संरक्षित तरीके से खेती : सरकार देगी 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी - जाने आवेदन प्रक्रिया

संरक्षित तरीके से खेती : सरकार देगी 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी - जाने आवेदन प्रक्रिया
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संरक्षित खेती करने पर किसानों को मिलेगी सब्सिडी, जानें संरक्षित खेती से  लाभ और आवेदन प्रक्रिया

आधुनिक युग एवं बढ़ते वायु प्रदूषण से मौसम चक्र में जहां विभिन्नता देखी जा रही है। वहीं मौसम में आई विभिन्नता के कारण बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, आंधी तुफ़ान जैसी आदि समस्याएं देखने को मिल रही है। इन सभी मौसमी विभिन्नताओं का असर खेती-बाड़ी पर साफ तौर से देखा जा सकता है। फसल उत्पादन में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। जिससे किसानों को काफी आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है। जिसका सीधा असर उनकी आजीविका पर पड़ रहा है। वर्तमान समय में किसान खेती-किसानी से सुचारू रूप से अपना जीवन यापन भी नहीं कर पा रहे हैं। किसानों की इन सभी समस्याओं के निवारण के लिए केन्द्र व राज्य सरकार दोनों ने मिलकर संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की योजनाएं लॉन्च की है। संरक्षित खेती करने पर सरकार किसानों को सब्सिडी भी उपलब्ध कराती है। इसी क्रम में हरियाणा सरकार राज्य में संरक्षित खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए हरियाणा सरकार किसानों को 10 से 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी दे रही है। इस तरह की खेती में हाइड्रोपोनिक व एरोपोनिक इकाइयां भी  शामिल हैं। इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसान https://hortharyana.gov.in/  पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। लाभार्थियों का चयन पहले आओ और पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा। आइए ट्रैक्टरगुरू के इस लेख के माध्यम से संरक्षित खेती करने पर सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी के विषय पर चर्चा करते हैं। 

संरक्षित खेती का संक्षिप्त वर्णन

जलवायु परिवर्तन से देश में कृषि क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है। कृषि क्षेत्र में नई तकनीक के इस्तेमाल करना, जिससे फसल उत्पादन पर कोई असर न पड़े और अच्छा उत्पादन मिलता रहे, इसके लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसी ही एक तकनीक है संरक्षित खेती। संरक्षित खेती नए युग की ऐसी नवीनतम् कृषि प्रणाली है, जिसके माध्यम से किसान फसलों की मांग के अनुसार वातावरण को नियंत्रित करते हुए मंहगी फसलों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करते हैं, जहां पर धूप, छांव, गर्मी व ठंडक का अधिक प्रभाव न हो। साथ ही तेज बारिश का असर और तीव्र हवाओं का प्रकोप भी न हो, और फसलों का प्राकृतिक प्रकोपों व अन्य कारकों से बचाव किया जाता है। संरक्षित खेती नवीनतम् तकनीक की वह संरचना है, जिसमें एक नियंत्रित वातावरण के अंर्तगत मूल्यवान फसलों की खेती की जाती है। ये संरक्षित संरचनाएं कीट अवरोधी नेट हाउस, ग्रीन हाउस, नवीनतम् तकनीक से लैस पॉलीहाउस, प्लास्टिक लो-टनल, प्लास्टिक हाई-टनल, प्लास्टिक मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई तकनीक आदि प्रकार की होती हैं।

सरंक्षित खेती पर सब्सिडी

भारत में, संरक्षित खेती प्रौद्योगिकी वाणिज्यिक उत्पादन के लिए लगभग तीन दशक ही पुरानी है, जबकि विकसित देशों जैसे जापान, रुस, ब्रिटेन, चीन, हॉलैंड और अन्य देशों में दो सदी पुरानी है। संरक्षित खेती द्वारा किसान प्रतिकूल परिस्थितियों में अच्छा उत्पादन ले सकते हैं। किसान फल-फूल और सब्जियों आदि की संरक्षित खेती बाजार की मांग के अनुसार किसी भी समय में कर सकते है। इस संरक्षित खेती से किसान अपने फसल को बेमौसम बारिश, ओला वृष्टि, आंधी तुफ़ान, कीट-रोगों एवं पाला से होने वाले नुकसान से बचा सकता है। इन सभी को देखते हुए हरियाणा सरकार राज्य में किसानों को संरक्षित खेती के लिए कीट अवरोधी नेट हाउस, ग्रीन हाउस, नवीनतम् तकनीक से लैस पॉलीहाउस, प्लास्टिक लो-टनल, प्लास्टिक हाई-टनल, प्लास्टिक मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई तकनीक आदि पर सब्सिडी की सुविधा एवं संयोग प्रदान कर रही है। राज्य सरकार द्वारा लगभग 50 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है। इसके अलावा लघु, सीमांत, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के किसानों को 20 से 30 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान की जाती है अर्थात इन्हे कुल 80 प्रतिशत की सब्सिडी सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। सरंक्षित खेती पर सब्सिडी का प्रावधान हर राज्य सरकार अलग-अलग तय करती है। अधिक जानकारी के लिए प्रत्येक प्रदेश के निदेशक, उद्यान और जिला उद्यान अधिकारी से सम्पर्क किया जा सकता है।

