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जामुन की खेती पर 50 प्रतिशत सब्सिडी, 30 हजार रुपए पाने के लिए यहां करें आवेदन

जामुन की खेती पर 50 प्रतिशत सब्सिडी, 30 हजार रुपए पाने के लिए यहां करें आवेदन
पोस्ट - September 08, 2022 शेयर पोस्ट

ड्राई हॉर्टिकल्चर योजना के तहत जामुन की खेती पर सरकार देगी प्रोत्साहन, यहां जानें पूरी जानकारी 

यह तो हम सभी जानते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 14 फीसदी से ज्यादा है। देश में लगभग 48 फीसदी परिवार खेती कर अपना जीवन यापन करते हैं। भारत सरकार कृषि क्षेत्र में चहुंमुखी विकास के लिए विभिन्न प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं का संचालन कर रही है। इन योजनाओं के अंतर्गत केन्द्र और राज्य सरकारें किसानों की आय को दोगुना करने का हर मुमकिन प्रयास कर रही है। कृषि क्षेत्र में चहुंमुखी विकास, अन्न एवं कृषि उत्पादों के भंडारों के साथ-साथ किसान की जेब भरने व उनकी आय में भी वृद्धि हो, इसके लिए भारत सरकार ने बागवानी फसलों पर ध्यान केंद्रित कर राष्ट्रीय बागवानी मिशन को शुरू किया था। देशभर में बीते कुछ दशकों के अंदर बागवानी फसलों यानी फल-सब्जियों की खेती पर किसानों का रूझान बढ़ने लगा है। भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत बागवानी फसलों की खेती पर किसानों को सब्सिडी भी दी जाती है। यह कारण है कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में धान, गेहूं, गन्ने जैसी पारंपरिक फसलों की खेती के अलावा किसान मुनाफेदार बागवानी फसलों की खेती की ओर अपना रूख कर रहे हैं। वर्तमान समय में किसान बागवानी फसलों की खेती से जमकर पैसा कमा रहे हैं। 

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इसी कड़ी में बिहार बागवानी विभान राष्ट्रीय बागवानी मिशन और मुख्यमंत्री बागवानी मिशन योजनाओं के अंतर्गत ड्राई हॉर्टिकल्चर योजना का संचालन कर रही है। इसके तहत बिहार सरकार राज्य में कृषि और बागवानी क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए बागवानी फसलों की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहन दे रही है। बिहार बागवानी विभाग द्वारा किसानों को विभिन्न फल और सब्जियों की खेती के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। इन फलों में जामुन भी शामिल है, जिसका उत्पादन बढ़ाने के लिये राज्य के किसानों को जामुन की इकाई लागत पर 50 प्रतिशत प्रति हेक्टेयर की दर से सब्सिडी दी जा रही है। तो आइए ट्रैक्टरगुरू के इस लेख के माध्यम से बिहार सरकार द्वारा जामुन की खेती पर दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि और इस राशि का लाभ किस प्रकार किसान को मिलेगा से संबंधित जानकारी के बारे में जानते हैं। 

जामुन की खेती पर किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी

भारत में बागवानी फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए एकीकृत बागवानी विकास मिशन चलाया जा रहा है। इसके तहत बिहार राज्य में सूक्ष्म सिंचाई आधारित शुष्क बागवानी योजना के अंतर्गत जिले के शुष्क जमीन को उपजाऊ बनाकर एक साथ दो फसलों की खेती करने की कवायद शुरू कर दी गई है। योजना के तहत फलों के साथ हाइब्रिड सब्जियों की खेती की जा रही है। फल के पौधा एवं सब्जियों के पौधा के लिए किसानों को अलग-अलग अनुदान दिया जा रहा है। इस योजना के तहत बिहार कृषि विभाग, उद्यान निदेशालय की तरफ से किसानों को जामुन की खेती पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। नियमों के मुताबिक, एक हेक्टेयर पर जामुन की खेती लागत 60,000 रुपए प्रति इकाई निर्धारित की गई है, जिस पर किसानों को 50 फीसदी यानी 30,000 रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। 

किसानों को ऐसे मिलेगा लाभ

राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत बिहार सरकार ड्राई हॉर्टिकल्चर योजना तहत जामुन के बाग लगाने पर सब्सिडी के तौर पर आर्थिक मदद दे रही है। एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत जामुन की खेती पर सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए आपको बिहार बागवानी विभान की आधिकारिक वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन देना होगा। इसके अलावा जामुन की खेती के लिए आर्थिक अनुदान योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिये जिले के नजदीकी उद्यान विभाग के कार्यलय या सहायक निदेशक से भी संपर्क कर सकते हैं। 

जामुन की खेती होने वाली कमाई

बिहार बागवानी विभाग के अनुसार एक हेक्टेयर में जामुन के 250 पौधे लगा सकते हैं। जामुन के पेड़ 4 से 5 वर्ष के बाद फल देना आरंभ कर देते है, लेकिन करीब 8 वर्ष बाद पूर्ण रुप से तैयार होने बाद जामुन के एक पेड़ से करीब 80 से 90 किलो तक उपज प्राप्त हो जाती है। एक हेक्टेयर पर इनका कुल उपल उत्पादन करीब 22-25 हजार किलो तक प्राप्त हो जाता हैं। जामुन का बाजार भाव करीब 100-120 रुपए किलो के आसपास होता है। इस लिहाज से जामुन के एक हेक्टेयर के बाग से करीब 20 लाख तक की कमाई कर सकते हैं। 

जामुन की खेती पर सब्सिडी के नियम, दिशा-निर्देश

बिहार बागवानी विभाग की योजनाओं के अनुसार जामुन की खेती करने वाले किसानों को एक निर्धारित लागत की 50 फीसदी राशि सब्सिडी के तौर पर दी जाएगी। योजना का कार्यान्वयन किसान अपने खेत के मेड़ पर भी करवा सकते हैं। जामुन की खेती पर सब्सिडी का लाभ उन किसानों को देय होगा, जो अनिवार्य रूप से ड्रिप सिंचाई संस्थापित किए हों अथवा जिनके द्वारा ड्रिप सिंचाई का संस्थापन का कार्य कराया जा रहा हो। जामुन के लिए 60 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तीन वार्षिक किस्तों में लागत और रोपण सामग्री के मद में होने वाले व्यय को पूरा करने के लिए अधिकतम 30 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर अथवा लागत का 50 प्रतिशत अनुदान के रूप में किसानों को दी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत किसान अधिकतम 4 हेक्टेयर तथा न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर में जामुन के पौधे लगाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। 

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