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कीट प्रबंधन : रासायनिक दवाओं एवं स्प्रेयर कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत सब्सिडी

कीट प्रबंधन : रासायनिक दवाओं एवं स्प्रेयर कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत सब्सिडी
पोस्ट - September 13, 2022 शेयर पोस्ट

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में कीट/रोग, खरपतवार नियंत्रण योजना को किया लागू

देश में लगभग 141 मिलियन हैक्टेयर भूमि पर खेती की जाती है। इसमें लगभग सभी प्रकार की खेती की जाती है। खेती के क्षेत्र में किसानों को काफी जोखिमों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कृषि उत्पादकता में वृद्धि और खेती से होने वाली आय में बढ़ोत्तरी के लिए केंद्र और राज्य सरकारें नई-नई योजनाओं एवं तकनीक को लाती रहती है। इन नई-नई तकनीक एवं योजनाओं से खेती करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। इस कड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने राज्य में कृषि क्षेत्र के विकास एवं किसानों का उच्च उत्पादकता, आय और फसल स्वास्थ्य के उचित प्रबंधन के लिए फसल सुरक्षा समाधान को ध्यान में रखते हुए कीट/रोग, खरपतवार नियंत्रण योजना को लागू किया है। योजना के तहत योगी सरकार राज्य के किसानों को फसल सुरक्षा हेतु कृषि खर्च एवं फसल नुकसान में कमी लाने के लिए अनुदान उपलब्ध करा रही हैं। जिसमें किसानों को कीटनाशक के साथ-साथ फसलों पर छिड़काव करने वाले स्प्रेयर यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है। इसके लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार मंत्री परिषद ने विभिन्न परिस्थितिकीय संसाधनों द्वारा कीट/रोग नियंत्रण की योजना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। योजना के लिए योगी सरकार ने 19257.75 लाख रूपए का बजट निर्धारित किया है। जानकारी के लिए बता दें कि यह योजना पहले वर्ष 2017-18 से वर्ष 2021-22 के लिए लागू की गई थी, जिसे अब योगी सरकार ने अगले 5 वर्षों के लिए आगे बढ़ा दिया है। 

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मंत्रिपरिषद की बैठक में योजना को दी गई मंजूरी

यूपी सरकार की मंत्रिपरिषद की बैठक में कीट/रोग, खरपतवार नियंत्रण योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत पारिस्थितिकीय संसाधनों से फसलों में कीट एवं रोग नियंत्रण किया जाएगा। अगले 5 वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक क्षति को कम किए जाने के लिए योजना को मंजूरी दी गई है। योजना के प्रस्ताव में कहा गया है कि फसलों में समय-समय पर कीट-रोग एवं खरपतवार लगते हैं। मौसम तथा जलवायु में परिवर्तन के साथ ही इसमें तेजी देखी जा रही है। कीट-रोग के कारण फसलों के उत्पादन में 10 से 20 प्रतिशत तक की कमी आती है। जिसमें फसलों में सालाना खरपतवार की वजह से 15 से 20 फीसदी क्षति, फसली रोगों से 26 फीसदी क्षति तो 20 फीसदी नुकसान कीटों की वजह से होता है। इसके अलावा उचित भंडारण की व्यवस्था न होने के चलते 7 फीसदी की क्षति होती है जिसमें 6 फीसदी चूहों व 8 फीसदी अन्य कारणों से होती है। इन कारणों से फसलों की उत्पादन में लागत तो बढ़ती ही है साथ ही किसानों को फसल नुकसान से हानि भी होती है। किसान फसलों की सुरक्षा के लिए विभिन्न प्रकार के कीट प्रबंधक रसायनों के साथ-साथ अन्य कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं, जिससे फसलों के लागत का खर्च बढ़ जाता है। 

