Sweet Corn Farming : कृषि से मोटी कमाई करने के लिए किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ व्यापारिक खेती पर भी जोर दे रहे हैं। आज कई राज्यों के किसान अपने खेतों में कम समय में अधिक पैदावार देने वाली विभिन्न फसलें लगा रहे हैं और उत्पादन से बेहतर कमाई कर आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में लगे हुए हैं। वहीं, केंद्र और राज्य दोनों सरकारें भी फसलों के विविधिकरण को बढ़ावा दे रही है, ताकि किसानों की आय बढ़ाई जा सके। इन सबके बीच बिहार में किसानों की आय बढ़ाने में स्वीट कॉर्न (Sweet Corn) कारगर साबित हो रही है। मक्का की खेती में स्वीट कॉर्न विविधता से राज्य के किसानों की किस्मत बदली है और उनकी कमाई बढ़ी है। यहां के किसानों के लिए यह फसल आय बढ़ाने का एक अहम जरिया बन रही है।
इसको देखते हुए सरकार द्वारा राज्य में स्वीट कॉर्न की खेती (Sweet Corn Farming) बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहन सहित उत्पादन के लिए उचित प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसके लिए बिहार कृषि विभाग द्वारा रबी मौसम 2023-24 में राज्य के अलग-अलग जिलों में स्वीट कॉर्न को बढ़ावा देने के मकसद से विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया, जिससे फायदा यह हुआ कि स्वीट कॉर्न से राज्य के किसानों की शुद्ध आय में बढ़ोतरी हुई। पूर्णिया के किसानों ने स्वीट कॉर्न मक्का की खेती (Maize Farming) पर फोकस किया, जिससे उनकी कमाई बढ़ी है। आइए, जानते हैं कि स्वीट कॉर्न की खेती से कैसे मोटा मुनाफा कमा सकते हैं और इसकी खेती कैसे होती है।
बिहार कृषि विभाग के सचिव संजय अग्रवाल ने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों में स्वीट कॉर्न की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम क्रियान्वित किया जा रहा है, जिसके तहत मक्का की खेती में स्वीट कॉर्न विविधता को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों को बिहार सरकार की ओर से प्रोत्साहन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार का पूर्णिया जिला रबी मौसम में सामान्य मक्का की खेती के लिए जाना जाता है। कृषि विभाग द्वारा मक्का की खेती में विविधता लाने के उद्देश्य से एवं जिले के किसानों की आय को बढ़ाने के लिए स्वीट कॉर्न की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए आत्मा योजना के माध्यम से किसानों के साथ संवाद स्थापित किया गया और पूर्णिया पूर्व प्रखंड के चांदी पंचायत में ऐसे किसान जो पहले गेहूं की खेती करते थे, उनके द्वारा 2.5 एकड़ में स्वीट कार्न की खेती की गई, जिससे किसानों ने लाखों रुपए का मोटा मुनाफा कमाया।
कृषि सचिव ने कहा कि कृषि विभाग द्वारा आत्मा योजना के अंर्तगत किसानों को प्रशिक्षण के साथ–साथ बीज उपलब्ध कराया गया। किसानों को स्वीट कॉर्न के प्रभेद शुगर-75 बीज उपलब्ध कराया गया। उन्होंने कहा कि अक्टूबर में बोए गये स्वीट कॉर्न (Sweet Corn) की फसल 90 दिनों में बिक्री के लिए तैयार हो गई। स्वीट कॉर्न की खेती में किसानों की कुल लागत 40 हजार रुपए प्रति एकड़ तक आई है। एक एकड़ में किसानों द्वारा औसतन 20 हजार उत्पादित स्वीट कॉर्न (Sweet Corn) का भुट्टा को स्थानीय बाजार में 10 रुपए प्रति भुट्टा की दर से बेचा गया, जिससे किसानों को एक एकड़ में 1 लाख 60 हजार रुपए का शुद्ध मुनाफा हासिल हुआ, जो किसान गेहूं की खेती से प्राप्त नहीं कर पाते थे।
कृषि सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि आत्मा योजना के प्रसार कार्यकर्ता और कृषि विभाग केंद्र के अधिकारियों के माध्यम से किसानों को समय-समय पर स्वीट कॉर्न की खेती से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया । आत्मा योजना से किसानों को बीज के अलावा कई आवश्यक कृषि इनपुट तथा पौधा संरक्षण देने योग्य (उपादान) जानकारी उपलब्ध कराई गई, जिससे किसानों को स्वीट कॉर्न मक्का की खेती के लिए बढ़ावा मिला। स्वीट कॉर्न का पौधा हरा होने के कारण किसानों ने इसे पशु चारे के रूप में भी उपयोग किया। स्वीट कॉर्न की फसल 90 से 100 दिनों में तैयार हो जाती है, इस तरह किसान एक ही खेत में फसल चक्र में तीन फसल आसानी से ले सकते हैं। स्वीट कॉर्न की खेती में कम लागत में डेढ़ लाख से ज्यादा का शुद्ध मुनाफे प्राप्त कर पूर्णिया के किसान गदगद हैं और वे कृषि विभाग की आत्मा योजना की भी तारीफ कर रहे हैं, जिससे किसानों को स्वीट कॉर्न की खेती के लिए बढ़ावा मिला।
कृषि विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि खरीफ मौसम में स्वीट कॉर्न की खेती में किसानों की दिलचस्पी को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2024–25 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत राज्य में स्वीट कॉर्न के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 54.99 लाख रूपए की स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना के अंतर्गत बिहार में स्वीट कॉर्न के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए खरीफ मौसम में बीज वितरण किया जाएगा, जिससे किसानों को लाभ होगा। राज्य में मुख्य तौर पर खरीफ सीजन में धान के साथ-साथ मक्का की खेती की जाती है। मक्का की खेती के साथ मिश्रित खेती भी की जाती है, जिससे किसानों को काफी फायदा होता है। खरीफ के सीजन में किसान मक्का के साथ बींस, खीरा, भिडी या अन्य सब्जियों की खेती करते हैं और इससे वे काफी अच्छी कमाई भी करते हैं। खरीफ मक्का की बिजाई 25 मई से 15 जून तक तक सकते हैं। इसकी खेती के लिए किसानों को 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बीज का इस्तेमाल करना चाहिए। बिजाई करने से पहले बीज को फफूंदनाशक दवा कैप्टान, थीरम या वैभिस्टिन के साथ बीजोपचार करना चाहिए। 2.5 ग्राम पाउडर प्रति किलोग्राम बीज दर से बीजोपचार करें। मकई की बुवाई करने के लिए पंक्तियों की दूरी 25 सेमी. और पौधे से पौधे के बीच की दूरी 20 सेमी. रखनी चाहिए। खरीफ सीजन में मक्का की खेती के लिए सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन खेतों में जल निकासी की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए।
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