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फसल राहत योजना - खरीफ फसलों में हुए नुकसान की भरपाई करेगी सरकार

फसल राहत योजना - खरीफ फसलों में हुए नुकसान की भरपाई करेगी सरकार
पोस्ट - July 25, 2022 शेयर पोस्ट

झारखंड में शुरू हुई फसल राहत योजना, किसानों को फसल नुकसान का दिया जाएगा मुआवजा

केन्द्र की मोदी सरकार ने साल 2016 में पीएम फसल बीमा योजना को शुरू किया था। इस योजना के तहत बीमित फसलों का प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने पर बीमा कवर का प्रावधान किया गया है। केन्द्र की यह योजना देश के  किसानों के लिए सुरक्षा कवच के समान है। पीएम फसल बीमा योजना के तहत देश के कई राज्यों ने अपने-अपने स्तर पर योजनाएं चलाकर किसानों को फसल सुरक्षा दे रही हैं। आंध्र प्रदेश में डॉ. वाईएसाअर मुफ्त फसल बीमा योजना, बिहार में बिहार राज्य फसल सहायता योजना, गुजरात में मुख्यमंत्री सहायता योजना, झारखंड में झारखंड फसल राहत योजना, पश्चिम बंगाल में बांग्ला शश्य बीमा योजना, मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम से चलाकर किसानों को फसल क्षतिपूर्ति के रूप मे आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इसी क्रम में झारखण्ड सरकार ने फसल राहत योजना को शुरू किया गया हैं। दरअसल झारखंड में कम बारिश के कारण खरीफ फसलों को काफी नुकसान हुआ है। इसे देखते हुए राज्य सरकार किसानों को फसल राहत योजना की सुविधा दे रही है। क्योंकि झारखंड में कम बारिश के कारण खरीफ फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है और राज्य में खरीफ फसलों की बुवाई पर भी असर पड़ा है। इसे देखते हुए किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा। झारखंड कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने राज्य के सभी जिलों के अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक यह फैसला लिया है, तो आइए ट्रैक्टर गुरू की इस पोस्ट के माध्यम से फसल राहत योजना को लेकर लिये गए फैसले से संबंधित सभी जानकारियों को जानते हैं। सभी जानकारी के लिए इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़े।

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इस साल राज्य में अब तक 58 फीसदी बारिश

कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने राज्य के सभी जिलों के अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में फैसला लेते हुए कहा कि इस साल राज्य में अब तक 58 फीसदी बारिश हुई है। इससे किसान खेतों में अभी तक धान की बुवाई नहीं कर पाए हैं। धान की बुवाई का उचित समय 15 जून से 15 जुलाई तक माना गया है। राज्य में अब धान की बुवाई का समय भी पार हो गया है। राज्य में जिन किसानों ने खरीफ फसलों की बुवाई पहले कर ली है उन किसानों को फसल सिंचाई में भी परेशानी हो रही है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी के बाद किसानों ने बिचड़ा तैयार किया था वो भी सूख रहे हैं इससे किसानों को नुकसान हुआ है। राज्य में इस साल 10 फीसदी से भी कम बारिश हुई है। कृषि मंत्री ने बताया कि खेतों में 65 फीसदी तक बिचड़ा डाला गया है। इसके कारण सभी उपायुक्तों को निर्देश दिया गया है वो वैकल्पिक फसल योजना तैयार रखें। राज्य के किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो इसके लिए राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। फसल राहत योजना के क्रियान्वयन के लिए सभी जिलों के उपायुक्तों, कृषि पदाधिकारियों को और सहकारी पदाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।

फसल राहत योजना झारखंड

कृषि क्षेत्र में सार्वजनिक धन और किसानों के कल्याण दोनों को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार द्वारा फसल राहत योजना को शुरू किया गया है। यह योजना मुख्य रूप से किसी भी प्राकृतिक आपदा और प्राकृतिक दुर्घटनाओं के कारण फसल क्षति की स्थिति में किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है।  झारखण्ड राज्य फसल राहत योजना बीमा योजना न होकर प्राकृतिक आपदा से फसल क्षति होने पर किसानों को प्रदान की जानेवाली एक क्षतिपूर्ति योजना है। यह योजना भू-स्वामी तथा भूमिहीन किसान, दोनों को सुरक्षा कवच प्रदान करती है। किसानों को इस योजना के तहत किसी भी प्रकार के फसल बीमा प्रीमियम भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होती तथा उन्हें सीधे तौर पर झारखण्ड सरकार द्वारा फसल क्षति की स्थिति में आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी।

