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खेतों में पराली जलाने पर नहीं मिलेगा पीएम किसान योजना का लाभ

खेतों में पराली जलाने पर नहीं मिलेगा पीएम किसान योजना का लाभ
पोस्ट -02 अप्रैल 2023 शेयर पोस्ट

सरकार द्वारा खेत में फसल अवशेषों को जलाने पर होगी सख्त कार्यवाही

देश में ज्यादातर क्षेत्रों में रबी सीजन की फसलों की कटाई चल रही है। किसान अपनी रबी की प्रमुख फसलों गेहूं, मक्का, सरसों, चना सरसों की कटाई में जुटे हुए हैं। फसलों की कटाई करके किसान फसलों के बचे हुए अवशेषों को खेतों से हटाने के लिए किसान खेत में आग लगा देते हैं। इससे खेत की मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम होने लगती है और साथ ही पर्यावरण में प्रदूषण की मात्रा बढ़ जाती है। इसीलिए केंद्र व राज्य सरकार ने पराली जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है। फसल अवशेष का प्रबंधन करने के लिए सरकार किसानों को आर्थिक मदद भी प्रदान करती है। लेकिन इन सब के बावजूद पराली जलाने के मामले में कमी नहीं हो रही है। इसी कड़ी में बिहार की नीतीश सरकार ने राज्य के फसल अवशेष जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त हो गई है। सरकार ने किसानों से किसी भी हाल में खेतों में पराली ना जलाने का आदेश जारी किया है। सरकार के इस आदेश का पालन ना करने वाले किसानों को सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही आने वाले 3 साल तक पराली जलाने वाले किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लिए रजिस्टर करने में भी असमर्थ रहेंगे। इसके अलावा पराली जलाने पर किसानों के ऊपर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। किसान भाइयों आज हम ट्रैक्टर गुरु की इस पोस्ट के माध्यम से हम आपके साथ पराली प्रबंधन से जुड़ी सभी जानकारियां आपके साथ साझा करेंगे।

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खेत में पराली जलाने वाले किसानों को नहीं मिलेगी पीएम किसान निधि

बिहार की सरकार ने राज्य में फसल अवशेष प्रंबंधन को लेकर नया आदेश जारी किया है। सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए एक नया आदेश जारी किया है। बिहार  सरकार के कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल bihar.gov.in पर मौजूद जानकारी के अनुसार, फसल अवशेष कचरा नहीं, बल्कि विशेष है। इसे कचरे को जलाना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। खेत में फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति घटने लगती है और वातावरण भी प्रदूषित हो जाता है, जिससे हमारे पर्यावरण को नुकसान होता है।
यदि बिहार राज्य का कोई भी किसान खेत में पराली जलाता पाया जाता है तो किसान का पंजीकरण 3 साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा। इसके बाद किसान के खाते में किसी भी सरकारी सब्सिडी योजना का पैसा ट्रांसफर नहीं होगा और किसान तमाम सरकारी योजनाओं को लाभ लेने से भी वंचित रह जाएंगे।

पराली प्रबंधन करने के लिए उपाय

देश के किसानों के सामने फसलों की कटाई करने के बाद सबसे बड़ी समस्या आती है कि अपनी फसलों के अवशेष का प्रबंधन कैसे करें। इसीलिए सरकार व कृषि विशेषज्ञों की ओर से पराली का महत्व भी समझाया जाता है। जिस पराली को आज किसान कचरा समझकर जला देते हैं। वही पराली किसानों के लिए आय का माध्यम बन सकती है। साथ ही पराली खेतों के कम हो रही उपजाऊ शक्ति को लौटाने में भी मुख्य भूमिका निभाती है।
 
साथ ही पूसा डीकंपोजर कैप्सूल्स की मदद से पराली को गलाकर खेतों के लिए खाद बनाई जा सकती है। इसके साथ ही आज मौजूद तमाम कृषि यंत्रों की मदद से पराली को मिट्टी में भी मिला सकते हैं। इसके साथ ही बागवानी फसलों की खेती करने वाले किसान पराली को मल्च के रुप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। जिससे पानी की बचत होगी ही, साथ में खरपतवार होने की संभावना भी कम हो जाएगी।

पराली के प्रबंधन में बिहार सरकार करेगी मदद

देश में कई राज्य सरकारें पशुओं के चारे का संकट दूर करने के लिए भी किसानों से पराली की खरीदारी कर रही हैं। बिहार राज्य सरकार द्वार जारी अध्यादेश के मुताबिक, यदि फसल अवशेषों के प्रबंधन में किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत आ रही है तो अपने जिले के कृषि अधिकारी या प्रखंड कृषि पदाधिकारी या जिला कृषि पदाधिकारी से संपर्क करके उचित समाधान प्राप्त कर सकते हैं।

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