोड़ रुपये के बजट के साथ 5 साल के लिए बढ़ा दिया गया है। ताकि इसके अंतर्गत स्वदेशी गायों और दुधारू पशुओं के संरक्षण और नस्लों के विकास को वैज्ञानिक तरीके से प्रोत्साहित किया जा रहा है।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत स्वदेशी गौवंश पशुओं की नस्ल में सुधार करना है। जिससे कि पशुओं की संख्या में भी वृद्धि होगी।
इसके अलावा उचित संरक्षण तथा दुग्ध उत्पादन क्षमता को बढ़ाना एवं उनकी गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। इसके अलावा इस राष्ट्रीय गोकुल मिशन के माध्यम से अनुवांशिक संरचना में सुधार करने के लिए नस्ल सुधार कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन को केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह द्वारा साल 2014 को आरंभ किया गया था।
वर्ष 2014 में इस योजना के कार्यान्वयन के लिए 2025 करोड़ रुपए के बजट का आवंटन किया गया था।
सन 2019 में इस योजना के बजट को 750 करोड़ रुपया से बढ़ा दिया गया। अब इस योजना के बजट को 2,400 करोड़ रूपए के साथ 5 साल के लिए बढ़ा दिया गया है।
इसके अलावा दूध उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए भी विभिन्न प्रकार के प्रयास किए जाएंगे।
इस योजना के माध्यम से देश के पशुपालक किसानों की आय में वृद्धि होगी। इस मिशन से माध्यम से पशुपालन को बढ़ावा दिया जाएगा।
इस योजना के माध्यम से किसानों को दूध उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार करने के साथ वैज्ञानिक रुप से वृद्धि करने के विषय में भी जानकारी प्रदान की जाएगी।
इच्छुक आवेदक भारत का मूल निवासी होना चाहिए।
इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक की आयु 18 वर्ष या फिर उससे ज्यादा होने चाहिए।
इस योजना के अंतर्गत छोटे किसान तथा पशुपालक ही आवेदन कर सकते हैं।
सरकारी पेंशन प्राप्त करने वाले पशुपालकों या किसानों को इस योजना का लाभ नहीं प्रदान किया जाएगा।
इच्छुक आवेदक पशुपालक किसान का आधार कार्ड
मूल निवास प्रमाण पत्र
आयु का प्रमाण
आय प्रमाण पत्र
पासपोर्ट साइज फोटो ग्राफ
ईमेल आईडी
मोबाइल नंबर जो आधार कार्ड से लिंक हो
आवेदक का पासपोर्ट साइज फोटो
देश के जो इच्छुक पशुपालक किसान इस योजना के अंतर्गत अपना आवेदन करना चाहते है। आवेदन के लिए आपकों सबसे पहले आपने सभी आवश्यक दस्तावेजों को लेकर अपने नजदीकी पशुपालन एवं डेयरी विभाग जाना होगा। इसके बाद आपको वह जाकर आवेदन फॉर्म लेना होगा। फिर आवेदन फॉर्म में पूछी गयी सभी सही जानकारी को सावधानीपूर्वक भरना होगा। आवेदन फॉर्म भरने के बाद आपको उपने दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पेन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, आदि की फोटो कॉपी को आवेदन फॉर्म के साथ लगाना है और डेयरी अधिकारी के पास सत्यापन के लिए जमा करना होगा। इस तरह आप आपना आवेदन योजना में कर सकते हैं।
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