Sugarcane variety ko.lakh.16202 : गन्ना किसानों को खेती से अधिक आर्थिक लाभ मिले, इसके लिए राज्य सरकारों द्वारा गन्ने का एसएपी (स्टेट एग्रीज्ञ प्राइस) में बढ़ोतरी की जा रही है। हाल ही पंजाब और बिहार सरकार ने गन्ने का राज्य सहमति मूल्य में गन्ने की नई कीमत 10-10 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाया, जिससे राज्य के गन्ना किसानों को अब पहले से अधिक रेट मिलेगा। वहीं, किसान मिलों को जड़ पत्ती अगोला रहित साफ सुथरा व गुणवत्तायुक्त ताजा गन्ना की आपूर्ति करें, इसके लिए गन्ना अनुसंधान संस्थान द्वारा गन्ने की नई-नई किस्में विकसित कर जारी की जा रही है। इस कड़ी में गन्ना उत्पादक किसानों के लिए बड़ी अच्छी खबर है। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ के वैज्ञानिकों ने गन्ने की नई किस्म विकसित की है। इस गन्ने की खासियत यह है कि यह किसानों को बंपर उत्पादन देगी। साथ यह किस्म लाल सड़न रोग प्रतिरोधी है। गन्ने की इस नई किस्म से चीनी गन्ने की यह नई किस्म किसानों को कर देगी मालामाल, एक हेक्टेयर में 920 क्विंटल बंपर पैदावारमिलों को भी अच्छा चीनी परता मिलेगा। गन्ना किसान इस खास गन्ना किस्म की खेती लगाकर एक बार में ही मालामाल हो जाएंगे। आइए, गन्ना की इस नई किस्म की खासियत और पैदावार के बारे में विस्तार से जानें।
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी डॉक्टर संजीव कुमार पाठक ने बताया कि भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ के वैज्ञानिकों ने गन्ने की नई किस्म को.लख. 16202 (Co.Lakh. 16202) विकसित की है। गन्ने की यह किस्म कोयंबटूर और लखनऊ गन्ना प्रजनन केंद्रों के सहयोग से विकसित की गई है। को.लख. 16202 (Co.Lakh. 16202) गन्न की इस नई किस्मे से गन्ना उत्पादक किसानों को 920 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन मिल सकता है। गन्ने की यह किस्म उकठा और लाल सड़न रोग की प्रतिरोधी किस्म है। खास बात यह है कि यह शीघ्र पकने वाली किस्म है, जिसको किसान कम लागत में उगाकर बंपर पैदावार ले सकते हैं।
भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ के वैज्ञानिकों अनुसार, गन्ने की नई किस्म को.लख. 16202 से चीनी मिल को भी अच्छा चीनी परता मिलता है। नवंबर के महीने में कटाई करने पर 11.94 प्रतिशत और जनवरी के महीने में कटाई करने पर 13.57 प्रतिशत तक चीनी परता की रिकवरी दर्ज की गई है। गन्ने की इस नई किस्म ko.lakh. 16202 की पहचान करना किसानों के लिए बेहद आसान है। गन्ना किस्म को.लख. 16202 का गन्ना मध्य मोटा, ठोस और मध्यम कड़ा होता है। इस गन्ने की आंख गोलाकार चिपकी हुई होती है, किसी-किसी गन्ने में एक ही गांठ पर दो से तीन आंखें पाई जाती हैं।
कोलख 16202 गन्ना किस्म के गन्ने की सूखी पत्तियां आसानी से उतर जाती हैं, जिससे इस किस्म के गन्ने की कटाई में आसानी रहती है। गन्ने की यह किस्म गन्ने में प्रमुख लाल सड़न रोग के प्रति मध्य रोगरोधी है। इस गन्ना किस्म की खास बात यह है यह शीघ्र पकने वाली गन्ना किस्म है, जिसको लगाकर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन ले सकते हैं। गन्ने की इस नई किस्म से किसानों को 920 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन मिल सकता है।
गन्ना अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार, गन्ना के अच्छे उत्पादन के लिए किसानों द्वारा गन्ने की बुवाई से लेकर इसकी कटाई तक में कड़ी मेहनत की जाती है, लेकिन इसके बावजूद भी लागत और मेहनत के अनुरूप किसानों को उचित उत्पादन नहीं मिल पाता है। गन्ना उत्पादक किसान गन्ने की बुवाई के लिए उपयुक्त मिट्टी, जलवायु, तापमान तथा सही समय पर गन्ना उगाकर इसका उत्पादन बढ़ा सकते हैं। साथ ही गन्ने की खेती में तकनीकी बदलाव एवं बुवाई के बाद देखभाल कुछ खास टिप्स को अपनाकर गन्ने का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। मध्य और पश्चिम भारत में गन्ने की बुवाई का सही समय 15 फरवरी-मार्च अंत तक का होता है, जबकि उत्तर भारत में फरवरी-मार्च में बसंत कालीन गन्ने की खेती लगाई जाती है। शरदकालीन गन्ने की खेती से अधिक पैदावार लेने के लिए सर्वोत्तम समय अक्टूबर से नवम्बर है।
एक्सपर्ट के अनुसार, मध्य, पश्चिम और उत्तर भारत के क्षेत्रों के किसानों गन्ने की खेती के लिए देर से पकने वाली किस्मों का चयन करना चाहिए। अगर किसान शीघ्र और जल्दी पकने वाली गन्ने की किस्में लगाना चाहते है, तो वे अगेती किस्म को.शा. 13235, कोलख 14201 (यह शीघ्र पकने वाली किस्म है), को. 15023 को.शा. 18231(हाल ही रिलीज हुई किस्म है), को. लख. 16202 (हाल ही रिलीज हुई किस्म है), सीओ-0124 (करण-5) का चयन कर सकते हैं। यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रतिरोधी है और यह जलभराव और भराव दोनों स्थितियों में बेहतर पैदावार देती है। गन्ने की बुवाई या रोपाई पंक्ति से पंक्ति की दूरी 90 सेंटीमीटर से लेकर 60 सेमी. (देरी से गन्ना बोवाई की दशा में और कम सिंचाई की उपलब्धता) की स्थिति में रखें।
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