किसान मानसून की पहली बारिश से पहले करें जुताई, होगी बंपर पैदावार

किसान मानसून की पहली बारिश से पहले करें जुताई, होगी बंपर पैदावार
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मानसून की पहली बारिश से पहले खेतों की गहरी जुताई करें, मिलेंगे कई फायदे

अभी मानसून के आगमन में थोड़ा समय बाकी है और भीषण गर्मी का दौर जारी है। ऐसे मौसम में किसान अपने खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीटों और रोगों को भी प्राकृतिक रूप से नियंत्रित कर सकते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसान मानसून की पहली बारिश से पहले खेतों में कुछ जरूरी उपाय कर लेते हैं, तो मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है, पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है और फसलों की बढ़वार भी काफी अच्छी देखने को मिलती है।

आइए जानते हैं खेती के ऐसे आसान और असरदार ‘मास्टर स्ट्रोक’ के बारे में, जो किसानों को एक साथ कई फायदे पहुंचा सकते हैं।

खेत की गहरी जुताई क्यों है जरूरी?

ICAR के कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार पारंपरिक जुताई और मिट्टी को अत्यधिक भुरभुरा बनाने वाले कृषि यंत्रों (जैसे रोटावेटर और रोटरी टिलर) के लगातार उपयोग से खेतों में 6 से 8 इंच की गहराई पर एक कठोर परत बन जाती है, जिसे “हार्डपैन” कहा जाता है। यह परत पौधों की जड़ों को नीचे तक फैलने से रोकती है, मिट्टी में पानी और हवा का संचार प्रभावित करती है और पोषक तत्वों की पहुंच भी सीमित कर देती है। ऐसी स्थिति में खेत की गहरी जुताई ही इस समस्या का आसान और प्रभावी समाधान है।

खेत की गहरी जुताई कब और कैसे करें?

इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि मानसून आने से 10 से 20 दिन पहले (मई के अंतिम सप्ताह से जून के पहले सप्ताह तक) अपने खेतों की गहरी जुताई एमबी प्लाऊ (MB Plow), सबसॉइलर (Subsoiler) और चिसेल प्लाऊ (Chisel Plow) जैसे कृषि यंत्रों से करें। हल्की मिट्टी वाली भूमि में लगभग 12-15 इंच, भारी और चिकनी मिट्टी में 15-18 इंच गहराई तक जुताई करना बेहतर रहता है। इससे मिट्टी की कठोर परत टूटती है, मिट्टी का प्राकृतिक शोधन होता है और उसकी गुणवत्ता में सुधार देखने को मिलता है। जुताई के दौरान ध्यान रखें कि मिट्टी न बहुत सूखी हो और न बहुत गीली। हल्की से मध्यम नमी वाली मिट्टी में जुताई सबसे अच्छी होती है, ट्रैक्टर पर लोड भी कम पड़ता है और कम ईंधन में बेहतर काम मिलता है।  

खेत की गहरी जुताई के फायदे? 

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून से पहले तेज धूप के दौरान खेतों की गहरी जुताई करना सबसे पहला और जरूरी कदम है। इस समय मिट्टी सूखी और खुली होती है। इस दौरान किए गए उपाय सीधे मिट्टी की गहराई तक असर करते हैं। 

जब किसान मिट्टी को गहराई से पलटते हुए जुताई करते हैं, तो:

  • मिट्टी के अंदर छिपे हानिकारक कीटों के अंडे, फंगस और बैक्टीरिया ऊपर सतह पर आ जाते हैं और तेज धूप के कारण नष्ट हो जाते हैं।
  • खरपतवार (Weeds) की जड़ें ऊपर आकर सूख जाती हैं, जिससे अगली फसल में घास-फूस की समस्या बहुत कम होती है। साथ ही मिट्‌टी जनित कीट व रोग का प्रभाव बहुत कम हो जाता है। 
  • मिट्टी की कठोर परत गहराई तक टूटने से मिट्‌टी ढीली हो जाती है, जिससे पौधों की जड़े गहराई तक फैल पाती है और ज्यादा मजबूती, रोग–प्रतिरोधी से बढ़वार करते हैं।  
  • अध्ययनों में पाया गया है कि गहरी जुताई से बारिश का पानी जमीन के अंदर तक आसानी से समा जाता है। इससे सिंचाई की जरूरत लगभग 20-25 फीसदी तक कम हो जाती है। 
  • राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और विदर्भ जैसे सख्त मिट्‌टी वाले राज्यों के किसानों के लिए यह उपाय खासतौर पर फायदेमंद साबित होता है। 

मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ाने के लिए अपनाएं ये उपाय

गोबर और वर्मी कम्पोस्ट: मिट्टी को बनाएं उपजाऊ और स्वस्थ

गहरी जुताई के बाद खेत में सड़ी हुई गोबर की खाद (FYM) या वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) जरूरी दें। ये  इस सीजन का सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक है। इससे बारिश की बूंदें पड़ने से पहले जब यह जैविक खाद मिट्टी में मिल जाती है, तो यह मिट्टी की जल धारण क्षमता को बढ़ा देती है। इससे मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है और पौधों की जड़ों को जरूरी कवक (जैसे- माइकोराइजा) और मित्र बैक्टीरिया मिलते हैं।

हरी खाद (Green Manure): खेतों के लिए प्राकृतिक नाइट्रोजन बूस्टर

यदि आपके पास मानसून से पहले थोड़ा अधिक समय है, तो खेत में ढैंचा (Dhaincha), सनई या ग्वार की बुवाई कर दें। यह खेतों में प्राकृतिक नाइट्रोजन बूस्टर का काम करता है।

  • जब यह फसलें लगभग 40 से 45 दिन की हो जाएं (फूल आने से ठीक पहले), तो इन्हें रोटावेटर की मदद से जुताई करके मिट्टी में ही पलट दें। बारिश के पानी के साथ मिलकर यह हरी खाद खेत में सड़ जाती है और मिट्टी को प्रचुर मात्रा में ऑर्गेनिक कार्बन और नाइट्रोजन देती है। इससे आपकी अगली फसल में यूरिया का खर्च लगभग 30 से 40 फीसदी तक कम हो सकता है।

मेड़बंदी (Bunds Management): खेत का पानी और मिट्टी बचाएं 

मानसून की तेज बारिश का पानी अपने साथ खेत की सबसे ऊपरी और उपजाऊ मिट्टी (Topsoil) को बहाकर ले जाती है। इसे रोकने के लिए बारिश से पहले अपने खेतों की मजबूत मेड़बंदी जरूर करें।

  • फायदा: मजबूत मेड़बंदी होने से न तो आपके खेत की उपजाऊ मिट्टी बहकर बाहर जाएगी और न ही आपके द्वारा डाली गई महंगी खाद पानी के साथ बहेगी। खेत का पानी खेत में ही रुककर भू–जल लेवल को भी सुधारेगा। खेत की नमी बनाए रखने और उर्वरा शक्ति बचाने में मजबूत मेड़बंदी एक आसान और बेहतर उपाय है। 

निष्कर्ष : 

खेती में लागत कम करना और मुनाफा बढ़ाना हर किसान के लिए सबसे समझदारी भरा कदम है। मानसून पूर्व  की गई थोड़ी-सी मेहनत और छोटा निवेश आपकी मिट्टी को इतना उपजाऊ बना सकता है कि इसका फायदा अगली 2–3 फसलों तक मिलता रहेगा। धान, मक्का, बाजरा, कपास और सब्जियों जैसी आने वाली फसलों की पैदावार बेहतर होगी और फसल की गुणवत्ता भी बढ़ेगी। इसलिए किसान भाई समय रहते अपने खेतों की गहराई से जुताई का यह वैज्ञानिक सुझाव जरूर अपनाएं, जिससे आने वाले खरीफ सीजन में बंपर पैदावार की मजबूत नींव रखी जा सके।

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