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उर्वरक सब्सिडी : 51 हजार करोड़ रुपये की मंजूरी, किसानों को मिलेगा तोहफा

उर्वरक सब्सिडी : 51 हजार करोड़ रुपये की मंजूरी, किसानों को मिलेगा तोहफा
पोस्ट - November 04, 2022 शेयर पोस्ट

रबी सत्र 2022-23 (01 अक्टूबर 2022 से 31 मार्च 2023 तक) के लिए उर्वरक अनुदान को दी स्वीकृति 

देशभर में रबी सीजन 2022-23 की शुरूआत हो चुकी है। ऐसे में रासायनिक खाद और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर तैयारी कर रही है। ऐसे में केंद्र सरकार ने देश के करोडों किसानों को रबी फसलों की बुवाई से पहले बड़ी राहत दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2022-23 में रबी सत्र में किसानों को फॉस्फेटिक और पोटाश (पीएंडके) उर्वरकों के लिए 51,875 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार ने इस संबंध में एक प्रस्ताव को मंजूरी दी। रिपोर्टस् के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने रबी सीजन 2022-23 में पीएंडके उर्वरकों के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरों को मंजूरी दी। सभी फॉस्फेट और पोटास उर्वरक रियायती कीमतों पर मिलने से किसानों को काफी सहायता होगी। 

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सीसीईए ने सब्सिडी (एनबीएस) दरों को मंजूरी दी

केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2022-23 की दूसरी छमाही के दौरान रबी सत्र के लिए फॉस्फेटिक और पोटाश (पीएंडके) उर्वरकों के लिए 51,875 करोड़ रुपये की सब्सिडी को स्वीकृति दे दी है। केंद्र सरकार रबी-2022 (01 अक्टूबर 2022 से 31 मार्च 2023 तक) की फसल के लिए जारी इस सब्सिडी पर केंद्र सरकार 51,875 करोड़ रुपये खर्च करेगी। रिपोर्टस् के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने नाइट्रोजन (एन) के लिए 98.02 रुपये प्रति किलोग्राम, फास्फोरस (पी) के लिए 66.93 रुपये प्रति किलोग्राम, पोटाश (के) के लिए 23.65 रुपये प्रति किलोग्राम और सल्फर (एस) के लिए 6.12 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी को मंजूरी दी है। मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित इन सब्सिडी दरों में माल ढुलाई सब्सिडी के जरिये स्वदेशी उर्वरक (एसएसपी) के लिए समर्थन शामिल है। 

वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में पीएंडके उर्वरकों के लिए 60,939.23 करोड़ रुपए की सब्सिडी को मंजूरी दी थी

बयान में आगे कहा गया कि अंतरष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल के भाव में बढ़ोतरी के बाबजूद केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी इफको ने वर्ष 2022 में खरीफ सीजन के लिए उर्वरक की कीमतों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की थी। उर्वरक और कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव को मोटेतौर पर केंद्र सरकार द्वारा वहन किया गया है। पहले छमाही (खरीफ सत्र) कि भांति वित्त वर्ष 2022-23 की दूसरी छमाही (रबी सत्र) के दौरान सभी प्रकार के उर्वरकों का मूल्य सामान रहेगा। सरकार ने अप्रैल से शुरू हुए वित्त वर्ष के पहले छह महीनों (खरीफ सत्र) में पीएंडके उर्वरकों के लिए 60,939 करोड़ रुपये की सब्सिडी को मंजूरी दी थी। 

उर्वरक के लिए सालाना दी जाती है 2.25 लाख करोड़ की सब्सिडी 

बयान में कहा गया कि उर्वरक कंपनियों को स्वीकृत दरों के अनुसार सब्सिडी जारी की जाएगी, ताकि वे किसानों को सस्ती कीमतों पर उर्वरक उपलब्ध करा सकें। सरकार ने यह कदम उर्वरकों और कच्चे माल यानी यूरिया, डीएपी, एमओपी और सल्फर की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी वृद्धि को देखते हुए उठाया है। सरकार ने डीएपी सहित फॉस्फेट और पोटास उर्वरकों पर सब्सिडी बढ़ाकर ऊंची कीमतों को वहन करने का निर्णय लिया है। सरकार उर्वरक निर्माताओं/आयातकों के माध्यम से किसानों को रियायती मूल्य पर फॉस्फेट और पोटास उर्वरकों के लिए यूरिया और 25 ग्रेड उर्वरक उपलब्ध करा रही है। फॉस्फेट और पोटास उर्वरकों पर सब्सिडी, एनबीएस योजना द्वारा 01 अप्रैल 2010 से लागू है। योजना के तहत सरकार किसानों को सस्ती कीमतों पर फॉस्फेट और पोटास उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। केन्द्र सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी इफकों द्वारा खाद मूल्य निर्धारित किया जाता है। एवं उसी भाव में किसानों को खाद बेची जाती है। तथा सरकार इन उर्वरकों की खरीद पर सरकार सब्सिडी भी देती है, जिससे किसानों को ज्यादा कीमत भी नहीं चुकानी पड़ती है। सरकार की तरफ से उर्वरकों के लिए सालाना 2.25 लाख करोड़ की सब्सिडी दी जाती है।

आवश्यकता को पूरा करने के लिए करना पड़ता है उर्वरक का आयात

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने अपने बयान में कहा कि देश में सभी प्रकार के उर्वरकों का आयात करना पड़ता है। रासायनिक खादों में सबसे ज्यादा यूरिया का उपयोग किया जाता है। वर्ष 2020-21 के आंकड़ों की मानें तो देश में यूरिया की 350.51 लाख टन, डीएपी 119.18 लाख टन, एनपीके 125.82 लाख टन तथा एमओपी 34.32 लाख टन की आवश्यकता थी। उर्वरक का उत्पादन जरूरत से कम होने के कारण आयातित उर्वरक का मूल्य अंतराष्ट्रीय बाजार के अनुसार रहता है। वर्ष 2020-21 में विभिन्न प्रकार के उर्वरक का आयात इस प्रकार है। यूरिया - 98.28 लाख टन , डीएपी - 48.82 लाख टन,  एनपीके - 13.90 लाख टन,  एमओपी- 42.27 लाख टन उर्वरक का आयात किया गया था।

देश के कई राज्य खाद की कमी से जूझ रहे है

सरकार ने अपने बयान में कहा कि किसान रबी फसलों खाद व यूरिया की पर्याप्त तैयारी करता नजर आ रहा है। क्योंकि वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में पीएंडके उर्वरकों कमी का संकट खड़ा हो गया था । ऐसे में रबी सीजन फसलों की बुवाई शुरू होने जार रही है, और बिहार, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, तमिलनाडु और मध्यप्रदेश सहित देश के कई राज्यों में किसान रासायनिक खाद की कमी से जूझ रहे हैं। रासायनिक खाद और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार खाद वितरण केंद्रों पर समुचित मात्रा में खाद की सप्लाई कर रहे हैं। सहकारी समितियां, बाजारों से किसानों को सब्सिडी दर पर नगद राशि में खाद उपलब्ध कराई जा जाएंगी। किसानों की मांग को पूरा करने के लिए सरकार बाहर से बड़ी मात्रा में खाद का आयात कर रही है।

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