आम उत्पादकों के लिए बड़ी खबर, आम एक्सपोर्ट के लिए सरकार का स्पेशल प्लान तैयार

आम उत्पादकों के लिए बड़ी खबर, आम एक्सपोर्ट के लिए सरकार का स्पेशल प्लान तैयार
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यूएस और यूरोपियन देशों के बाजार तक पहुंचेगा यूपी का आम, जानें सरकार का स्पेशल प्लान

आम के उत्पादकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। देश में आम का रकबा बढ़ाने एवं उत्पादित रंगीन प्रजातियों के आम को यूएस और यूरोपियन देशों के बाजार में पहुंचाने के लिए सरकार द्वारा स्पेशल प्लान तैयार किया है। केंद्र सरकार के 20 फलों और सब्जियों के समुद्री मार्ग से निर्यात के पायलट प्रोजेक्ट में आम को भी शामिल किया है। इससे उत्तर प्रदेश के बागवानों को आम के और अच्छे दाम मिलेंगे। योगी सरकार (yogi government) उत्तर प्रदेश में निर्यातकों के लिए वैश्विक स्तर की बुनियादी सुविधाएं पहले से ही तैयार कर रही है, ताकि प्रदेश के आम अंतरराष्ट्रीय मार्केट तक आसानी से पहुंच सकें। ऐसे में आम के निर्यात (Mango Export) की जो भी संभावना बनेगी, स्वाभाविक है कि उसका सबसे अधिक फायदा आम का सर्वाधिक उत्पादन करने वाले उत्तर प्रदेश के बागवानों को ही मिलेगा।  

उत्पादकों के साथ-साथ सरकार को भी होगा फायदा (Along with producers, the government will also benefit)

देश में आम के उत्पादन में उत्तर प्रदेश राज्य नंबर वन पर है। प्रदेश में अभी प्रति हेक्टेयर आम का उत्पादन (Mango production) 16 से 17 टन का है, जो राष्ट्रीय औसत उत्पादन से अधिक है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (National Horticulture Board) के वर्ष 2015-16 के आंकड़ों के मुताबिक यूपी में आम का रकबा 28 मिलियन हेक्टेयर (12.55 प्रतिशत), उपज 4.51 मिलियन टन (24.02 प्रतिशत) और प्रति हेक्टेयर उत्पादन 116.11 टन था। अभी के आंकड़ों के अनुसार, देश के उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 25 प्रतिशत हो गई है। प्रदेश में अब सालाना 2.5 मिलियन टन आम का उत्पादन होता है और आम का रकबा बढ़कर 265.62 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल हो चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि पुराने बागों के जीर्णोद्धार कैनोपी मैनेजमेंट/छत्र प्रबंधन, सघन बागवानी, फसल संरक्षा,सुरक्षा के सामयिक उपाय से प्रति हेक्टेयर 20 टन तक उपज लेना संभव है।  योगी सरकार अब इन्हीं पहलुओं पर लगातार काम भी कर रही है। आम की उपज और गुणवत्ता बढ़ाकर सरकार इसे दुनिभर में पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिससे उत्पादकों के साथ-साथ सरकार को भी खूब फायदा होगा।  

मुख्यमंत्री का विशेष फोकस (Chief Minister's special focus)

निर्यात की बेहतर संभावनाओं के मद्देनजर सरकार विभिन्न आयोजनों और कार्यक्रमों के जरिए बागवानों के अधिकतम हित में लगातार प्रयास कर रही है। उपज और गुणवता बढ़ाने के लिए पुराने बागों के कैनोपी प्रबंधन के बारे सरकार शासनादेश जारी कर चुकी है। पुराने बागों की उपज और गुणवत्ता सुधारने के लिए आम के कैनोपी प्रबंधन की जरूरत होती है। वैज्ञानिक लगातार बागवानों को पुराने बागों की इस विधा से प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित भी कर रहे हैं, जिससे कुछ समय बाद आम के उत्पादन और गुणवत्ता पर इसका असर दिखेगा।  केंद्र की मदद से प्रदेश सरकार ने सहारनपुर, अमरोहा, लखनऊ और वाराणसी में चार पैक हाउस भी लगाए है। सरकार आम की बागवानी को प्रोत्साहन देने का हर संभव प्रयास कर रही है। खास कर मुख्यमंत्री योगी नाथ द्वारा इन प्रयासों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। 

आम की रंगीन प्रजातियों के विकास पर काम (Work on development of colorful varieties of mango)

