डेयरी फार्मिंग में सबसे अधिक चारे की समस्या का सामना करना पड़ता है, खासकर गर्मियों के दिनों में पशुओं के लिए हरा चारा मिलना मुश्किल हो जाता है। यदि मिलता भी है तो महंगा जिससे दूध की लागत बढ़ जाती है। ऐसे में पशुओं के लिए सस्ता और पोष्टिक चारा कैसे तैयार किया जाए, इस समस्या को दूर करने के लिए गोवा में डेयरी उद्योग की तरक्की के लिए भारत सरकार की ओर से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीआई) के तहत गोवा डेयरी द्वारा पुराने गोवा में आईसीएआर रिसर्च कैंपस में एक हाइड्रोपोनिक्स हरा चारा उत्पादन करने वाली यूनिट लगाई गई है। इस यूनिट में मक्का का उपयोग करके पशुओं के लिए हरा चारा बनाया जाता है जो पशु के लिए काफी पोष्टिक होता है।
अभी गोवा में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत कई डेयरी सहकारी समितियों में 10 और हरा चारा बनाने वाली यूनिट लगाई गई हैं। हर यूनिट प्रतिदिन 600 किलोग्राम हरा चारे उत्पादन करती है। गोवा के आईसीएआर रिसर्च कैंपस ने हाइड्रोपोनिक्स हरे चारे के उत्पादन और फीडिंग प्रैक्टिस को स्टैंडर्डाइज्ड किया है। साथ ही यहां डेयरी किसानों को तकनीकी सलाह भी दी जाती है।
सबसे पहले 1.25 किलोग्राम बिना भिगोए मक्का के बीज को चार घंटे पानी में भिगोया जाता है। अब इन भीगे हुए बीजों को 90X32 सेमी ट्रे में लोड किया जाता है। पीले मक्का (सीटी-818) के हर किलोग्राम से 3.5 किलोग्राम हरा चारा इस मशीन द्वारा तैयार किया जाता है। वहीं सफेद मक्का (जीएम-4) के हर किलोग्राम से 5.5 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक्स हरा चारा तैयार किया जाता है।
यदि बात की जाए पारंपरिक हरे चारे की तुलना में हाइड्रोपोनिक्स हरे चारे में पोषक तत्वों की मात्रा की तो हाइड्रोनिक्स हरे चारे में पोषक तत्व अधिक पाए जाते हैं। जहां पारंपरिक हरे चारे में प्रोटीन की मात्रा 10.7 होती है वहीं हाइड्रोपोनिक्स हरे चारे में इसकी मात्रा 13.6 प्रतिशत होती है। हाइड्रोपोनिक्स हरे चारे में कम कच्चा फाइबर होता है। जहां पारंपरिक हरे चारे में 25.9 प्रतिशत फाइबर पाया जाता है। वहीं हाइड्रोपोनिक्स हरे चारे में 14.1 प्रतिशत कच्चा फाइबर होता है। इस तरह से यह चारा पशुओं के लिए काफी अच्छा पाया गया है।
यह यूनिट ऐसी जगहों के लिए कारगर साबित हो सकती है जहां पशु चारा उगाने के लिए जमीन का अभाव है। हरा चारा पशुओं के लिए बहुत जरूरी है और इससे पशु के दूध देने की क्षमता भी बढ़ती है। गर्मियों में हरे चारे का अभाव हो जाता है। सूखे की स्थिति में तो और भी अधिक समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में मक्का से हरा चारा तैयार करने वाली हाइड्रोपोनिक्स यूनिट वरदान साबित हो सकती है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गोवा के पेरनेम तालुका के मंडेम गांव के सूर्यकांत बी गावडे ने हाइड्रोपोनिक्स ग्रीन फॉडर प्रोडक्शन यूनिट लगाई है। वह इससे हरा चारा तैयार कर रहे हैं। उनके पास 12 हाइब्रिड गाय और चार बछियां हैं। वह रोजाना 60 से 70 लीटर दूध बेचते हैं। उन्होंने पशु को हाइड्रोपोनिक्स हरा चारा खिलाने पर यह अनुभव किया कि प्रति गाय प्रति दिन 1.0 लीटर दूध की बढ़ोतरी हुई जो दूध उत्पादन के 12.5 प्रतिशत के बराबर था। इतना ही नहीं जहां पारंपरिक चारा की खपत एक पशु 24 किलोग्राम होती है वहीं हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से तैयार हरे चारे की प्रति पशु 10 किलोग्राम चारा की ही आवश्यकता रहती है। इस तरह कम चारे की खपत के साथ ही बेतहर दूध का उत्पादन मिल रहा है। इसके अलावा एक से दो किलोग्राम हाइड्रोपोनिक्स चारा खिलाने पर छोटे बछड़ों के शरीर के वजन में बढ़ोतरी हुई है। उनका भार 200 ग्राम से बढ़कर 350 ग्राम हो गया है। इसके शरीर की त्वचा भी बेहतर हुई है। इस तरह इस तकनीक से बने हरे चारे का इस्तेमाल करने पर प्रति गाय दूध उत्पादन में बढ़ोतरी पर 30 रुपए की बचत हो रही है।
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