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राष्ट्रीय बांस मिशन योजना : बांस की खेती के लिए सरकार से मिलेगी 50% सब्सिडी

राष्ट्रीय बांस मिशन योजना : बांस की खेती के लिए सरकार से मिलेगी 50% सब्सिडी
पोस्ट -31 दिसम्बर 2022 शेयर पोस्ट

 राष्ट्रीय बांस मिशन योजना: किसानों को बांस से मिलेंगा सालों-साल तक मुनाफा, सरकार दे रही है 50 प्रतिशत सब्सिडी  

 बांस की खेती - भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक फसलों की खेती के साथ अब कमर्शियल फसलों की खेती भी काफी बड़े पैमाने होने लगी है। पिछले कुछ वर्षों से किसान पारंपरिक फसलों के स्थान पर कमर्शियल फसलों की खेती में हाथ आजमा रहे है। इसके लिए सरकार भी अपनी ओर से किसानों की पूरी मदद करती है। मुनाफेदार कमर्शियल फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए देशभर में बीते कुछ दशकों के अंदर केंद्र एवं राज्य सरकारों ने अपने-अपने स्तर पर कई महत्वपूर्ण योजनाएं लॉन्च किया है। इसके परिणाम स्वरूप किसानों का रूझान भी कमर्शियल फसलों की तरफ होने लगा है। ऐसे में बांस  कमर्शियल फसलों में एक बहुत अच्छा विकल्प बनकर उभर है। यदि आप भी खेती के किसी कमर्शियल फसल का चुनाव करना चाहते हैं, तो बांस की खेती और प्रसंस्करण का एग्री बिजनेस आइडिया आपको अच्छा पैसा दिलवा सकता है। यह आपको सालो-साल तक मुनाफा देता रहेगा। इसकी खेती में ज्यादा देख-भाल की भी अवश्यकता नहीं पड़ती है। खास बात यह है कि इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ’राष्ट्रीय बांस मिशन’ का संचालन भी कर रही है। जिसके तहत किसानों को बांस के पौधों पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी भी दी जाती है। ऐसे में किसान सब्सिडी पर बांस की खेती लगा सकते है और सालों-साल मुनाफा देने वाला बिजनेस कर सकते हैं। आइए ट्रैक्टरगुरु के इस लेख में जानते हैं कैसे सब्सिडी पर बांस की खेती से सालों-साल मुनाफा कमाया जा सकता है। 

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राष्ट्रीय बांस मशीन (National Bamboo Machine)

कृषि मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अुनसार इस समय देश में कुल 136 बांस की प्रजातिय है। जिनमें से 125 स्वदेशी और 11 विदेशी प्रजातियां हैं। कृषि मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार भारत हर साल 13.96 मिलियन टन बांस का उत्पादन भी करता है। बांस उत्पादन में चीन के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत में बांस की खेती मध्य प्रदेश, असम, कर्नाटक, नगालैंड, त्रिपुरा, उड़ीसा, गुजरात, उत्तराखंड व महाराष्ट्र आदि राज्यों में काफी बड़े पैमान में होती है। यहां मिट्टी और जलवायु इसकी खेती के लिए सबसे अनुकूल रहते हैं। लेकिन बीते कुछ दशकों से देखने में आ रहा है कि किसान इसकी खेती करने से बच रहे है। बांस की खेती को  प्रमोट करने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार की ओर से ’राष्ट्रीय बांस मिशन की शुरूआत की गई है, जिसके तहत बांस की खेती को बढ़ावा देने के किसानो को अलग-अलग तरह से सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया। 

