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वैकल्पिक खेती योजना : 5 लाख किसानों को मिलेगा 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ

वैकल्पिक खेती योजना : 5 लाख किसानों को मिलेगा 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ
पोस्ट - August 27, 2022 शेयर पोस्ट

धान के स्थान पर वैकल्पिक खेती करने पर मिलेगा अनुदान, योजना की पूरी जानकारी

झारखंड सरकार ने राज्य में धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने का फैसला लिया है। इसके लिए झारखंड कृषि विभाग ने वैकल्पिक फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए पूरे राज्य में वैकल्पिक खेती योजना चलाई है। इस योजना के तहत वैकल्पिक फसलों की खेती करने वाले किसानों को आर्थिक मदद दी जाएगी। राज्‍य में किसानों को दलहनी, तिलहनी एवं सब्जियों की फसल उगाने पर 50 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। राज्य सरकार फसल विविधीकरण पर इसलिए फोकस कर रही है ताकि किसान परंपरागत खेती को छोड़ दूसरी फसलों को उगाएं, जिससे पानी कम लगे और किसानों की इनकम बढ़ें। 

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दरअसल इस वर्ष मानसूनी बारिश के असामान्य रहने से कुछ इलाकों में बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई, तो कुछ राज्यों में बारिश के ठीक से न होने के कारण सूखा जैसी स्थिति पैदा हो गई। इसी कड़ी में कम बारिश के कारण झारखंड में भी सूखा जैसी गंभीर समस्या उत्पन्न हुई है। जिससे यहां धान सहित अन्य खरीफ सीजन फसलों की बुवाई में असमान्ता देखने को मिली है। राज्य के कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण धान सहित अन्य फसलों की बुवाई नहीं हो पाई और  ज्यादातर किसानों के खेत खाली ही रह गये। इन सब परेशानियों को देखते हुए झारखंड कृषि विभाग ने किसानों को वैकल्पिक फसलों की खेती करने की सलाह दी है, जिसमें किसान अपने खाली पड़े खेत में अन्य दूसरी फसल को लगाएं, ताकि वह मुनाफा प्राप्त कर सकें। तो चलिए ट्रैक्टरगुरू के इस लेख के माध्यम से वैकल्पिक खेती योजना के बारे में जानते हैं। इस वैकल्पिक खेती से किसानों को किस प्रकार मुनाफा मिल सकता है और वैकल्पिक खेती पर सब्सिडी का लाभ किस प्रकार किसान प्राप्त कर सकते हैं यह सब जानकारी इस लेख में आपको दी जा रही है। 

झारखंड कृषि विभाग की तरफ से लगातार प्रयास जारी

झारखंड में इस बार बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों की खेती पर इसका खासा असर पड़ा है। राज्य में सामान्य से 50 फीसदी कम बारिश हुई है। कम बारिश के चलते धान की खेती सबसे अधिक प्रभावित हुई है। राज्य में कृषि योग्य भूमि 27 लाख हेक्टेयर है पर अभी तक मात्र 6.50 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की खेती हो पाई है। राज्य में कृषि के लिए निर्धारित लक्ष्य का मात्र 33 फीसदी ही हासिल किया जा सका। इसे लेकर राज्य सरकार और किसान दोनों काफी चिंतित है। किसानों को इस परेशानी से निकालने के लिए राज्य सरकार और कृषि विभाग की तरफ से भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और किसानों के लिए योजनाएं तैयार कर रहा है।

बीजों की खरीद पर आर्थिक सहायता दी जाएंगी

कृषि विभाग झारखंड के कृषि अधिकारियों का कहना है कि राज्य में सुखाड की स्थिति में वैकल्पिक खेती की योजना से किसानों को प्रेरित किया जाएगा। पानी की कमी के कारण एवं रोपनी के अभाववश खेती नहीं हो सकी है। इस तरह खेतों में वैकल्पिक योजना बनाकर सितम्बर में बोए जाने वाले अरहर, उड़द, कुलथी, मक्का, तोरियों, मूंग, ज्वार और मडुआ की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को अनुदान भी दिया जाएगा। जिसकी मदद से कम बारिश या सूखा ग्रस्त इलाकों में भी खेती करके किसान आर्थिक संकट से निकल पाएंगे। इस योजना से राज्य के 5 लाख किसानों को जोड़ा जायेगा। 

50 प्रतिशत तक अनुदान सुविधा उपलब्ध होगी

किसानों को राहत प्रदान करने के लिये झारखंड कृषि विभाग ने वैकल्पिक खेती का उपाय निकाला है। इसके तहत किसानों को धान की जगह दूसरी फसलों की खेती के लिये प्रेरित किया जा रहा है। किसानों को दलहनी, तिलहनी एवं सब्जियों की खेती करने के लिये बीजों की खरीद पर आर्थिक सहायता दी जायेगी। सरकार की इस योजना में शामिल होने के बाद किसानों को सूखा रोधी कम अवधि वाले उड़द प्रभेद पूसा-31 बीजों को 50 प्रतिशत तक अनुदान की सुविधा उपलब्ध होगी। किसान अपनी इच्छा के अनुसार, इन बीजों को तोरपा महिला कृषि बागवानी स्वालंबी सहकारी समिति लिमिटेड कंपनी से संपर्क कर 64 रुपए प्रति किलो के हिसाब से भी खरीद सकते हैं। 

अरहर के उन्नत प्रभेद पूसा-9 सितम्बर में अरहर खेती के लिए 6 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से खेत में बोआई की जा सकती है। तोरियों की प्रजाति भवानी, पंचाली एवं पीटी 303 किसान खेतों में अगले माह सितम्बर में बोआई कर सकते है। इस कार्य के लिए प्रति एकड़ 2 किलोग्राम बीज की आवश्यकता पड़ती है। यह फसल 80 से 85 दिनों में पक कर तैयार हो जाता है। किसानों को सलाह देते हुए कहा कि पर्णीय छिड़काव द्वारा यूरिया का प्रयोग कर सकते है। इसके छिड़काव से उर्वरकों की उपयोग क्षमता बढ़ेगी। साथ ही उत्पादन भी ज्यादा होगी। 

इन जरूरी दस्तावेजों की होगी आवश्यकता 

  • किसान का स्थाई प्रमाण पत्र

  • आधार कार्ड

  • आय प्रमाण पत्र

  • आधार से लिंक मोबाइल नंबर

  • बैंक खाते का विवरण या बैंक पासबुक की कॉपी

  • पासपोर्ट साइज फोटो

कैसे करें आवेदन 

वैकल्पिक खेती योजना से जुड़ने के लिए किसानों को सबसे पहले तोरपा महिला कृषि बागवानी स्वालम्बी सहकारी समिति लिमिटेड के सीईओ से संपर्क करके ब्लॉक चैन प्रणाली में अपना पंजीकरण करवाना होगा। अधिक जानकारी के लिये अपने नजदीकी जिले के राज्य कृषि विभाग के कार्यलय में संपर्क करके अधिक जानकारी ले सकते हैं। 

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