रहमानखेड़ा स्थित केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (लखनऊ) के निदेशक टी. दामोदरन की अगुआई में भी आम की गुणवत्ता सुधारने, यूरोपियन बाजार की पसंद के अनुसार रंगीन प्रजातियों के विकास पर भी लगातार काम हो रहा है। अंबिका, अरुणिमा नाम की आम प्रजाति रिलीज हो चुकी है। अवध समृद्धि प्रजाति जल्द रिलीज होने वाली है। अवध मधुरिमा (Awadh Madhurima) रिलीज की लाइन में है। एक्सपोर्ट की अच्छी संभावना वाली आम की इन प्रजातियों का सर्वाधिक फायदा भी उत्तर प्रदेश के बागवानों को मिलेगा। पिछले साल इनोवा फूड के एक प्रतिनिधिमंडल ने कृषि उत्पादन आयुक्त देवेश चतुर्वेदी से मुलाकात की थी। उन लोगों ने बताया कि यूएस और यूरोपियन बाजारों में चौसा और लगड़ा आम की ठीक ठाक डिमांड है। उनके निर्यात के मानकों को पूरा किया जाय, तो उत्तर प्रदेश के लिए यह अपार संभावनाओं वाला मार्केट हो सकता है। उल्लेखनीय है कि आम की ये दोनों प्रजातियां यूपी में ही पैदा होती हैं।

आम महोत्सव का आयोजन (Mango festival organized)

सरकार देश और विदेशों में आम महोत्सव का आयोजन करवा रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आम का क्रेज बढ़ रहा है। इस साल भी 12 जुलाई को अवध शिल्प ग्राम में आम महोत्सव का आयोजन हुआ था, जिसमें प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हिस्सा लिया था। उनके ही प्रयासों से 160 वर्षों के इतिहास में पहली बार मलिहाबाद (लखनऊ) का दशहरी अमेरिका को निर्यात किया गया। तब भारत में दशहरी का दाम 60 से 100 रुपए प्रति किलोग्राम के बीच था,पर अमेरिका के बाजार में 900 रुपए की दर से बिका। निर्यात की संभावना बढ़े। बागवानों को आम के बेहतर दाम मिलें इसके लिए सरकार यूपी के आमों की विदेशों में भी ब्रांडिंग कर रही है।  इसी क्रम में पिछले साल उद्यान विभाग की टीम मास्को गई थी। वहां पर टीम ने आम महोत्सव का आयोजन किया था, जिसमें  किसानों को आर्डर भी मिला था। 

बागवानों को लगातार किया जा रहा जागरूक (Gardeners are being continuously made aware)

बागवानों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपज के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की गोष्ठियों के जरिए लगातार जागरूक किया जा रहा। भारत-इजरायल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 3 दिवसीय गोष्ठी हाल ही संपन्न हुई। इसके पहले 21 सितंबर को आम की उपज और गुणवत्ता में सुधार की रणनीतियां और शोध प्राथमिकताएं विषय पर भी एक अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठी हो चुकी है। यूएस और यूरोपियन देशों के निर्यात मानकों को पूरा करने के लिए सरकार जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jewar Airport)  के पास रेडिएशन ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करे। 

रेडिएशन ट्रीटमेंट प्लांट लगाने जा रही सरकार (Government is going to set up radiation treatment plant)

अभी तक उत्तर भारत में कहीं भी इस तरह का ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है।  इस तरह के ट्रीटमेंट प्लांट सिर्फ मुंबई और बेंगलुरु में है। इन्हीं दो जगहों के आम की प्रजातियों अलफांसो, बॉम्बे ग्रीन, तोतापुरी, बैगनफली की निर्यात में सर्वाधिक हिस्सेदारी भी है। उत्तर प्रदेश में ट्रीटमेंट प्लांट न होने से संबंधित देशों के निर्यात मानकों के अनुसार आम ट्रीटमेंट के लिए पहले इनको मुंबई या बेंगलुरु भेजा जाता है। ट्रीटमेंट के बाद फिर निर्यात किया जाता है, जिसमें समय और संसाधन दोनों की बर्बादी होती है।  इसीलिए यूपी की योगी सरकार पीपीपी मॉडल पर जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास रेडिएशन ट्रीटमेंट प्लांट लगाने जा रही है। प्लांट चालू होने से प्रदेशके आम बागवानों के लिए यूरोपीय देशों के बाजारों में पहुंच आसान हो जाएगा।  

एक्सपोर्ट सेंटर बिछाया जा रहा है एक्सप्रेसवे का संजाल (Expressway network is being laid in export center)

चूंकि यूपी में आम का सबसे अधिक उत्पादन होता है, इसलिए निर्यात की किसी भी नए अवसर का सर्वाधिक लाभ भी यहीं के बागवानों को मिलेगा। उत्पाद कम समय में एक्सपोर्ट सेंटर तक पहुंचे, इसके मद्देनजर एक्सप्रेसवे का संजाल बिछाया जा रहा है। पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे चालू हो चुके हैं। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का काम भी लगभग पूरा है। योगी सरकार रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय भी खोलने जा रही है। इस बाबत जमीन चिन्हित की जा चुकी है।  यह जमीन रायबरेली के हरचरनपुर के पडेरा गांव में है। कृषि विभाग इसे उद्यान विभाग को ट्रांसफर भी कर चुका है। प्रदेश में होने वाले आम, आंवला और अमरूद की पट्टी से यह महाविद्यालय करीब होगा। सरकार द्वारा हर जिले और सभी कृषि विश्वविद्यालयों एवं उनसे संबंध कृषि विज्ञान केंद्रों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोलने का निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही दे चुके हैं।  

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