मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी अभियान को तेज करने के लिए सरकार लगातार सक्रिय नजर आ रही है। किसानों को समय पर उपज बेचने का मौका मिले और खरीदी केंद्रों पर किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार समीक्षा की जा रही है।
इसी क्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा में व्यवस्था का जायजा लेते हुए बड़ा ऐलान किया कि प्रदेश के हर पात्र किसान से गेहूं खरीदा जाएगा।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार गेहूं खरीदी प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। साथ ही पट्टे पर खेती करने वाले किसानों को भी राहत देने की घोषणा की गई है।
शुरुआती दिनों में कई किसानों को स्लॉट बुकिंग में दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। किसानों की शिकायत थी कि ऑनलाइन सिस्टम धीमा चल रहा है और स्लॉट समय पर नहीं मिल पा रहे थे। इस पर सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तकनीकी सुधार किए हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सिस्टम को तेज कर दिया गया है और अब अधिकांश किसानों के स्लॉट बुक हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया 23 मई तक जारी रहेगी, हालांकि उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में ही सभी पंजीकृत किसानों के स्लॉट तय हो जाएंगे।
इस फैसले से किसानों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है, क्योंकि स्लॉट मिलने के बाद वे तय समय पर खरीदी केंद्र पहुंचकर अपनी उपज बेच सकेंगे।
गेहूं खरीदी को लेकर सबसे अहम घोषणा लीज यानी पट्टे पर खेती करने वाले किसानों के लिए की गई है। कई किसान ऐसे हैं जो खुद की जमीन न होने पर किराए या पट्टे पर जमीन लेकर खेती करते हैं। ऐसे किसानों को अक्सर खरीदी प्रक्रिया में दस्तावेजी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब ऐसे किसानों की उपज भी खरीदी जाएगी। यदि जमीन मालिक द्वारा पुष्टि कर दी जाती है, तो पट्टे पर खेती करने वाले किसान भी गेहूं बेच सकेंगे। उन्होंने कहा कि सत्यापन से जुड़ी समस्याओं को भी दूर कर दिया गया है।
यदि किसी किसान को अब भी परेशानी आती है, तो जिला कलेक्ट्रेट में बनाए गए कंट्रोल रूम के माध्यम से उसकी शिकायत का तुरंत समाधान किया जाएगा।
खरीदी केंद्रों पर बारदाने की कमी को लेकर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। मंत्री के अनुसार, पर्याप्त मात्रा में बारदाने उपलब्ध हैं और लगातार आपूर्ति जारी है। जरूरत पड़ने पर पुराने बारदानों का उपयोग किया जा रहा है या उन्हें नए बारदानों से बदला जा रहा है।
इसके अलावा तौल कांटों की कमी को दूर करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। पहले जहां एक केंद्र पर प्रतिदिन 1000 क्विंटल तक खरीदी की सीमा थी, उसे बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दिया गया है। इससे खरीदी की गति बढ़ेगी और किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
सरकार जरूरत के अनुसार तौल कांटों की संख्या भी बढ़ा रही है, ताकि खरीदी केंद्रों पर भीड़ कम हो और प्रक्रिया सुचारू बनी रहे।
सरकार ने विदिशा और रायसेन जिलों के आंकड़े भी साझा किए हैं, जिससे खरीदी अभियान की प्रगति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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विवरण |
संख्या |
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पंजीकृत किसान |
87,913 |
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स्लॉट बुक |
72,027 |
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जिन किसानों से खरीदी हुई |
36,442 |
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कुल गेहूं खरीदी |
1,99,563 मीट्रिक टन |
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विवरण |
संख्या |
|
पंजीकृत किसान |
77,117 |
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स्लॉट बुक |
68,639 |
|
जिन किसानों से खरीदी हुई |
32,374 |
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कुल गेहूं खरीदी |
1,80,199 मीट्रिक टन |
सरकार का कहना है कि गेहूं खरीदी अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर दिलाना है। खरीदी प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाकर किसानों की परेशानी कम करने की कोशिश की जा रही है।
यदि व्यवस्था इसी गति से चलती रही, तो आने वाले दिनों में प्रदेश के बाकी जिलों में भी खरीदी अभियान और तेज हो सकता है। फिलहाल किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि स्लॉट बुकिंग आसान हुई है और पट्टे पर खेती करने वालों को भी अब खरीदी का लाभ मिलेगा।
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