वर्तमान परिदृश्य में किसान खेती की लागत को कम करते हुए उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसी क्रम में वे पारंपरिक कृषि तरीके को पीछे छोड़ते हुए आधुनिक कृषि तकनीकों और यंत्रों को अपनाने की दिशा में अग्रसर हो रहे हैं। ये आधुनिक उपकरण कृषि कार्यों को अधिक कुशल, तेज और सटीक बनाते हैं। इन दिनों खरीफ मौसम की प्रमुख फसल धान की बुवाई एवं रोपाई का कार्य देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति पर है। किसान अब परंपरागत रोपाई के स्थान पर आधुनिक तकनीकों की सहायता से रोपाई कर रहे हैं। विशेष रूप से, जापान और चीन में प्रचलित अत्याधुनिक धान रोपाई मशीन अब भारत में भी उपलब्ध है, जिससे किसान वैज्ञानिक तरीके से कम समय व श्रम में धान की रोपाई कर पा रहे हैं। यह मशीन न केवल एक घंटे में एक एकड़ खेत में धान की रोपाई करने में सक्षम है, बल्कि इसके उपयोग से श्रम और समय की भी बचत होती है। वहीं दूसरी ओर रोपाई की एकरूपता बनी रहती है, जिससे फसल का उत्पादन भी बढ़ता है।
खरीफ मौसम के दौरान पूरे देश में धान की खेती प्रमुखता से की जाती है। पहले किसान धान की रोपाई पारंपरिक कृषि "पद्धतियों" से करते थे, जिसमें श्रम, समय और मजदूरी लागत की अधिक आवश्यकता होती थी। खेती के लिए धान की नर्सरी तैयार करना और उसे हाथों से खेतों में रोपना एक लंबी और मेहनत भरी प्रक्रिया होती थी, जिससे फसल उत्पादन की लागत बढ़ जाती थी। ऐसे में धान की खेती लागत कम करने के साथ ही उत्पादकता बढ़ाने के लिए “पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन” का विकास किया गया है।
कृषि अभियांत्रिकी विभाग, जबलपुर के अनुसार, इस आधुनिक मशीन पैडी ट्रांसप्लांटर के आने से किसानों का काम आसान हो गया है। पहले एक एकड़ खेत में धान की रोपाई करने में किसानों को काफी समय लगता था, लेकिन अब इस मशीन के आगमन से यह कार्य बहुत तेज, सटीक और कम समय, लागत में कुशलता से किया जा सकता है। पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन न केवल समय की बचत करती है, बल्कि खेत में रोपाई की सटीकता और समानता भी सुनिश्चित करती है, जिससे फसल का विकास बेहतर होता है और उत्पादकता में वृद्धि होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस आधुनिक मशीन से रोपाई करने पर श्रम लागत में उल्लेखनीय कमी आती है, जिससे किसानों की कुल खेती लागत घटती है और उनके मुनाफे में वृद्धि होती है। पैडी ट्रांसप्लांटर धान की नर्सरी से तैयार पौधों को एक निश्चित दूरी और गहराई पर खेत में रोपती है। यह तकनीकी विशेषता पौधों की बेहतर ग्रोथ सुनिश्चित करती है, क्योंकि सभी पौधे समान रूप से स्थान और पोषण प्राप्त करते हैं। वहीं, जब धान की रोपाई मजदूरों द्वारा की जाती है, तो कई बार पौधे ठीक से जम नहीं पाते या उखड़ जाते हैं, जिससे खेत का कुछ हिस्सा खाली रह जाता है और पैदावार में गिरावट आती है। वहीं पैडी ट्रांसप्लांटर से की गई रोपाई में पौधों की जमावट सटीक और बेहतर ढंग से होती है, जिससे खेत का पूरा उपयोग हो पाता है और धान के उत्पादन में सुधार आता है।
केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कृषि यांत्रिकीकरण योजनाओं तथा निजी कंपनियों के सहयोग से यह मशीन अनुदानित दरों पर सुलभ कराई जा रही है, ताकि अधिक से अधिक किसान वैज्ञानिक एवं कुशल खेती की ओर तेजी से अग्रसर हो सकें। कृषि अभियांत्रिकी विभाग के अनुसार, प्रदेश शासन की ओर से कृषि क्षेत्र में यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनके तहत पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन पर 50 प्रतिशत तक का अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। योजना का लाभ लेने के लिए किसान अपने ब्लॉक या जिले के कृषि विभाग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, राज्य सरकारों द्वारा अलग-अलग कृषि यंत्र अनुदान योजना लागू कर पैडी ट्रांसप्लांटर पर अनुदान देने के लिए किसानों से आवेदन मांगे जाते हैं। किसान आवेदन कर अनुदानित दरों पर मशीन खरीद सकते हैं। योजना की विशेष जानकारी हेतु किसान अपने राज्य के कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या जिले के कृषि विभाग कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
भारत में पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन लगभग 6.5 लाख से 7.3 लाख रुपए तक की कीमत पर उपलब्ध है। यह कीमत अलग-अलग राज्य, कंपनी व मॉडल के अनुसार थोड़ी ऊपर–नीचे हो सकती है। राज्य सरकारें कृषि यंत्रीकरण योजनाओं के अंतर्गत पात्र किसानों को उचित अनुदान भी प्रदान कर रही हैं, जिससे वे इस मशीन को रियायती दरों पर खरीद सकें और धान की खेती को अधिक वैज्ञानिक, सटीक और लाभकारी बना सकें।
पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई के लिए किसानों को विशेष प्रकार की नर्सरी तैयार करनी होती है, जिसे मैट टाइप नर्सरी कहा जाता है। इस नर्सरी की तैयारी धान लगाने से लगभग 16 दिन पूर्व की जाती है। नर्सरी का आकार सामान्यतः 1 x 2 फीट का होता है, जो मशीन में आसानी से फिट होकर रोपाई कार्य को सरल बनाता है। जब नर्सरी 15 दिन या उससे अधिक की हो जाती है, तब उसे सावधानीपूर्वक उखाड़कर मशीन में व्यवस्थित रूप से रखा जाता है। इसके बाद मशीन द्वारा तैयार खेतों में एक समान गहराई और दूरी पर पौधों की रोपाई की जाती है। पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन की सहायता से मात्र 1 घंटे में एक एकड़ क्षेत्र में धान की रोपाई की जा सकती है। यह मशीन एक दिन में करीब आठ एकड़ खेत में धान की रोपाई करने में सक्षम है। पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन एक साथ चार लाइन (धान के पौधों की कतार) में धान की रोपाई करती है।
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