देश में इस बार मानसून पिछले साल के मुकाबले कुछ कम रहा है। जिसके कारण इस साल खरीफ फसलों की बुवाई के क्षेत्रफल में कमी आई है। कृषि विभाग द्वारा जारी आंकड़ों की बात करें तो इस साल खरीफ फसलों की बुवाई में 22 फीसदी की कमी आई है। मात्र गुजरात ही एक ऐसा राज्य है, जहां खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल की तुलना में इस बार अधिक हुई है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं झारखंड तथा बिहार जैसे कृषि प्रधान सूबों में कम बारिश की वजह से खेती प्रभावित हो रही है। इसी क्रम में बिहार सरकार कमजोर मानसून से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए फल से लेकर फूल, सब्जी और दूसरे बागवानी कार्यों के लिए प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। इन प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से बिहार में बागवानी फसलों का चलन बढ़ाया जा रहा है। राज्य में इन योजनाओं के जरिए किसानों को बागवानी फसलों की खेती के लिए इकाई लागत पर सब्सिडी दी जाती है, ताकि खेती में खर्च को कम करके मुनाफे को बढ़ाया जा सके।
इसी कड़ी में राज्य कृषि विभाग और उद्यान निदेशालय की ओर से विशेष उद्यानिक फसल योजना के तहत किसानों को अल्पकालीन प्याज की खेती के लिए 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसके लिए कृषि विभाग द्वारा किसानों से ऑनलाइन आवेदन भी मांगे गए हैं। योजना के तहत सब्सिडी के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है। राज्य के इच्छुक किसान योजना के तहत प्याज की खेती पर सब्सिडी के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत बिहार राज्य में विशेष उद्यानिक फसल योजना के तहत अपना ऑनलाइन आवेदन दे सकते हैं। योजना में आवेदन प्रक्रिया बेहद आसान है। इस आवेदन प्रक्रिया के बारे में हम आपको ट्रैक्टरगुरु के इस लेख में बताने जा रहे हैं। अतः इस लेख को ध्यानपूर्वक अंत तक जरुर पढे़।
दरअसल बिहार राज्य बागवानी मिशन के तहत सूक्ष्म सिंचाई आधारित शुष्क बागवानी योजना के तहत सभी जिलों में शुष्क जमीन पर एक साथ दो फसलों की खेती की कवायद जारी है। इसी उद्देश्य से बिहार सरकार राष्ट्रीय बागवानी मिशन और मुख्यमंत्री बागवानी मिशन योजनाओं के अंतर्गत विशेष उद्यानिक फसल योजना के तहत आंवला, बेर, जामुन, बेल, कटहल एवं नींबू के साथ मगही पान, चाय और प्याज तथा हाइब्रिड सब्जियों की खेती के लिए 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दे रही है। बिहार कृषि विभाग, बागवानी निदेशालय की ओर से बागवानी फसलों की खेती में प्याज की खेती एवं उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसके लिए बिहार में विशेष उद्यानिकी फसल योजना के तहत प्रति हेक्टेयर जमीन पर प्याज की खेती के लिए अधिकतम इकाई लागत 98,000 रुपये निर्धारित की गई है, इस निर्धारित राशि पर किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान यानी 49,000 रुपये का आर्थिक अनुदान लाभ दिया जाएगा। आवेदित किसान को प्याज की खेती में कुल लागत का सिर्फ आधा हिस्सा ही वहन करना पड़ेगा। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
योजना के तहत राज्य में प्याज सहित कई बागवानी फसलों खेती तथा उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रति हेक्टेयर के तय हिसाब से किसानों को इकाई लागत का 50, 75, 90 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। बिहार राज्य में बागवानी और इससे संबंधी कार्यों पर सब्सिडी योजना के लिए आवदेन प्रक्रिया अभी जारी है। इस योजना का लाभ उठाने के इच्छुक किसानों को बिहार बागवानी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाकर अपना ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके बाद सभी संबंधित कागजात अपने जिले के बागवानी अधिकारी कार्यालय में जमा करवाने होंगे। अधिक जानकारी के लिए नजदीकी जिले में सहायक निदेशक, उद्यान से संपर्क करके भी अनुदान का लाभ उठा सकते है।
एलपीसी या जमीन का कैरेंट रसीद
पहचान पत्र या आधार कार्ड
बैंक पासबुक की फोटो कॉपी
किसान निबंधन संख्या
लीज का एग्रीमेंट पेपर
बिहार राज्य बागवानी मिशन के तहत विशेष उद्यानिक योजना के माध्यम से किसानों को प्याज समेत आंवला, बेर, जामुन, बेल, कटहल एवं नींबू के साथ हाइब्रिड सब्जियों की खेती पर अलग-अलग अनुदान दिया जा रहा है। जिसमें फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान किया है। इसके अतिरिक्त अनानास, गेंदा समेत खुले फूलों की खेती, मसाले की खेती और दूसरे सुगंधित पौधों की खेती एवं हाइब्रिड सब्जियों की खेती के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। संबंधित जानकारी के अनुसार इसके तहत 875 हेक्टेयर में खेती करने का लक्ष्य रखा गया है। बिहार सरकार द्वारा सात निश्चय-2 के तहत सूक्ष्म सिंचाई आधारित शुष्क बागवानी योजना को 2.92 करोड़ रुपये की लागत पर 3 वर्षों के लिए स्वीकृति दी गई है। राज्य सरकार ने इस योजना को आगे संचालित करते हुए इसे 3 साल के लिए बढ़ा दिया है। इस योजना के अंतर्गत किसान अधिकतम 4 हेक्टेयर तथा न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर में बागवानी फसलों की खेती के लिए आवेदन कर सकते हैं।
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