Stubble Management Machinery : रबी सीजन 2024-25 के लिए गेहूं समेत मुख्य रबी फसलों की तैयारियां किसानों द्वारा शुरू कर दी गई। कई राज्यों में किसानों ने फसलों की बुवाई के लिए खेतों को तैयार करना आरंभ कर दिया है। इस दौरान पंजाब और हरियाणा जैसे धान उत्पादक राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही है। पंजाब के किसानों के लिए पराली (फसल अवशेष) का प्रबंधन आज भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। क्योंकि उनके पास अगली फसल के लिए खेत को तैयार करने के लिए पर्याप्त समय नहीं होता है, जिसकी वजह से वे फसल अवशेष के प्रबंधन के लिए पराली को खेतों में जलाकर तुरंत नष्ट कर देने का रास्ता चुनते हैं। लेकिन किसान खेतों में पराली जलाने की घटना को अंजाम नहीं दे, इसके लिए सरकार से लेकर कृषि विशेषज्ञों द्वारा जागरूकता कार्यक्रम चलाकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। फिर भी इस समस्या का कोई स्थाई हल नहीं निकल पा रहा है। हालांकि, पराली प्रबंधन करने के लिए अब राज्य के सहकारी बैंक भी आगे आ रहे हैं। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन में राहत मिले, इसके लिए सहकारी बैंकों ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए विशेष ऋण योजना शुरू की है, जिसके तहत प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां (पैक्स) और कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) का लाभ मिलेगा।
पराली जलाने की घटना पर रोक लगाने के लिए पंजाब सरकार ने बड़ा फैसला किया है। इसके तहत राज्य सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन लोन योजना (Crop Residue Management Loan Scheme) की शुरुआत की है। इस योजना के अंतर्गत किसान अपनी फसल के अवशेष को जलाने के बजाय मशीनों से प्रबंधन करेंगे। फसल अवशेष प्रबंधन लोन योजना (Crop Residue Management Loan Scheme) में किसान प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) या कॉमन हायरिंग सेंटर (सीएचसी) के माध्यम से योजना का लाभ ले पाएंगे। इन संस्थाओं को योजना के तहत कृषि उपकरणों की खरीद पर 80 प्रतिशत तक अनुदान लाभ दिया जा रहा है। साथ ही सहकारी बैंकों के माध्यम से लोन भी दिया जा रहा है। जो भी किसान या संस्थाएं, इस योजना के तहत ऋण लेती हैं, उन्हें ऋण चुकाने के लिए 5 साल का समय दिया जाएगा, जिससे प्रतिवर्ष 10 अर्धवार्षिक किस्तों 30 जून और 31 जनवरी के बीच में भुगतान किया जाएगा।
पंजाब की भगवंत मान (CM Bhagwant Mann) सरकार फसल अवशेष प्रबंधन लोन योजना (Crop Residue Management Loan Scheme) में प्रगतिशील किसानों को सब्सिडी भी दे रही है, ताकि किसान फसलों के प्रबंधन के लिए सुपर सीडर और बेलर जैसे कृषि उपकरण कम लागत में खरीद पाएं। पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य किसानों को पराली के प्रबंधन के लिए प्रेरित करना है और बढ़ती पराली दहन की घटनाओं को कम करना है। वहीं, पंजाब सरकार ने धान कटाई का सीजन शुरू होने से पहले ही पराली जलाने की घटनाओं पर काबू पाने के लिए तैयारी शुरू कर दी। इसके तहत अधिक पराली जलाने वाले गांवों को चिन्हित किया गया। मोगा जिला प्रशासन ने 100 गांवों की पहचान की, जहां पर पिछले सीजन सबसे अधिक पराली जलाने की घटनाओं को अंजाम दिया गया। सरकार को उम्मीद है कि इन गांवों में विशेष निगरानी और जागरूकता अभियान से खेतों में पराली दहन की घटनाओं में कमी आएगी, जिससे प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (CM Bhagwant Mann) ने कहा कि पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन लोन योजना (Crop Residue Management Loan Scheme) लॉन्च की। इस योजना के माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनरी खरीदने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि धान की पराली को जलाने के कारण होने वाले पर्यावरण प्रदूषण को रोका जा सके। भगवंत मान ने कहा, इस योजना के तहत प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों या कॉमन हायरिंग सेंटर को लोन और मशीनों की खरीद पर 80 फीसदी तक की सब्सिडी दी जाएगी, ताकि किसानों की फसल अवशेष प्रबंधन की मशीनों तक आसान पहुंच संभव हो सके। सरकार ने चंडीगढ़ और जिला सहकारी बैंकों की 802 शाखाओं के माध्यम इस योजना की शुरुआत की है। इसके तहत किसान सहकारी बैंकों के माध्यम से लोन लेकर धान की पराली का प्रबंधन करने के लिए कृषि मशीन खरीद पाएंगे। राज्य सरकार ने आसान प्रक्रिया के तहत ज्यादा से ज्यादा किसानों को योजना का लाभ लेने के लिए कहा है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब कृषि विभाग द्वारा राज्य में वैज्ञानिक तरीके से पराली (चावल, गेहूं फसल अवशेष) के प्रबंधन हेतु किसानों को अनुदान पर 22 हजार से अधिक “फसल अपशिष्ट प्रबंधन” (सी.आर.एम) मशीनें उपलब्ध करवाई जा रही है, ताकि राज्य में पराली जलाने की घटनाओं पर काबू पाया जा सके। सरकार धान कटाई सीजन 2024-25 के दौरान किसानों को पराली प्रबंधन के लिए सब्सिडी वाली सीआरएम मशीनें उपलब्ध कराने के लिए लगभग 500 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। इसके तहत व्यक्तिगत किसान को सी.आर.एम मशीन की लागत कीमत पर 50 प्रतिशत एवं सहकारी समितियाें, किसान उत्पादन संगठन (एफ.पी.ओ) और पंचायतों को 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी देय है। सब्सिडी वाली फसल अपशिष्ट प्रबंधन मशीनों के लिए किसानों का चयन लॉटरी ड्रॉ प्रक्रिया के माध्यम से किया जा रहा है।
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