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देसी गाय पालन पर सब्सिडी : एक गाय पर सरकार से मिलेंगे 10800 रुपए, अभी कराएं रजिस्ट्रेशन

देसी गाय पालन पर सब्सिडी : एक गाय पर सरकार से मिलेंगे 10800 रुपए, अभी कराएं रजिस्ट्रेशन
पोस्ट - May 21, 2022 शेयर पोस्ट

प्राकृतिक खेती के लिए देसी गाय पालने पर सरकार से मिलेगी मदद

केंद्र व राज्य सरकारें किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाओं के माध्यम से मदद कर रही है। किसानों को खाद-बीज पर सब्सिडी, कृषि यंत्रों पर सब्सिडी, नकद सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके बावजूद किसानों की आय में अधिक वृद्धि नहीं हो रही है। वहीं कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खेती के बजट को कम करके मुनाफा बढ़ाया जा सकता है। अगर किसान रसायनिक खाद-बीज का उपयोग खेती में करता है तो इससे खेती की लागत बढ़ जाती है और किसान को अच्छा मुनाफा नहीं मिल पाता है। इसके विपरित यदि किसान प्राकृतिक तरीके से खेती करता है तो उसकी खेती की लागत कम आती है और प्राकृतिक खेती के उत्पाद बाजार में अधिक कीमत पर बिक रहे हैं। इससे किसानों का  मुनाफा बढ़ जाता है। प्राकृतिक खेती के लिए देसी गाय सबसे महत्वपूर्ण घटक है। बिना देसी गाय के प्राकृतिक खेती की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए देसी गाय पालन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। देसी गाय पालने वाले किसान को 10 हजार 800 रुपए प्रतिवर्ष की सब्सिडी सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जा रही है। ट्रैक्टर गुरु की इस पोस्ट देसी गाय पालन पर सब्सिडी के बारे में जानकारी दी जा रही है। तो बने रहिए ट्रैक्टर गुरु के साथ।

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प्राकृतिक खेती के लिए देसी गाय पालने पर मिलेगी आर्थिक मदद

खेती में रसायनिक खाद-बीज के नुकसान ब जगजाहिर है। सैकड़ों तरह की बीमारियां से मानव जीवन प्रभावित हो रहा है। रसायनिक खेती के दुष्परिणामों से बचने के लिए प्राकृतिक खेती (नेचुरल फार्मिंग) को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में प्राकृतिक खेती को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। प्राकृतिक खेती के लिए देसी गाय पालने वाले किसानों को एक गाय के लिए 900 रुपए प्रतिमाह (10 हजार 800 रुपए सालाना) की आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा किसान गाय का दूध बेचकर अधिक आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही गोबर व गौमूत्र का उपयोग खेतों में खाद व कीटनाशक के रूप में कर सकते हैं।

एक गाय का गोबर व गौमूत्र 30 एकड़ जमीन के लिए उपयोगी

प्राकृतिक खेती में एक देसी गाय का गोबर व गौमूत्र 30 एकड़ भूमि के लिए पर्याप्त होता है। इससे रसायनिक खाद के मुकाबले कम लागत आती है और किसान अधिक खुशहाल बनता है। देसी गाय के गोबर व गौमूत्र से जीवामृत और घन जीवामृत बनाए जाते हैं। मध्यप्रदेश में नर्मदा के तट पर प्राकृतिक खेती किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है।  प्राकृतिक खेती के भरपूर फायदे हैं। एक तो लागत कम होती है, साथ ही पानी की जरूरत कम पड़ती है। जो फसल आती है वह बिना किसी दोष के होती है जिससे कोई रोग नहीं होगा।

प्राकृतिक खेती के लिए रजिस्ट्रेशन

यहां आपको बता दें कि प्राकृतिक खेती के लिए देसी गाय पालने वाले किसानों को ही 900 रुपए प्रतिमाह की सब्सिडी दी जाएगी। जिन किसानों ने देसी गाय तो पाल रखी है लेकिन वे प्राकृतिक खेती नहीं करते हैं, ऐसे किसानों को सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा। मध्यप्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को http://mpnf.mpkrishi.org/  पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा। वेबसाइट पर दायी तरफ पंजीयन की विंडो बनी हुई है। इस पर क्लिक करने के बाद किसान पंजीकरण फार्म खुलेगा जिसे भरकर किसान अपना पंजीयन करा सकता है।

मध्यप्रदेश में प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड बनेगा

मध्यप्रदेश में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए मप्र प्राकृतिक कृषि विकास बोर्ड बनाने की मंजूरी केबिनेट ने दे दी है। एमपी के कृषि मंत्री कमल पटेल के अनुसार प्रदेश के 1 लाख 65 हजार किसानों ने इसमें रूचि दिखाई है। जिला परियोजना संचालन के जरिस प्राकृतिक खेती से जुड़े कार्य किए जाएंगे, जिसके लिए किसान को आवेदन करना होगा। आवेदन में किसान को बताना होगा कि वह कितनी भूमि में प्राकृतिक खेती करना चाहता है। 

जानें, देसी गाय की नस्लें कौन-कौनसी है?

प्राकृतिक खेती के लिए देसी गाय होना अनिवार्य है। यहां आपको देसी गाय की नस्लों के बारे में जानकारी दी गई है। भारत में देसी गाय की 56  नस्लें पाई जाती है। इनमें इसमें मालवी, निमाड़ी, गिर, थारपारकर, नागौरी, कांकरेज, साहीवाल, हरियाणवी, राठी, हल्लीकर, कांकरेज, लाल सिंधी, कृष्णा वैली, खिल्लारी आदि नस्ल की गायें शामिल हैं। मध्यप्रदेश में मूल रूप से मालवी, निमाड़ी और गुजरात की गिर गाय अधिक हैं। 

5200 गांवों में प्राकृतिक खेती का लक्ष्य

मध्यप्रदेश सरकार ने खरीफ की फसल प्राकृतिक पद्धति से करानेे के लिए लक्ष्य निर्धारित किए हैं। प्रदेश के 52 जिलों में कम से कम 100 गांवों को चिन्हित किया जाएगा। इस प्रकार प्रदेश के 5200 गांवों में खरीफ की फसल प्राकृतिक खेती के रूप में की जाएगी। नर्मदा किनारे गांवों में प्राकृतिक खेती को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद 5 एकड़ में प्राकृतिक खेती करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी किसानों ने आधा एकड़ में प्राकृति खेती करने की अपील की है। 

किसानों के लिए ये सुविधाएं भी मिलेगी

  • किसानों की मदद और मार्गदर्शन के लिए कार्यशालाएं कराई जाएंगी। 

  • किसानों को प्राकृतिक खेती की बारिकी समझाई जाएगी ताकि उन्हें अधिक फायदा हो। 

  • किसानों को प्राकृतिक कृषि किट लेने के लिए 75 प्रतिशत तक राशि भी उपलब्ध कराई जाएगी।

  • हर ब्लाक में पांच प्राकृतिक खेती प्रशिक्षक नियुक्ति करेगी, जो किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रेरित करेंगे।

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