Stubble Burning: वैज्ञानिकों ने बताई पराली से खाद बनाने की 5 बेहतरीन तकनीकें

Stubble Burning: वैज्ञानिकों ने बताई पराली से खाद बनाने की 5 बेहतरीन तकनीकें
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आईएआरआई ने विकसित की पराली से जैविक खाद बनाने की विंड्रोम तकनीक, जानें पूरी जानकारी

जैविक खाद : किसान रबी सीजन में गेहूं सहित अन्य प्रमुख फसलों की बुवाई करेंगे, जिसके लिए खेतों में खरीफ फसलों के अवशेष यानी पराली का निस्तारण किया जाएगा। कई प्रगतिशील किसानों द्वारा इसके लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियों का इस्तेमाल किया जाएगा, तो कई किसानों द्वारा खेतों में ही पराली को जलाया जा रहा है।  जिससे गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तो पैदा होती है। साथ ही भूमि में पाए जाने मित्र सूक्ष्म जीव भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उपजाऊ क्षमता प्रभावित होती है। हालांकि सरकार कृषि यंत्र सब्सिडी योजना के तहत किसानों को सब्सिडी पर सीआरएम मशीनरी उपलब्ध करा रही है, तो वहीं, कृषि वैज्ञानिकों द्वारा पराली से जैविक खाद और पशु चारा बनाने की तकनीकी जानकारी दी जा रही है, ताकि पराली को बिना जलाए उसका बेहतर और उन्नत तरीके से प्रबंधन किया जा सके। इस बीच भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) पूसा ने पराली (फसल अवशेष) से जैविक खाद बनाने की विंड्रोव तकनीक विकसित की है। इस तकनीक में पांच उन्नत विधियां बताई गई है। इनके माध्यम से किसान पराली को बिना जलाए इससे निजात पा सकते हैं और इससे जैविक खाद तैयार कर सकेंगे। ये विधियां कम लागत पर अधिक गुणवत्ता वाली जैविक खाद देंगी, जिससे किसान को बिना डीएपी, यूरिया या अन्य पोषक खादों के बेहतर फसल पैदावार मिलेगी। आइए, जानते हैं इन 5 विधियों के बारे में?

विंड्रोव तकनीक से तैयार करें उत्तम जैविक खाद (Prepare excellent organic fertilizer using windrow technique)

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) पूसा नई दिल्ली की बायोमास यूटिलाइजेशन यूनिट के कोऑर्डिनेटर और प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. शिवधर मिश्रा बताया कि विंड्रोव तकनीक सभी स्तरों पर बहुत उपयोगी साबित हो रही है। किसान इस तकनीक से बड़े पैमाने पर धान, सोयाबीन, लोबिया, मक्का, ज्वार, बाजरा के फसल अवशेषों सहित फल और सब्जियों के छिलके, बाग-बगीचों की पत्तियां और फूल एवं अन्य कृषि अवशेषों से जैविक खाद (organic fertilizer) तैयार कर सकते हैं। डॉ. शिवधर मिश्रा के मुताबिक, विंड्रोव तकनीक से कम्पोस्ट खाद तैयार करने के लिए सबसे पहले फसल के अवशेषों (पराली या अन्य कृषि अपशिष्ट) का ढेर बना लिया जाता है, जिसे ‘विंड्रोव’ कहां जाता है। इसके ढेर की ऊंचाई और चौड़ाई 2 से 2.5 मीटर रख सकते हैं और लंबाई उपलब्ध जगह के अनुसार 10 से 100 मीटर या उससे अधिक भी रखी जा सकती है। इन ढेरों में जैविक कल्चर (जैव-एंजाइम पूसा) का छिड़ाकाव कर उचित मात्रा में नमी रखकर समय-समय पर मशीन द्वारा पलटा जाता है। इस प्रकिया में पराली सहित सभी अपशिष्ट पदार्थ समान रूप से मिल जाते हैं। ढेरों में वायुसंचार हो जाता है। इस तरह 3 से 4 पलटाई के बाद 3 से 9 हफ़्तों में उत्तम जैविक खाद तैयार हो जाती है। 

फसल अवशेषों (पराली) से खाद बनाने की विधियां (Methods of making compost from crop residues)

प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. शिवधर मिश्रा के अनुसार, फसल अवशेषों यानी पराली से कंपोस्ट खाद बनाने की 5 विधियां है, जिसमें पहली विधि जैविक कल्चर है। इसमें पहले पराली के साथ कई अन्य फसल अवशेषों को मिलाकर ढेर बनाया जाता है। इसमें जैव-एंजाइम पूसा का छिड़काव करते है, जिससे यह ढेर धीरे-धीरे कंपोस्ट खाद का रूप में तब्दील होता है। 

फसल अवशेष और गोबर खाद मिश्रण विधि : इस विधि में गोबर के साथ पराली अवशेष को अलग-अलग अनुपात में मिलाकर खाद तैयार की जाती है। इसमें धान फसल के अवशेषों को श्रेडर मशीन से 8 से 10 सेंटीमीटर छोटा कर लिया जाता है। इसमें 80 फीसदी पराली अवशेष और 20 फीसदी ताजे गोबर का मिश्रण बनाया जाता है। फिर इसमें जैविक कल्चर मिलाया जाता है। इसके बाद 30 से 40 दिन के बाद इससे बढ़िया खाद तैयार होगी। 

रॉक फॉस्फेट से तैयार करें समृद्ध खाद : इस विधि में आप पराली और गोबर के ढेर में रॉक फॉस्फेट भी मिला सकते हैं, जिसमें फॉस्फोरस होता है। इसके प्रयोग से फॉस्फेट कंपोस्ट खाद तैयार किया जाता है। इस प्रकार से बनाई गई खाद को समृद्ध खाद कहते हैं। इसमें पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है।   

चौथी विधि में आप पराली के साथ पेड़-पौधों की पत्तियों और कटाई-छंटाई से प्राप्त छोटी-मोटी टहनियों से खाद तैयार कर सकते हैं। इस प्रकार की कंपोस्ट खाद नर्सरी और गमलों में लगे पौधो के लिए उपयुक्त होती है। अगर आप चाहे तो गोशाला से प्राप्त गोबर और बचे हुए चारे से कंपोस्ट खाद तैयार कर सकते हैं। 

लवणीय और क्षारीय भूमि के लिए प्रभावी (Effective for saline and alkaline soils)

पूसा की बायोमास यूटिलाइजेशन यूनिट के कोऑर्डिनेटर और प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. शिवधर मिश्रा के अनुसार विंड्रोव तकनीक से बड़े पैमाने पर पराली एवं अन्य फसलों के अवशेषों से कम समय में कंपोस्ट खाद तैयार की जा सकती है। विंड्रोव कम्पोस्टिंग बनाई गई कंपोस्ट खाद का उपयोग कर किसान भरपूर फसल पैदावार कर सकते हैं। यह खाद न केवल मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाती  है, बल्कि खेतों में लंबे समय तक नमी की उपलब्धता बनाए रखती है। विंड्रोव कम्पोस्टिंग खाद लवणीय और क्षारीय भूमि में भी प्रभावी ढंग से काम करती है, जबकि डीएपी खाद इस प्रकार की भूमि में असर नहीं करता। यह कम्पोस्ट संतुलित पोषक तत्वों से भरपूर होती है, जो मिट्टी में सूक्ष्म  जैविक मित्र कीट की संख्या बढ़ाती है, जिससे भूमि की भौतिक संरचना में सुधार होता है। 

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