Super Seeder : खेती-किसानी से कमाई बढ़ाने में कृषि मशीनरी और उपकरण बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आज कृषि में भूमि की तैयारी, बुआई, रोपण, सिंचाई, कटाई और कटाई के बाद फसल प्रबंधन जैसे विभिन्न खेती संबंधित कार्यों के लिए कृषि मशीनरी का उपयोग किसानों द्वारा किया जा रहा है। इन नए-नए कृषि यंत्रों और उपकरणों की मदद से किसान खेती में पैदावार बढ़ाने और अपनी आय को दोगुना करने में लगे हुए हैं। खेती के इन्हीं यंत्रों में सुपर सीडर मशीन भी शामिल है। कई राज्यों के किसान खेत में सुपर सीडर मशीन की मदद से नरवाई (पराली) जलाए बिना गेहूं की कटाई के बाद अपने खेतों में दलहन फसलों की सीधी बुवाई कर रहे हैं, जिससे उनकी खेती लागत कम करने और गेहूं फसल के मौजूदा अवशेषों के प्रबंधन करने में बड़ी मदद मिली रही है। सही मायने में कहा जाए तो आज सुपर सीडर मशीन (Super Seeder Machine) किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। आइए, जानते हैं कि सुपर सीडर मशीन से किसानों को क्या फायदे मिल रहे हैं और इस मशीन से फसलों की बुवाई कैसे करते हैं तथा सुपर सीडर की टॉप विशेषताएं क्या हैं।
दरअसल, सुपर सीडर मशीन (Super Seeder) इन दिनों अधिकांश किसानों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई । एमपी जैसे कृषि प्रधान राज्य में किसान इस मशीन की मदद से अपने खेतों में ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द की बुवाई बिना पराली जलाए कर रहे हैं। सुपर सीडर मशीन गेहूं, धान की पराली को टुकड़ों में काटकर मिट्टी के नीचे दबा देती है और बीजों की बोनी भी कर देती है। जमीन में दबी पराली गलकर खाद में तब्दील हो जाती है, जिससे जमीन में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और पैदावार भी ज्यादा होती है। फसल अवशेषों से बनी यह खाद जमीन में पानी सोखने की ताकत को बढ़ाती है।
बता दें कि सुपर सीडर मशीन (Super Seeder Machine) एक मल्टी टास्किंग कृषि उपकरण है, जो फसल की बोनी, जुताई, मल्चिंग और खाद फैलाने का काम एक साथ करती है। सुपर सीडर (SuperSeeder) के इस्तेमाल से फसल अवशेषों का प्रबंधन और खेती में बीज की बोनी बेहद आसान हो जाती है। इन सब में किसानों के समय और रुपए दोनों की बचत होती है। सुपर सीडर मशीन का इस्तेमाल धान की कटाई के बाद, गेहूं की बुआई के लिए किया जाता है। यह मशीन पराली को खेतों से बिना निकाले गेहूं की सीधी बोनी कर देती है। इस मशीन को ट्रैक्टर के साथ जोड़कर चलाया जाता है। मशीन फसल की उत्पादकता बढ़ाती है और पराली की समस्या से किसानों को सस्ते में निजात दिलाती है। कई राज्यों की सरकारें कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (एसएमएएम) योजना के अंतर्गत अलग-अलग योजनाएं लागू कर फसल अवशेष मैनेजमेंट के काम आने वाले कृषि यंत्रों के साथ-साथ कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना के लिए अपने तय प्रावधानों के तहत किसानों को 50 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान करती है।
एस.एम.ए.एम. (SMAM) योजनांतर्गत किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन वाले कृषि यंत्र जैसे सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (सुपर एस.एम.एस.), हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, जीरो टिल सीड कम फर्टीलाइजर ड्रिल, श्रब मास्टर पैडी स्ट्राचापर, श्रेडर, मल्चर, रोटरी स्लेशन, हाइड्रोलिक रिवर्सेबलल एम.बी. प्लाऊ, बेलिंग मशीन, क्रॉप रीपर, स्ट्रा रेक, रीपर कम बाइण्डर जैसे कई अन्य कृषि मशीनों पर लक्ष्य जारी कर अनुदान दिया जाता है।
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