SMAM SCHEME : किसानों को 15.75 लाख से अधिक कृषि यंत्रों पर दी गई सब्सिडी

SMAM SCHEME : किसानों को 15.75 लाख से अधिक कृषि यंत्रों पर दी गई सब्सिडी
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किसानों को सब्सिडी पर 15.75 लाख से अधिक कृषि यंत्रों का वितरण, जानें पूरी डिटेल्स

Sub-Mission Plan on Agricultural Mechanization (SMAM) : केंद्र सरकार द्वारा किसान हितों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2014-15 से कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (SMAM) योजना की शुरूआत की गई। इस योजना के तहत केंद्र सरकार देश के किसानों को सब्सिडी पर खेती की मशीनें खरीदने की सुविधा प्रदान करती है। वहीं, फार्म मशीनरी बैंक, हाईटेक हब की स्थापना और कस्टम हायरिंग केंद्र खालने के लिए किसान और किसान समूहों को अलग-अलग अनुदान प्रतिशत देती है। स्माम योजना के तहत अलग-अलग कृषि मशीनों पर किसान वर्ग के आधार पर 40 से 50 प्रतिशत तक की व्यक्तिगत सब्सिडी तथा कृषि मशीनरी बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना के लिए किसान उत्पादक संगठनों, किसान समितियों और उद्यमियों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी केंद्र सरकार की ओर से प्रदान की जाती है।

इस बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा इस वर्ष फरवरी में संसद में पेश की गई एक र‍िपोर्ट में बताया क‍ि कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन (एस.एम.ए.एम) योजना के तहत अब तक देशभर में 44 हजार 598 कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) की स्थापना की गई है, जबक‍ि क‍िसानों को सब्स‍िडी पर 15 लाख से अधिक कृषि मशीनों की आपूर्त‍ि की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, स्माम (SMAM) मिशन योजना के तहत आंध्र प्रदेश राज्य में सबसे अधिक किसान लाभान्वित हुए है। यहां इस योजना के तहत 10 हजार 598 कृषि मशीनरी बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) की स्थापना की गई है, जबकि राज्य के क‍िसानों को सब्सिडी पर 251514 कृषि यंत्रों का लाभ दिया गया है।

स्माम योजना का मकसद

बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (Sub-Mission Plan on Agricultural Mechanization) योजना के माध्यम से देशभर में किसानों को कृषि मशीनीकरण से संबंधित विभिन्न गतिविधियों जैसे फार्म मशीनरी बैंक, हाईटेक हब की स्थापना और कस्टम हायरिंग केंद्र के लिए अनुदान दिया जाता है, ताकि छोटे और सीमांत किसानों को कृषि संबंधित मशीनें किराए पर उपलब्ध करवाकर उनकी खेती क्षमता को बढ़ावा दिया जा सके। स्माम योजना का मकसद देश के कृषि क्षेत्र में यंत्रीकरण को बढ़ावा देकर खेती संबंधित कायों में मानवीय श्रम लगात को कम कर किसानों की आय बढ़ाना है। देश के किसी भी राज्य के किसान जो इस योजना की पात्रता रखते है, वे इस योजना तहत आवेदन कर कृषि यंत्रों की खरीद पर आर्थिक सहातया प्राप्त कर सकते हैं। इसके प्रयोग से फसल उत्पादकता और उत्पादन बढ़ाकर अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं।

मशीनों को दिया जाता है इतना अनुदान

दरअसल खेती में उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के बीजों की बुवाई, उर्वरकों का छिड़काव और सिंचाई जैसे अन्य संबंधित कार्यों को कम मानवीय श्रम लागत पर पूरा करने में कृषि यंत्र बड़ी भूमिका निभाते हैं। आज देश में ज्यादा से ज्यादा किसानों द्वारा खेती में ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर, पैडी राइस ट्रांसप्लांटर, मल्टीक्रॉप थ्रेशर, लेजर लैंड लेवलर,पावर हैरो, हैप्पी सीडर / सुपर सीडर, बेलर, हाइड्रॉलिक प्रेस स्ट्रॉ बेलर (ट्रैक्टर चलित), जीरो टिल सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल और रोटावेटर जैसी कई अन्य संबंधित मशीनों उपयोग किया जा रहा है और इससे उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने की किसानों की क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है। हरियाणा, मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे कृषि सूबे राज्य में स्माम योजना के तहत किसान उत्पादक संगठन (FPO), किसान समितियों को  ट्रैक्टर, रोटावेटर, कल्टीवेटर, थ्रेसर, हैरो पर अनुदान लाभ दिया जा रहा है। वहीं, इन सीटू योजना के तहत फसल अवशेष प्रबंधन के कृषि यंत्र जैसे रोटरी मल्चर, हैप्पी सीडर, स्ट्रॉ रीपर, रीपर-कम बाइंडर पर लाभार्थियों को 50 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है।

