Skill Training For Rural Youth: राज्य में छोटे, सीमांत एवं कम जोत वाले किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए झारखंड सरकार कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है, जिनके अंतर्गत अलग-अलग तरह से लाभार्थियों को लाभान्वित किया जाता है। बीते दिनों झारखंड सरकार की केबिनेट ने राज्य की महिलाओं के पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता के खर्च को देखते हुए “मुख्यमंत्री मइयां सम्मान योजना” शुरू की। इस योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्र की 21 से 50 वर्ष तक की महिलाओं को 1000 रुपए प्रति महीने दिए जाएंगे। सरकार की इस योजना में उन महिलाओं को लाभ दिया जा रहा है, जिनके परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपए से कम है। इस कड़ी में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए एक अहम निर्णय लिया है, जिसके लिए राज्य के युवाओं को माली का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही कृषक मित्रों को प्रशिक्षण के साथ-साथ सब्जियों की खेती के लिए भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। ऐसे में राज्य के युवाओं के पास माली बनने का सुनहरा मौका है, क्योंकि इस प्रशिक्षण को पाकर युवा अपने लिए रोजगार का एक बेहतर विकल्प तलाश सकते हैं। बड़े-बड़े शहरों और राज्यों में प्रशिक्षित माली की भी डिमांड खूब होती है। आइए, जानते हैं इसमें किन युवाओं को प्रशिक्षण मिलेगा और वे इसके लिए कहां आवेदन कर सकते हैं।
झारखंड सरकार निजी क्षेत्र में युवाओं- युवतियों को नौकरी देने की तैयारी कर रही है, जिसके लिए राज्य के युवक-युवतियों को सरकार माली का प्रशिक्षण देने जा रही है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य राज्य के युवाओं को निजी तौर पर काम करने के लिए प्रशिक्षित करना है और राज्य के बड़े शहरों का सौंदर्यीकरण करना है।
राज्य के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारत सरकार और राज्य सरकार के चिह्नित संस्थानों या एग्रीकल्चर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त संस्थानों की मदद से माली का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे उनकी क्षमताओं का विकास किया जा सके। इस प्रशिक्षण का लाभ राज्य के किसानों और शहरों को मिलेगा। मान्यता प्राप्त संस्थाओं में युवाओं को दिया जाने वाला यह प्रशिक्षण 200 घंटे का होगा, जिसे निर्धारित अवधि 25 दिनों में संपन्न किया जाएगा। इसके लिए उम्मीदवार को प्रशिक्षण सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। इतना ही नहीं माली का प्रशिक्षण पाने के इच्छुक युवक को राज्य सरकार की ओर से 17,500 रुपए दिए जाएंगे।
माली बनाने के लिए युवाओं को मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन संस्थानों में इच्छुक युवकों को प्रतिदिन 8 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके लिए उन्हें 336 रुपए प्रतिदिन मिलेंगे। यह प्रशिक्षण 200 घंटे यानी 25 दिन में पूरा होगा। इसके लिए उन्हें सरकार की तरफ से 8,400 रुपए दिए जाएंगे। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें रहने और खाने के लिए प्रतिदिन 220 रुपए मिलेंगे, जबकि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रत्येक युवक को 30 दिनों के लिए 6600 रुपए प्राप्त होंगे। साथ ही ट्रेनिंग और मूल्यांकण एवं प्रमाण पत्र (सर्टिफिकेट) के प्रति प्रशिक्षणार्थी एक हजार रुपए दिए जाएंगे, जबकि परिवहन पर खर्च के लिए वास्तविक व्यय या फिर अधिकतम 1,500 रुपए उम्मीदवार को मिलेंगे। सरकार इस तरह से प्रशिक्षण कर रहे प्रत्येक युवा पर कुल 17500 रुपए खर्च करेगी।
माली का प्रशिक्षण पाने वाला युवा राज्य का स्थानीय निवासी होना चाहिए। इस प्रशिक्षण के लिए उन युवाओं का चयन किया जाएगा, जिनकी आयु 20 वर्ष से 45 वर्ष के बीच है। माली का प्रशिक्षण पाने के लिए प्रशिक्षणार्थी की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता दसवीं पास होनी चाहिए। साथ ही उन्हें प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए कृषि और उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र में अनुभव होना जरुरी है। ग्राम पंचायत, वार्ड और मुखिया द्वारा अनुमोदित युवा किसानों को ही इस प्रशिक्षण मे शामिल किया जाएगा। पूरे राज्य में योजना के तहत 600 युवाओं को माली का प्रशिक्षण देने के लिए चयनित किया जाएगा।
झारखंड सरकार द्वारा माली के प्रशिक्षण के साथ ही राज्य के युवाओं को बागवानी और उद्यान मित्र- किसानों को 5 दिनों तक किसान मित्र का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। राज्य के सभी जिलों के पंचायत और प्रखंड स्तर पर चयनित कृषक मित्रों को उद्यानिकी फसलों की तकनीकी खेती के लिए के संबंध में जिला स्तर पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए प्रति बागवान प्रति दिन 336 रुपये दिए जाएंगे और रहने और खाने के लिए प्रति व्यक्ति को 220 रुपए प्रतिदिन दिया जाएगा। कुल मिलाकर इस प्रशिक्षण के लिए प्रति कृषक मित्र को 2780 रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा यात्रा भत्ता के लिए 1 हजार रुपए प्रति उम्मीदवार को अलग से दिए जाएंगे। इस तरह से प्रति कृषक मित्र को 3780 रुपए सरकार की ओर दिए जाएंगे। प्रशिक्षण के लिए पंचायत स्तर पर एक-एक बागवान मित्र का चयन किया जाएगा। चयन उनका होगा, जिनके पास प्रखंड, पंचायत स्तर पर बागवानी कार्यों का अनुभव है। शैक्षणिक योग्यता दसवीं पास या उसके समकक्ष होनी चाहिए। साथ ही उसके पास साइकिल या मोटरसाइकिल चलाने की जानकारी होनी चाहिए।
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