राजस्थान की सबसे बड़ी नहर परियोजना पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) को बढ़ावा देने के लिए 13 हजार करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाएगी। राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि इसके तहत पूर्वी राजस्थान के 13 जिले कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर, करौली, धौलपुर, भरतपुर, दौसा, अलवर, जयपुर, झालावाड़, बारां, अजमेर एवं टोंक में पेयजल और सिंचाई की समस्या का समाधान होगा।
देखा जाए तो राजस्थान की गहलोत सरकार राज्य में लोगों के हितों के लिए लगातार एक से बढ़कर एक काम कर रही है, जिनमें आमजन एवं किसानों के लिए महत्वपूर्ण योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ऐसे में सरकार ने जनता की भलाई के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना के कार्य को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसकी घोषणा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने धौलपुर जिले के बाड़ी में विभिन्न विकास कार्यों के शिलान्यास एवं लोकार्पण समारोह के दौरान की।
पेयजल एवं सिंचाई के लिए उपलब्ध होगा जल
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) के कार्य को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। यह नहर परियोजना धौलपुर समेत लगभग 13 जिलों में पेयजल आपूर्ति एवं सिंचाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस परियोजना से राजस्थान की दो लाख हैक्टेयर से अधिक भूमि को सिंचाई के लिए जल की सुविधा मिलेगी। जयपुर, अलवर, भरतपुर, सवाईमाधोपुर, कोटा, बूंदी समेत 13 जिलों में रहने वाली 40 प्रतिशत आबादी को पेयजल उपलब्ध होगा। गहलोत ने इस संदर्भ में आगे कहा कि पार्वती, काली सिंध, चंबल परियोजना को राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के तौर पर घोषित है। केंद्र सरकार को वादा निभाते हुए राज्य में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देना चाहिए. राज्य सरकार अपने स्तर पर सीमित संसाधनों के माध्यम से सरकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने का काम कर रही है।
पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) के लिए खर्च होंगे 13 हजार करोड़
उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश सरकार अपने स्तर पर सीमित संसाधनों के तहत सरकारी योजनाओं के कार्य को आगे बढ़ाने का लगातार प्रयास कर रही है। योजनाओं को सुचारु रुप से चलाने के लिए राज्य सरकार ने अपने स्तर पर पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) के लिए लगभग 13 हजार करोड़ रुपए की राशि का आवंटन किया है। उन्होंने बताया कि सरकार के इस निर्णय के बाद से काली तीर लिफ्ट परियोजना का लाभ भी बाड़ी-बसेड़ी क्षेत्र को वृहद स्तर पर मिलना शुरू होगा।
क्या है पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) है?
दरअसल, पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) राजस्थान राज्य की अब तक की सबसे बड़ी नहर परियोजना है। इस परियोजना (ईआरसीपी) के माध्यम से पूर्वी राजस्थान के झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर, करौली, धौलपुर, भरतपुर, दौसा, अलवर, जयपुर समेत 13 जिलों को साल 2051 तक पेयजल और सिंचाई के लिए जल मिलेगा। इस परियोजना में मानसून के समय पार्वती, कालीसिंध, मेज नदी के बरसाती अधिशेष (जरूरत से ज्यादा) जल को बनास, मोरेल, बाणगंगा और गंभीर नदी तक लाने की योजना है। कुल मिलाकर इस परियोजना के माध्यम से पूर्वी राजस्थान की 11 नदियों को आपस में जोड़ना है।
योजना के तहत 6 बैराज और एक बांध का निर्माण जारी
जानकारी के लिए बता दें कि इस योजना का मुख्य कार्य पेयजल और सिंचाई का जल एकत्रित करना है। इसके लिए योजना के माध्यम से 6 बैराज और एक बांध बनाया जा रहा है। जिनमें बारां जिले की शाहबाद तहसील में कुन्नू नदी पर कुन्नू बैराज, बारां जिले की किशनगढ़ तहसील में कूल नदी पर रामगढ़ बैराज, बारां की ही मंगरौल तहसील में पार्वती नदी पर महलपुर बैराज, कोटा जिले की पीपलदा तहसील में नवनेरा बैराज, बूंदी जिले की इंद्रगढ़ तहसील में मेज नदी पर मेज बैराज, सवाई माधोपुर जिले की चौथ का बरवाड़ा तहसील में बनास नदी पर राठौड़ बैराज बनाए जाने हैं। जिससे मानसून के समय पार्वती, कालीसिंध, मेज नदी के बरसाती अधिशेष (जरूरत से ज्यादा) जल को एकत्रित कर राज्य के उन इलाकों में इस्तेमाल करना है, जहां पानी की कमी है।
पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) के लाभ
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