योजना के प्रमुख प्रावधान

कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने समीक्षा बैठक में कहा कि यह योजना पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जगह सार्वजनिक धन को सुरक्षित रखने और किसानों के कल्याण को सुनिश्चित करने के शुरू किया गया है। राज्य में कम बारिश के कारण सुखा की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने फसल क्षति का आकलन कर किसानों को मुआवजा देगी। इसके तहत राज्य सरकार 30 से 50 प्रतिशत तक फसल की क्षति होने पर किसानों को प्रति एकड़ तीन हजार रुपये (अधिकतम 15 हजार रुपये) और 50 प्रतिशत से अधिक तक फसल की क्षति होने पर प्रति एकड़ चार हजार रुपये (अधिकतम 20 हजार रुपये) की सहायता राशि प्रदान करेगी। इस योजना के तहत फसल क्षतिपूर्ति के लिए अधिकत 5 एकड़ तक फसल क्षति सहायता राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से हुए फसल क्षति का आकलन एवं निर्धारण क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट द्वारा किया जाएगा।

डीबीटी के माध्यम से मिलेगा योजना का लाभ

कृषि पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री बादल पत्रलेख ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह जानकारी दी कि अनियमित मॉनसून, सुखाड की स्थिति में राज्य के किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो इसके लिए सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। सभी जिलों में फसल राहत योजना के क्रियान्वयन के लिए जिला उपायुक्तों, कृषि पदाधिकारियों को और सहकारी पदाधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। फसल राहत योजना के तहत किसानों को राज्य सरकार की तरफ से 20 हजार रुपए तक का सहयोग दिया जाएगा। यह सहायता राशि किसानों के खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से दी जायेगी। जिन किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ नहीं मिला है उन्हें कैंप लगाकर इस योजना का लाभ दिया जाएगा। इसकी पूरी मॉनिटरिंग रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव प्रतिनिधि करेंगे। 

प्रज्ञा केन्द्र पर 40 रूपये शुल्क देकर निबंधन कराने की सुविधा

उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत केवल प्राकृतिक आपदा से होने वाली फसल क्षति के मामले में किसानों को सुनिश्चित वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। इसमें सभी रैयत एवं बटाईदार किसानों को शामिल किया गया है। किसान ऑनलाइन निबंधन एवं आवेदन झारखंड फसल राहत योजना के वेब https://jrfry.jharkhand.gov.in/hi/  पोर्टल पर स्वयं कर सकते हैं। इसके अलावा किसान 20 हजार प्रज्ञा केंद्र पर 40 रुपये शुल्क देकर अपना निबंधन करा सकते हैं।

योजना का पंजीकरण व आवेदन करने के लिए किसानों को कोई प्रीमियम नहीं देना होगा। सभी जिलों के उपायुक्तों से कहा गया है कि वो एक सप्ताह के अंदर जिला समन्वय समिति की बैठक का आयोजन करें, साथ ही किसानों के बीच फसल राहत योजना के प्रचार प्रसार के जरिए किसानों को जागरूक किया जाए। इसके अलावा राज्य में सूखाड़ की स्थिति बनती है तो केंद्र से संपर्क किया जाएगा। साथ ही समय रहते वैकल्पिक तैयारी शुरू करने के लिए आपदा प्रबंधन से संपर्क किया जा रहा है। साथ ही किसान को कम अवधि वाले फसलों के बारे में जानकारी देने की योजना पर काम हो रहा है।

योजना के अंतर्गत आवेदन करने की पात्रता

कृषि पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री बादल पत्रलेख ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह जानकारी दी कि राज्य के सभी ऋणी, गैर ऋणी व बंटाईदार किसान इस योजना के तहत पात्र होगे। ऐसे सभी किसान कृषि कार्य करने से संबंधित वैध भूमि दस्तावेज/भूस्वामित्व प्रमाण पत्र अथवा राजस्व रसीद/राजस्व विभाग से निर्गत बंदोबस्ती/पट्टा बटाईदार किसानों द्वारा भूस्वामी से सहमति पत्र के साथ अपने नजदीक प्रज्ञा केंन्द्र या सीएसी केन्द्र पर निबंधन करा सकते हैं। इसके अतिरिक्ति किसान झारखंड फसल राहत योजना के वेब https://jrfry.jharkhand.gov.in/hi/  पोर्टल पर जाकर भी अपना आवेदन कर योजना का लाभ ले सकते हैं। आवेदक किसानों को अपना संख्या बायोमेट्रिक प्रणाली द्वारा प्रमाणित करना होगा।

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