Onion Market Price : देश के कई राज्यों में प्याज के भावों में तेजी एक नया रिकार्ड बना रही है। सप्लाई में कमी व मांग में वृद्धि के कारण प्याज की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। कई मंडियों में प्याज का अधिकतम भाव 5 हजार रुपए प्रति क्विटंल के पार पहुंच गया है। एक महीने पर पहले मंडियों में प्याज का रिटेल भाव 25 से 30 रुपए किलो था जो अब 50 रुपए से लेकर 70 रुपए किलो तक पहुंच गया है। देश के कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्याज की कीमतों में वृद्धि से सत्ताधारी दल परेशान हैं। वहीं प्याज की तेज कीमतों ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। आइए, ट्रैक्टर गुरु की इस पोस्ट से जानें कि प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे प्रमुख कारण क्या है, प्याज के भावों में तेजी कितने दिन रहेगी और देश की प्रमुख राज्यों में प्याज के भाव क्या है।
प्याज के भावों में तेजी के पीछे सबसे प्रमुख कारण कम उत्पादन है। पिछले कुछ सालों से प्याज की खेती का रकबा लगातार घट रहा है जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है। साथ ही इस बार मानसून सीजन में बारिश के कारण कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में खरीफ प्याज को नुकसान पहुंचा है। खरीफ प्याज की आवक उत्पादक मंडियों में कम बनी हुई है। सितंबर के दूसरे सप्ताह के बाद प्याज की आवक में कुछ तेजी आएगी।
देश में प्याज की कुल खपत की 72 से 75 प्रतिशत की पूर्ति रबी सीजन की प्याज से की जाती है। रबी सीजन की प्याज दिसंबर-जनवरी में बोई जाती है और मार्च के बाद काटी जाती है। इस वर्ष रबी प्याज की खेती मात्र 7.56 लाख हेक्टेयर भूमि पर की गई थी, जबकि पिछले वर्ष यह क्षेत्र 12.3 लाख हेक्टेयर था। इसके कारण प्याज की आपूर्ति में कमी आई है और कीमतें बढ़ गई हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2021-22 से 2023-24 के बीच देश में प्याज की खेती का रकबा 4,04,000 हेक्टेयर कम हो गया है। इससे उत्पादन में गिरावट आई है। वर्ष 2021-22 में 316.87 लाख टन प्याज का उत्पादन हुआ था जो 2022-23 में घटकर 302.08 लाख टन रह गया। वर्ष 2023-24 में यह और घटकर सिर्फ 242.12 लाख टन ही रह गया है। इस तरह पिछले दो साल में ही प्याज उत्पादन में 74.75 लाख टन की गिरावट आ चुकी है।
देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्य महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज की आवक में भारी कमी देखी जा रही है। अधिकांश मंडियों में 10 हजार क्विंटल प्रतिदिन से कम प्याज की आवक हो रही है। 28 अगस्त को प्याज की सबसे अधिक प्याज की आवक पिंपलगांव बसवंत मंडी में 13500 क्विंटल दर्ज की गई। प्रमुख मंडियों में प्याज की आवक इस प्रकार रही :
| मंडी का नाम | आवक (क्विंटल में) |
अधिकतम भाव ( प्रति क्विंटल) |
| अकलुज | 280 | 4500 रुपए |
| खेड़ चाकण | 1250 | 4000 रुपए |
| कराड | 48 | 4200 रुपए |
| सांगली | 3207 | 4300 रुपए |
| पुणे | 7907 | 4000 रुपए |
| पुणे- पिंपरी | 10 | 4000 रुपए |
| मंगलवेढ़ा | 23 | 4500 रुपए |
| येवला उन्हाळी | 5000 | 3846 रुपए |
| येवला-अंदरसुल उन्हाळी | 2000 | 3900 रुपए |
| लासलगांव-विंचूर उन्हाळी | 3000 | 4100 रुपए |
| पिंपलगांव बसवंत उन्हाळी | 13500 | 4012 रुपए |
| पिंपलगांव (बी)-साईखेड़ा उन्हाळी | 3270 | 3820 रुपए |
Sources : Maharashtra State Agricultural Marketing Board
ये महाराष्ट्र की प्रमुख प्याज उत्पादक मंडियां हैं जहां पर कभी 50 हजार से 1 लाख क्विंटल तक प्याज की आवक होती थी। अब इन मंडियों में आवक कम हो रही है।
Sources : commodityonline.com
उपरोक्त कीमत 27 व 28 अगस्त की है। इनमें समय के अनुसार बदलाव संभव है।
देश के चार प्रमुख राज्य महाराष्ट्र, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और झारखंड में इस साल विधानसभा चुनाव होने है। केंद्र सरकार ने प्याज के निर्यात से बैन हटा रखा है और 550 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य यानी एमईपी और 40 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई हुई है। अभी खरीफ प्याज की आवक कम है। बारिश के कारण फसल में नुकसान है। प्याज का पुराना स्टाक ही बाजार में बिक रहा है। सरकार की नीतियों से ही प्याज के भावों में कुछ परिवर्तन संभव है।
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