पैदावार को बढ़ाया जा सकता है 

बाजारों में सब्जियों की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए सब्जियों की फसल के उत्पादन में वृद्धि करने की अत्यन्त आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्रों का विकास, छोटी जोत, शहरीकरण एवं औद्यीकरण के कारण कृषि योग्य भूमि का घटता क्षेत्रफल आदि सब्जियों की मांग को पूरा करने में बाधक हैं। इसलिए, गहन खेती, ग्रीनहाउस, पॉलीहाउस, हाइड्रोपोनिक्स (बिना मिट्टी के खेती), ऐरोपोनिक्स और पोषक तत्व फिल्म तकनीक को अपनाकर फल, फूल व सब्जियों की उत्पादकता में सुधार करना अत्यन्त आवश्यक है। संरक्षित संरचनाओं की प्रारम्भिक लागत अधिक होती है, लेकिन फसलों के अच्छे उत्पादन के साथ 3-5 वर्षों में इसकी भरपाई की जाती है। ऑफ-सीजन सब्जी, फल व फूलों की खेती और नर्सरी को इससे अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए संरक्षित संरचनाओं के अन्तर्गत उगाया जाता है। संरक्षित खेती के अंतर्गत किसान नेट हाउस, ग्रीन हाउस, नवीनतम तकनीक से लैस पॉलीहाउस, प्लास्टिक लो-टनल, प्लास्टिक हाई-टनल, प्लास्टिक मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीकों की मदद से खेती करते हैं। संरक्षित खेती अपनाकर किसान प्रतिकूल परिस्थितियों में भी फसलों से अच्छा उत्पादन हासिल कर सकते हैं। फल, फूल और सब्जियों को उचित वातावरण प्रदान कर उनके पैदावार को 5 से 12 प्रतिशत की वृद्धि की जा सकती हैं। 

संरक्षित खेती तकनीक पर अनुदान विवरण

सरंक्षित खेती तकनीक की सरंक्षित सरंचनाएं कीट अवरोधी नेट हाउस, ग्रीन हाउस, नवीनतम् तकनीक से लैस पॉलीहाउस, प्लास्टिक लो-टनल, प्लास्टिक हाई-टनल, प्लास्टिक मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई तकनीक आदि प्रकार की होती हैं। इस तकनीक पर सरकार 10 से 15 लाख रूपये तक का अनुदान दे रही हैं। इसके लिए हरियाणा सरकार राज्य के किसानों से सरंक्षित खेती तकनीक पर सब्सिडी के लिए अपने उद्यानिकी विभाग के जरिये समय-समय पर आवेदन की मांग की करती हैं। सरंक्षित सरंचनाएं के 4000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल पर निर्माण में कुल खर्च राशि का 50 प्रतिशत अनुदान के रूप में राज्य सरकार किसानों को देती हैं। जो किसान या संस्था उद्यानिकी फसल उच्च गुणवत्ता की सब्जियों के उत्पादन तथा फूलों की खेती करना चाहता है उन्हें ही इस योजना में आवेदन के लिए पात्र माना जाएगा। प्रत्येक लाभार्थी को 500 से 4000 वर्ग मीटर के क्षेत्र के लिए अनुदान दिया जाएगा। इस पॉली हाउस/ग्रीन हाउस/शेडनेट हाउस संरचना के लिए किसी भी प्रकार का लोन लेने के लिए किसान बाध्य नहीं होगा। किसान को बैंक से ऋण की आवश्यकता होने पर सहायक निदेशक उद्यान या सहायक निदेशक उद्यान से एलओसी लेनी पड़ेगी।

सरंक्षित खेती पर सब्सिडी कैसें करें आवेदन

पॉली हाउस व नेट हाउस में होने वाली खेती को संरक्षित खेती कहते है। इस में खेती करना सबसे सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि यह फसल को प्राकृतिक आपदाओं एवं मौसम से होने होने वाले समस्याओं एवं नुकसान से बचाता है तथा फसल उत्पादन को सरंक्षण प्रदान करता है। इसके लिए हरियाणा सरकार ने अपने किसानों के लिए पॉली हाउस व नेट हाउस  सब्सिडी के तहत राज्य में सरंक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत बागवानी विकास मिशन द्वारा योजना की शुरूआत की गई है। ताकि राज्य के किसानों को पॉली हाउस व नेट हाउस को लगाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर सके। किसान पॉली हाउस/ग्रीन हाउस/शेडनेट हाउस संरचना निर्माण के लिए अनुदान प्रार्थना पत्र के साथा किसान का भू स्वामित्व दस्तावेज़, लद्यु/ सीमांत प्रमाण पत्र, मिट्टी व पानी की जांच रिपोर्ट के साथ ऑनलाइन या विभाग में जा कर आवेदन कर सकता है। संरक्षित खेती के अंतर्गत किसान नेट हाउस, ग्रीन हाउस, नवीनतम तकनीक से लैस पॉलीहाउस, प्लास्टिक लो-टनल, प्लास्टिक हाई-टनल, प्लास्टिक मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई जैसी आदि तकनीकी सरंचना निर्माण पर सब्सिडी के लिए किसान योजना की ऑफिसियल वेबसाइट https://hortharyana.gov.in/  पर जाकर आपना आवेदन कर सकता है। योजना में आवेदक का चयन पहले आओ, पहले पाओं के आधार पर किया जाएगा।

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