देश में इस साल मानसून का रुख कुछ साफ नहीं रहा। देश के कई राज्यों में अधिक बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई, तो कुछ राज्यों में सामान्य से भी नीचे बारिश देखने को मिली है। इसी दौरान जलवायु परिवर्तन की गंभीर समस्या से राजस्थान के किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। दरअसल राज्य में कम बारिश और पिछले कुछ दशकों से भूमिगत जल के लगातार दोहन के कारण जल स्तर नीचे चला गया है, जिसके चलते खेती के लिए पर्याप्त जल नहीं मिल रहा है। लगातार गिरते भूजल स्तर से सरकार एवं किसान दोनों ही चिंतित है। राज्य में इन दिनों सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की वजह से किसानों को इस साल खेती में काफी नुकसान हो रहा है। इन सभी पेरशानियों को देखते हुए राजस्थान सरकार ने किसानों को खेती की पद्धति में बदलाव करने की पहल पर जोर दिया है। फसलों की सिंचाई को लेकर नए-नए विकल्प भी तलाशे जा रहे हैं। जिससे कृषि के क्षेत्र में भूमिगत जल का दोहन कम हो और कम पानी से अधिक उत्पादन प्राप्त कर सके और पानी की एक-एक बूंद का सही इस्तेमाल हो सके। इसके लिए राजस्थान उद्यान विभाग द्वारा ड्रिप, मिनी फव्वारा एवं फव्वारा सिंचाई तकनीकी को बढ़ावा दिया जा रहा है। राजस्थान सरकार सूक्ष्म सिंचाई संयंत्र स्थापित करने पर लघु /सीमांत/महिला /एसटी /एससी कृषकों 75 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध करवा रही है। वहीं, अन्य किसानों को 70 प्रतिशत तक अनुदान देय है। ट्रैक्टर गुरू के इस लेख में सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रों पर सब्सिडी संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही हैं। इच्छुक किसान इस योजना में आवेदन करके इन सिंचाई उपकरणों की खरीद पर सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं।
राजस्थान में पानी की कमी हमेशा रहती है जिसके कारण भारी जल संकट बना रहता है। इसलिए सरकार सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रों के उपयोग एवं इन संयंत्रों को बढ़ावा देने के लिए योजना के तहत अच्छी खासी अनुदान दे रही है। राजस्थान कृषि विभाग एवं कृषि उद्यान विभाग द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई यंत्रों पर अलग-अलग वर्ग के किसानों को तय प्रतिशत के हिसाब से अनुदान का लाभ प्रदान किया जा रहा है। इस योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई (माइक्रो इरिगेशन) संयंत्रों पर लघु एवं सीमान्त कृषकों के साथ-साथ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला किसानों को 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, तो वहीं अन्य वर्ग के सभी किसानों को सूक्ष्म सिंचाई (माइक्रो इरिगेशन) संयंत्रों पर कुल लागत का 70 प्रतिशत सब्सिडी के रूप में दिया जा रहा है।
उद्यान पदाधिकारी के अनुसार सिंचाई के लिए आज भी लोग पारंपरिक स्रोत पर ही निर्भर हैं। सिंचाई में जल के दोहन को कम करने और जल स्तर में सुधार के साथ-साथ खेत में पानी के उपयोग की दक्षता में सुधार करने के प्रयास से राज्य उद्यान विभाग द्वारा किसानों को सूक्ष्म सिंचाई (माइक्रो इरिगेशन) ड्रिप, मिनी फव्वारा एवं फव्वारा सिंचाई संयंत्रों पर अनुदान दिया जा रहा है। ताकि अधिक से अधिक किसान इससे प्रेरित हो सके और कम पानी से अधिक क्षेत्रफल में सिंचाई कर सके।
