ERCP Link Project : पूर्वी राजस्थान और मध्य प्रदेश के मालवा तथा चंबल क्षेत्र के पानी की कमी वाले (ड्राय बेल्ट) जिलों में पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी। इसके लिए मध्यप्रदेश, राजस्थान और केंद्र सरकार के बीच दिल्ली में श्रमशक्ति भवन स्थित जल शक्ति मंत्रालय के कार्यालय में संशोधित पार्बती-कालीसिंध-चंबल-ईआरसीपी लिंक परियोजना के त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। दरअसल, मध्यप्रदेश और राजस्थान के ड्राय बेल्ट वाले जिलों में पेयजल, औद्योगिक और कृषि क्षेत्र में सिंचाई उपयोग के लिए पानी उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा कई परियोजनाओं पर काम शुरू किया जा रहा है। इन्हीं में संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल-ईआरसीपी लिंक परियोजना भी शामिल है। इस परियोजना के तहत पार्वती, कालीसिंध और चंबल नदी को जोड़ने का कार्य किया जा रहा है, जिससे पूर्वी राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई जिलों को पानी उपलब्ध होगा। ईआरसीपी लिंक परियोजना से प्रदेश के लगभग 1.5 करोड़ आबादी लाभान्वित होगी।
दिल्ली में श्रमशक्ति भवन स्थित जल शक्ति मंत्रालय के कार्यालय में संशाधित पार्वती-कालीसिंधि-चंबल- ईआरपसीसी लिंक परियोजना के लिए त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए है। इस दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की उपस्थिति में सचिव, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय देबाश्री मुखर्जी, मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा और राजस्थान शासन के अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन अभय कुमार ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित होने के उपरांत मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जानकारी देते हुए कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग दो दशकों से लंबित पार्बती-कालीसिंध-चंबल परियोजना अब मूर्त रूप ले सकेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह परियोजना 5 वर्ष से कम समय में फलीभूत यानी परी होगी। इस परियोजना की वर्तमान लागत लगभग 75 हजार करोड़ रुपए है। प्रदेश के लगभग 1.5 करोड़ आबादी इस परियोजना से लाभान्वित होगी। यह परियोजना प्रदेश की गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, जैसी समस्याओं का समाधान कर प्रदेशवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस परियोजना से मध्यप्रदेश के चंबल और मालवा अंचल के 13 जिलों को लाभ पहुंचेगा, जिससे प्रदेश के ड्राई बेल्ट वाले जिलों जैसे मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, भिंड और श्योपुर में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी। इसके साथ ही औद्योगिक बेल्ट वाले जिलों जैसे इंदौर, उज्जैन, धार, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास और राजगढ़ के औद्योगीकरण को और बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से प्रदेश के मालवा और चंबल अंचल में लगभग 3 लाख हेक्टेयर का सिंचाई रकबा बढ़ेगा, जिसके परिणामस्वरूप इन अंचलों के धार्मिक और पर्यटन केंद्र भी विकसित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह परियोजना निश्चित रूप से पश्चिमी मध्यप्रदेश के लिए एक वरदान है।
इस मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि मध्यप्रदेश और राजस्थान के पानी की कमी वाले 26 जिलों के लिए यह स्वर्णिम सूर्योदय का दिन है। संशाधित पार्वती-कालीसिंधि-चंबल- ईआरपसीसी लिंक परियोजना से इन जिलों में पानी की उपलब्धता बढ़ोगी, जिससे कृषि सहित औद्योगिक क्षेत्र विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि परियोजना से लगभग 5.60 लाख हैकटेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ ही बांधों और बड़े तालाबों में पानी का संचय कर जल-स्तर उठाने में सफलता प्राप्त होगी। संशाधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना को पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना से एकीकृत कर इसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का दर्जा देते हुए अत्यंत कम समय में मध्यप्रदेश तथा राजस्थान राज्यों के बीच सहमति बनी है। यह परियोजना संघीय संघवाद का स्वर्णिम उदाहरण है।
इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा ने कहा कि इस परियोजना से राजस्थान और मध्यप्रदेश के चंबल बेसिन के जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद होगी जिससे दोनों राज्यों के औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को फायदा मिलेगा, और भविष्य में दोनों राज्यों के रिश्ते और प्रगाढ़ होंगे। त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन में इस लिंक परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश और राजस्थान दोनों राज्यों में कुल 5.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रदान करने के साथ-साथ पूर्वी राजस्थान के 13 जिले और मध्य प्रदेश के मालवा और चंबल क्षेत्र के 13 जिलों में पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिये पानी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि समझौता ज्ञापन में लिंक परियोजना के काम का दायरा, पानी का बंटवारा, पानी का आदान-प्रदान, लागत और लाभ का बंटवारा, कार्यान्वयन तंत्र और चंबल बेसिन में पानी के प्रबंधन और नियंत्रण की व्यवस्था शामिल की गई हैं। उल्लेखनीय है कि पार्बती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना की फीजिबिलिटी रिपोर्ट फरवरी 2004 में तैयार की गई थी और वर्ष 2019 में राजस्थान सरकार द्वारा आरसीपी का प्रस्ताव लाया गया था। वर्तमान समझौता ज्ञापन में दोनों परियोजनाओं को एकीकृत कर दिया गया है।
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