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दलित बंधु योजना ने बदली ट्रैक्टर ड्राइवर की किस्मत, बना राइस मिल का मालिक

दलित बंधु योजना ने बदली ट्रैक्टर ड्राइवर की किस्मत, बना राइस मिल का मालिक
पोस्ट -26 अक्टूबर 2023 शेयर पोस्ट

दलित बंधु योजना की मदद से ट्रैक्टर ड्राइवर बना मोबाइल राइस मिल का मालिक, जानिए योजना की डिटेल

Dalit Bandhu Scheme : ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए किसानों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सरकार द्वारा वित्तीय सहायता समेत सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा है। सरकार की एक योजना ऐसी भी है जिसका लाभ उठाकर किसान ट्रैक्टर राइस मिल के मालिक बन सकते हैं। तेलंगाना में भी राज्य सरकार द्वारा दलित बंधु योजना का संचालन किया जा रहा है। जिसमें राज्य के अनुसूचित जाति के परिवारों को खाद्य सुरक्षा, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा वित्तीय सहायता दी जाती है। ऐसे में राज्य के राजन्ना सिरसिला जिले से एक सकारात्मक खबर निकलकर सामने आ रही है। राज्य सरकार की इस योजना का लाभ लेकर ट्रैक्टर ड्राइवर एक मोबाइल राइस मिल सह ट्रैक्टर का मालिक बन गया है। तेलंगाना राज्य सरकार की प्रमुख दलित बंधु योजना की बदौलत, चालक थंद्रला परशराम अब दूसरों पर निर्भर हुए बिना अपने दम पर परिवार की आजीविका चला रहे हैं। वेमुलावाड़ा ग्रामीण मंडल के फजुलनगर के मूल निवासी, परशराम ने 14 लाख रुपए की राशि खर्च करके दलित बंधु योजना के तहत मोबाइल राइस मिल खरीदी है। दलित बंधु योजना के माध्यम से पहली मोबाइल चावल मिल इकाई हाल ही में आईटी मंत्री केटी रामाराव ने उन्हें सौंपी है। आईए, इस पोस्ट की मदद से राज्य सरकार की प्रमुख दलित बंधु योजना और इसका लाभ लेकर राइस मिल का मालिक बने ट्रैक्टर चालक थंद्रला परशराम के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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ट्रैक्टर ड्राइवर का काम करते हैं परशराम

तेलंगाना के राजन्ना सिरसिला जिले के वेमुलावाड़ा ग्रामीण मंडल के फजुलनगर के मूल निवासी, थंद्रला परशराम ने कक्षा 7 की पढ़ाई करने के बाद स्कूल छोड़ दिया था और अपने परिवार की आजीविका चलाने के लिए दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करना शुरू कर दिया था। क्योंकि जब परशराम बहुत छोटे थे तब उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। इस बीच उन्होंने ट्रैक्टर चलाना सीखा और साल 2012 से ट्रैक्टर चालक के रूप में काम करना शुरू कर दिया। हालांकि, राज्य सरकार की प्रमुख दलित बंधु योजना (Dalit Bandhu Scheme) की मदद से अब ट्रैक्टर ड्राइवर थंद्रला परशराम मोबाइल चावल मिल के मालिक बन गए हैं और वे अब दूसरों पर निर्भर नहीं हैं।

दलित बंधु योजना की मदद से खरीदी मोबाइल राइस मिल

परशराम ट्रैक्टर ड्राइवर के रूप में काम करने के अलावा धान काटने की मशीन पर भी काम करते थे।  उस अनुभव के साथ, उन्होंने गांव के सरपंच नगुला वेणुगोपाल और पूर्व एमपीटीसी गद्दाम हनुमान्दुलू के मदद से एक मोबाइल राइस मिल (Mobile Rice Mill) इकाई के लिए आवेदन किया। क्योंकि दलित बंधु के तहत स्वीकृत 10 लाख रुपए इकाई के लिए पर्याप्त नहीं थे। इसलिए उन्होंने अतिरिक्त सहायता  के लिए जिला कलेक्टर (District Collector) अनुराग जयंती से संपर्क किया।  कलेक्टर ने परशराम के अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया करते हुए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 2.50 लाख रुपए लोन दिलवाने की पहल की। शेष 1.50 लाख रुपए की राशि जुटाकर परशराम ने मोबाइल राइस मिल यूनिट खरीद ली। 

धान की मिलिंग से एक दिन में होगा 1300 रुपए का लाभ

परशराम ने राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, मंत्री रामा राव और स्थानीय विधायक चौधरी रमेश बाबू को धन्यवाद देते हुए कहा कि चालू वनकलम (खरीफ) सीज़न से धान की मिलिंग शुरू करेंगे। उन्होंने बताया कि वे मोबाइल चावल मिल यूनिट की मदद से प्रति घंटे 6 क्विंटल धान की मिलिंग कर सकते हैं। क्योंकि अन्य ऑपरेटरों द्वारा एक क्विंटल चावल की मिलिंग के लिए 300 रुपए लिए जा रहे हैं। इसलिए वो इससे 1,800 रुपए हर दिन कमा सकते हैं, जिसमें प्रति घंटे छह क्विंटल चावल की मिलिंग पर डीजल के 500 रुपए खर्च शुल्क छोड़कर उन्हें एक दिन में 1300 रुपए का लाभ होगा। उन्होंने बताया कि वो ऑफ सीजन में ट्रैक्टर की मदद से गैर-कृषि कार्य करके परिवार चलाने के लिए अतिरिक्त पैसा भी कमा सकेंगे। 

परिवार चलाने के लिए किया कठोर संघर्ष

परशराम ट्रैक्टर चालक के रूप में काम करते हुए लगभग 10 हजार रुपए प्रति माह कमाते थे, जिससे उन्हें अपने परिवार को चलाने के लिए गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। उनकी पत्नी स्वरूपा ने परिवार में योगदान देने के लिए बीड़ी बनाने के अलावा खेत-मजदूर के रूप में भी काम किया। उन्होंने कहा, अब उन्हें मोबाइल राइस मिल -सह-ट्रैक्टर इकाई की खरीद से राहत और खुशी दोनों मिली है। 

तेलंगाना राज्य सरकार की क्रांतिकारी पहल

तेलंगाना सरकार ने एक क्रांतिकारी पहल करते हुए राज्य में “तेलंगाना दलित बंधु” योजना की शुरूआत की है। इस योजना का उद्देश्य समाज के सबसे निचले पायदान पर सबसे दलित, दबे-कुचले वर्ग के लोगों को खाद्य सुरक्षा, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। इस योजना के अतंर्गत राज्य सरकार अनुसूचित जाति के परिवारों को उनकी पसंद के अनुसार (बैंक ऋण लिंकेज के बिना) उपयुक्त आय सृजन योजनाएं स्थापित करने के लिए शत-प्रतिशत (100%) अनुदान/सब्सिडी के रूप में प्रति अनुसूचित जाति परिवार 10 लाख रुपए की एकमुश्त राशि सहायता दी जाती है। जानकारी के लिए बता दें कि तेलंगाना में सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव सरकार ने इस क्रांतिकारी दलित बंधु योजना की शुरूआत वर्ष 2021 में की थी।

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