ड्रिप, मिनी फव्वारा एवं फव्वारा सिंचाई तकनीकी अपनाने से पानी की जहां 60 प्रतिशत बचत होती है, वहीं उत्पादन में 50 प्रतिशत की वृद्धि भी होती है। पौधे की जड़ तक बेहतर ढंग से पानी पहुंचने के कारण इसमें खेती की लागत में भी 35 प्रतिशत की कमी आ जाती है। सूक्ष्म सिंचाई (माइक्रो इरिगेशन) संयंत्रों से जल की एक-एक बूंद को सिंचाई के काम में लिया जा सकता है। सिंचाई में जल के दोहन को कम करने और जल स्तर में सुधार के साथ-साथ खेत में पानी के उपयोग की दक्षता में सुधार होता है। साथ ही में उबड़-खाबड़ एवं ढलान वाली भूमि में भी आसानी से सिंचाई की जा सकती है। उर्वरकों पर आने वाली लागत में कमी आती है। खरपतवार कम उगते हैं जिससे फसल की उत्पादन लागत में कमी आती है और मुनाफा बंपर होता है। राजस्थान में जल स्तर बहुत कम है राज्य में सूक्ष्म सिंचाई (माइक्रो इरिगेशन) संयंत्रों से कम जल से अधिक से अधिक कृषि क्षेत्र को कवर करना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है।
ड्रिप, मिनी फव्वारा एवं फव्वारा सिंचाई तकनीक से जल की एक-एक बूंद को सिंचाई के काम में लिया जा सकता है। ड्रिप सिंचाई पद्धति से सामान्य अंतराल पर बोई गई फसल जैसे मसाले बगीचों एवं सब्जियों में इससे 70 प्रतिशत तक पानी की बचत के साथ उत्पादन में बढ़ोतरी होती है। मिनी फव्वारा (स्प्रिंकलर) पद्धति से गाजर, मूंगफली, गेहूं, लहसुन एवं प्याज जैसी फसलों में 10 x 10 या 8 x 8 मीटर पर इसे लगाकर 50 प्रतिशत तक पानी की बचत की जा सकती है। फव्वारा संयंत्र पद्धति के उपयोग से दलहन, चारा एवं खाद्यान्न फसलो में 35 प्रतिशत से 40 प्रतिशत तक पानी की बचत की जा सकती है।
इच्छुक कृषक के पास स्वयं की भूमि एवं जल स्रोत उपलब्ध है ऐसे कृषक इस योजना के पात्र है। ऐसे लाभार्थियों/संस्थाओं को भी योजना का लाभ अनुमन्य होगा जो संविदा खेती (कान्टै्क्ट फार्मिंग) अथवा न्यूनतम 07 वर्ष के लीज एग्रीमेन्ट की भूमि पर बागवानी/खेती करते हैं। यदि लाभार्थी के पास कुंआ है और उसका स्वामित्तव दो लोगों के पास है, तो वे भी इस योजना का उठा सकते है। जिन किसानों के पास स्वयं का जलस्त्रोत नहीं है, वे जिन किसानों के पास जलस्त्रोत है उसकी सहमति से पत्र पर साइन करा इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। लाभार्थी कृषक अनुदान के अतिरिक्त अवशेष धनराशि स्वयं के स्रोत से अथवा ऋण प्राप्त कर वहन करने के लिए सक्षम व सहमत हों। योजना का लाभ सहकारी समिति के सदस्यों, सेल्फ हेल्प ग्रुप, इनकार्पोरेटेड कम्पनीज, पंचायती राज संस्थाओं, गैर सहकारी संस्थाओं, ट्रस्ट्स, उत्पादक कृषकों के समूह के सदस्यों को भी मिलेगा। किसानों द्वारा उद्यान विभाग में पंजीकृत निर्माताओं के बीएसआई मार्क संयंत्र खरीने पर भी अनुदान देय है।
योजना के तहत ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सूक्ष्म सिंचाई यंत्रों पर सब्सिडी का लाभ प्राप्त करने के इच्छुक किसान आपने सभी आवश्यक दस्तावेज जैसे-आवेदक का आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, कृषि भूमि के कागज़ात, भामाशाह कार्ड, जमीन की जमा बंदी (खेत की नकल), मोबाइल नम्बर, निवास प्रमाण पत्र, बैंक अकाउंट पासबुक, बिजली कनेक्शन का प्रमाणपत्र जैसे बिल, शपथपत्र, संयंत्र का प्रिंटेड बिल आदि को लेकर ई-मित्र केन्द्र पर जाना होगा। ई-मित्र के माध्यम से राज किसान पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके अतिरिक्त राज किसान पोर्टल https://rajkisan.rajasthan.gov.in/ पर मोबाइल अथवा कंप्यूटर के माध्यम से घर बैठ अपना ऑनलाइन आवेदन आसानी से कर सकते हैं।
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