इन किसानों को प्राथमिकता से दिया जाता है लाभ

केंद्रीय क्षेत्र की योजना कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (SMAM) का असर कई कृषि सूबों राज्य में दिखाई देने लगा है। स्माम किसान योजना के तहत किसान खेती की विभिन्न अधुनिक मशीन सब्सिडी पर खरीदकर खेती कार्य में श्रम लागत कम कर पा रहे हैं। वहीं, कस्टम हायरिंग केंद्र और कृषि मशीनरी बैंक से छोटे और सीमांत किसान किराये पर खेती उपकरण लेकर आसानी से खेती कर पा रहे हैं। इस योजना से वायु प्रदूषण और किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद मिल रही है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (Sub-Mission on Agricultural Mechanization) यानी स्माम किसान योजना (Smam Kisan Yojana) के तहत किसानों को 15 लाख 75 हजार 719 कृषि मशीनरी और उपकरण प्रदान किए गए हैं, जिनमें ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर, पावर टिलर, स्व-चालित मशीनरी, ट्रैक्टर चलित / स्वचालित उपकरण, कृषि ड्रोन और पौध संरक्षण कृषि उपकरण तथा मशीनें शामिल हैं। इस योजना के तहत एससी (SC), एसटी (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के किसानों को प्राथमिकता से कृषि यंत्रों पर अनुदान का लाभ दिया जाता है।

स्वयं सहायता समूहों को दिए जा रहे हैं ड्रोन

बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा देश के कृषि क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक की मदद से खाद व कीटनाशक छिड़काव को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए लखपति ड्रोन दीदी योजना की शुरूआत करने की मंजूरी केंद्र सरकार द्वारा दी गई है। योजना के 15 हजार महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन उड़ाने और मरम्मत करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे स्वयं सहायता समूहों (SGH) से जुड़ी महिलाओं की आय में वद्धि की जा सके। “लखपति ड्रोन दीदी“ योजना के तहत वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान प्रगतिशील महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को 15000 कृषि ड्रोन दिए जा रहे हैं। बात दें कि ड्रोन खरीदने के लिए एसएचजी को ड्रोन एवं सहायक उपकरण की लागत का 80 प्रतिशत या अधिकतम 8 लाख रुपए तक की सब्सिडी केंद्र सरकार की ओर से दी जाती है। मालूम हो कि एक ड्रोन की कीमत लगभग 3 से 10 लाख रुपए के बीच तक होती है।

इन राज्यों में सब्सिडी पर दी गई है मशीनें

बता दें कि देश में पराली जलाने की घटनाओं को कम करने और वायु प्रदूषण लेवल में सुधार करने के लिए केंद्र सरकार कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन के तहत पराली मैनेजमेंट के लिए उपयोगी मशीनों पर किसानों को अनुदान देती है। इसके तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) राज्यों के अलावा अन्य राज्यों के लिए 40 से 50 प्रतिशत की सीमा तक विभिन्न प्रकार के कृषि मशीनरी और उपकरणों की खरीद के लिए सब्सिडी प्रदान की जाती है और पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) राज्यों के लिए यह प्रति लाभार्थी 1.25 लाख रुपए तक 100 प्रतिशत सीमित है। इस योजना के तहत पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अलग से योजना बनाकर वर्ष  2018-19 से अब तक लगभग 2, लाख 95 हजार 845 मशीनें सब्सिडी पर दी गई हैं। सरकार का दावा है क‍ि इसके तहत अब तक पंजाब में सब्सिडी पर 137407 मशीनें, हर‍ियाणा में 89770 मशीनें, उत्तर प्रदेश को 68421 मशीनें और चौथे नंबर पर द‍िल्ली में 247 पराली मैनेजमेंट की मशीनों की आपूर्ति की गई है।

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