पिछले पांच वर्षों में 11,58,321 किसान लाभान्वित

दरअसल उत्तर प्रदेश राज्य में बड़े पैमाने पर खेती होती है। यहां कुल 25,304 हेक्टेयर भूमि पर खेती की जाती है, जो देश की कुल कृषि योग्य भूमि का 12 प्रतिशत है। प्रदेश में पूरे वर्ष में 3 प्रकार की फसलें (रबी, खरीफ और जायद) पैदा की जातीं हैं। प्रदेश में कुल रोजगार का 59 प्रतिशत कृषि क्षेत्र से मिलता है। उत्तर प्रदेश का देश की कृषि उपज में उल्लेखनीय योगदान करता है। देश के खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश का प्रथम स्थान है। इस कारण यूपी की योगी सरकार किसानों को खेती की उत्पादकता को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। राज्य में कृषि उत्पादकों में वृद्धि एवं फसल सुरक्षा हेतु कृषि खर्च एवं फसल नुकसान में कमी करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इसके लिए राज्य सरकर ने वर्ष 2017-18 से वर्ष 2021-22 तक के लिए कीट/रोग, खरपतवार नियंत्रण योजना चलाई गई थी। योजना के तहत इन पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश के 11,58,321 कृषकों को विभिन्न कार्य मदों में लाभान्वित किया गया है। यूपी सरकार ने अब इस योजना को अगले 5 वर्षों के लिए आगे बढ़ा दिया है। योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2022-23 से लेकर वर्ष 2026-27 तक किया जाएगा। अगले 5 वर्षों में प्रदेश के किसानों की फसल को नुकसान से बचाने के लिए 192.57 करोड़ रुपए की धनराशि खर्च की जाएगी। इसमें से मौजूदा वित्तीय वर्ष में 34.17 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

रासायनिक दवाओं एवं स्प्रेयर पर किसानों को 50 प्रतिशत का अनुदान 

यूपी की योगी सरकार की ओर से कीट/रोग, खरपतवार नियंत्रण योजना लागू की गई हैं। इस योजना के लिए 19257.75 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। उत्तर प्रदेश में कीट/रोग, खरपतवार नियंत्रण की योजना 5 वर्षों के लिए लागू की जा रही है। योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2022-23 से लेकर वर्ष 2026-27 तक किया जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष 2022-23 में इस योजना के अंतर्गत विभिन्न कार्य मदों में 3417.90 लाख रूपये की धनराशि व्यय की जाएगी। जिसमें किसानों को 1.95 लाख हेक्टेयर भूमि क्षेत्रफल के लिए अनुदान पर कृषि रक्षा रसायन उपलब्ध कराए जाएंगे। इन रसायनों को फसलों पर छिड़काव के लिए आवश्यक कृषि यंत्रों नैपसेक स्प्रेयर, पावर स्प्रेयर आदि पर भी 50 प्रतिशत का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। वर्ष 2022-23 के लिए 6,000 कृषि रक्षा यंत्र उपलब्ध कराये जाएंगे। इससे किसानों को काफी लाभ होगा। 

कृषि उत्पादकों में वृद्धि एवं फसल सुरक्षा साधनों पर मिलेगी सब्सिडी 

कृषि मंत्री ने बताया कि मंत्रिपरिषद की बैठक में पारित प्रस्ताव के मुताबिक फसलों को सुरक्षित रखे जाने के लिए कीट/रोग, खरपतवार नियंत्रण योजना को मंजूरी दी है। कीट/रोग नियंत्रण की योजना के तहत किसानों को कीटनाशक तथा कृषि उपकरण उपलब्ध कराये जाएंगे। विभिन्न पारिस्थितिकीय संसाधनों द्वारा कीट/रोग नियंत्रण की अनुमोदित योजना के तहत पर्यावरण संरक्षण व विषरहित खाद्यान्न उत्पादन के लिए बायोपेस्टीसाइडस तथा बायोएजेन्ट्स 75 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएगें। खरपतवार/कीट/रोग के नियंत्रण हेतु एकीकृत नाशजीव प्रबंधन प्रणाली (आई.पी.एम.) को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश में कृषि विभाग द्वारा 09 आई.पी.एम. प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई है। इन प्रयोगशालाओं द्वारा बायोपेस्टीसाइड्स जैसे ट्राइकोडरमा, ब्यूवेरिया वैसियाना, एन.पी.वी. एवं बायोएजेंट्स जैसे ट्राइकोग्रामा कार्ड का उत्पादन किया जा रहा है।

उत्पादन सुरक्षित रखने के लिए टंकियों का वितरण 50 प्रतिशत अनुदान पर

प्रस्ताव के मुताबिक फसलों को सुरक्षित रखे जाने के लिए दो, तीन व पांच क्विंटल के भंडार के साधन (टंकी) भी 50 फीसदी के अनुदान पर किसानों को उपलब्ध करवाए जाएंगे। लघु एवं सीमांत कृषकों को अपने उपयोग में आने वाले अन्न को सुरक्षित रखने के लिए विगत वर्षों में 2, 3 एवं 5 क्विंटल क्षमता की बखारियों (टंकी) का वितरण 50 प्रतिशत अनुदान पर किया गया है, जिससे अन्न को सुरक्षित रखने में सफलता प्राप्त हुई है। वर्ष 2022-23 में किसानों को अनुदान पर 10,000 बखारियों का वितरण किया जाएगा। इस योजना में 2022 से 27 तक 41 लाख 42 हजार किसान को लाभान्वित किया जाएगा।

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