बांस की खेती के सरकार की ओर से दी जानें वाली सब्सिडी 

केंद्र सरकार राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत बांस की खेती को बढ़ा दे रही हैं। इसके लिए सरकार किसानों को 50 प्रतिशत की आर्थिक मदद भी दे रही है। इसमें राज्य  सरकारें भी योगदान दे रही हैं। जिसमें उत्तर पूर्व के अलावा अन्य क्षेत्रों में बांस की खेती के लिए सरकार 50 प्रतिशत सब्सिडी देती है तथा बाकि 50 प्रतिशत किसान को खर्च करना होता है। किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी, जिसमें से केंद्र और राज्य सरकार 60: 40 प्रतिशत सब्सिडी देती हैं। उत्तर पूर्व क्षेत्रों के लिए यह राशि 60 फीसदी सरकारी और 40 फीसदी किसान कि होगी। नॉर्थ ईस्ट के किसानों को मिलने वाली 60 फीसदी सब्सिडी में से 90 फीसदी सब्सिडी केंद्र सरकार और 10 फीसदी राज्य सरकार देगी। इस मिशन के तहत हर जिले में नोडल अधिकारी बनाया गया है। आप अपने नोडल अधिकारी से भी इस योजना से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा आप अपने नजदीकी कृषि विभाग के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं या राष्ट्रयी बांस मिशन का ऑफिशियल वेबसाइट https://nbm.nic.in/  पर भी विजिट कर सकते हैं।

सब्सिडी के तौर पर 120 रुपए प्रति पौधा

बांस की खेती को प्रोत्साहित करने के उद्‌देश्य से राष्ट्रीय बांस मिशन (दंजपवदंस इंउइवव उपेेपवद) योजना चलाई जा रही है। राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत एक आंकड़े के अुनसार 3 साल में प्रति पौधे की औसत लागत 240 रूपए आती है जिसके तहत सरकार द्वारा किसानों को सब्सिडीे के रूप में 120 रूपये प्रति पौधा मिल जाता है। एक्सपटर््स के माने तो एक एकड़ खेत में कुल 1500 बांस के पौधों की रोपाई की जा सकती है, जिसमें कुछ तीन लाख 60 हजार रुपए की लागत आती है। इस मिशन के तहत किसानों को तय प्रावधान के हिसाब से करीब 1.80 लाख रुपए सब्सिडी के रुप में मिल सकती हैं। यह पूरी तरह से किसान के ऊपर निर्भर करता है कि वो कितने एरिया में बांस की खेती करना चाहता है।

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बंजर जमीन से होगी बंपर कमाई 

कृषि एक्सपर्टस  के अुनसार बांस पर सूखे एवं कीट बीमारियों का कोई प्रकोप नहीं होता है। इसके खेती में अन्य फसलों की तरह ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती है। इसे एक बार लगा दिया जाए तो 3 साल बाद यह उपज देने लगता है। और  लगभग 40 सालों तक उपज दे सकता है। भारत के कई राज्यों के किसान बंजर भूमि या मौसम की मार से परेशान रहते हैं। ऐसे किसानों के लिए बांस की खेती उनके लिए वरदान साबित हो सकती है। वर्तमान में किसानों के बीच बांस की खेती का चलन बढ़ता जा रहा है। बांस के एक एकड़ में खेत में 1500 से 2000 पौधों की रोपाई कर की जा सकती हैं। एक पौधा 240 रुपये का पड़ता है, तो एकड़ के लिए 3,60,000 से 5 लाख तक का खर्च आ सकता है, जिस पर सरकार की तरफ से 50 प्रतिशत सब्सिडी मिल जाती है। एक हेक्टेयर बांस की खेती से 30 टन बांस प्राप्त हो जाता है, जो बाजार में करीब 2,500 से 3,000 रुपये प्रति टन के भाव बिकता है। इस हिसाब से प्रतिवर्ष 6 से 7 लाख रुपये कमा सकते हैं।.

मध्य प्रदेश में कटंग बांस का रोपण

वर्तमान समय में मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार किसानों को बांस की खेती के लिए प्रेरित कर रही है। इसके लिए राष्ट्रीय बांस मिशन के माध्यम से “एक जिला-एक उत्पाद” योजना के तहत देवास जिले में एक हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में कटंग बांस का रोपण किया गया। जिले में विकास खंड देवास, सोनकच्छ, बागली, टोंकखुर्द, कन्नौद और खातेगांव के 448 किसानों ने 541 हेक्टेयर भूमि पर 2,16,281 बांस के पौधों का रोपण किया है। मनरेगा से वन क्षेत्रों में बांस पौधों का रोपण कर 46 महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। 

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