पिछले कुछ दशकों से ग्रामीण क्षेत्र में कृषि के साथ पशुपालन भी लोगों का आय का मैन साधान बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के लिए पशुपालन काफी लाभकारी साबित हो रहा है। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार नबार्ड की सहायता से राष्ट्रीय पशुधन मिशन चला रही है। इस मिशन के तहत देश में कई प्रकार की परियोजनाएं चलाई जा रही है। जिनमें केंद्र सरकार ने पशुधन बीमा योजना नाम से पशुपालाकों के लिए एक बीमा योजना चला रखी है। केंद्र सरकार ने इस योजना को पशुपालकों के लिए आरंभ किया है। पशुधन बीमा योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा सभी दुधारू तथा मांस उत्पादित करने वाले पशुओं का बीमा कराया जाएगा। योजना के तहत यदि किसी कारणवश बीमित पशुओं की मृत्यु हो जाती है, तो बीमा कंपनी मुआवजा की रकम पशुपालक मलिक को प्रदान करेगी। बीमा कंपनी के द्वारा पशुपालक मालिक को मुआवजे की रकम 15 दिन के अंदर अंदर प्रदान करनी होगी। इसके लिए पशुपालक मालिक को प्रीमियम की रकम का भुगतान करना होगा। बता दें कि पशुधन केंद्र प्रायोजित योजना इस योजना को 10वीं पंचवर्षीय योजना के साल 2005-06 तथा 2006-07 और 11वीं पंचवर्षीय योजना के वर्ष 2007-08 में प्रयोग के तौर पर देश के 100 चयनित जिलों में क्रियान्वित किया गया था। पशुधन बीमा योजना देश के 300 चयनित जिलों में नियमित रूप से चलाया जा रहा है। ट्रैक्टरगुरु के इस लेख में हम आपको पशुधन बीमा योजना से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहे है। इस जानकारी से आप अपने पालतू पशुओं का बीमा आसानी से करवा सकते है।
पशुधन बीमा योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जो पशुपालकों के लिए चलाई जा रही है। पशुधन बीमा योजना को दो उद्देश्य से शुरू किया गया। जिसमें पहला किसानों तथा पशुपालकों को पशुओं की मृत्यु के कारण हुए नुकसान से सुरक्षा मुहैया करवाने हेतु एवं दूसरा पशुधन बीमा के लाभों को लोगों को बताने तथा पशुधन एवं उनके उत्पादों के गुणवत्तापूर्ण विकास के चरम लक्ष्य के साथ लोकप्रिय बनाने के लिए किया गया। सरल भाषा में कहा जाए, तो इस बीमा योजना का मैन उद्देश्य दुधारू तथा मास उत्पादित करने वाले पशुओं को बीमा कवर प्रदान करना है। वहीं, इस योजना के अंतर्गत बीमा कंपनी को दिए जाने वाले प्रीमियम में भी सरकार द्वारा सब्सिडी भी दी जाती है। ताकि अधिक से अधिक पशुपालन योजना से जुड़ने के लिए जागरूक हो सके।
पशुधन बीमा योजना के अंतर्गत पशुपालक दुधारू पशुओं (गाय, भैंस, भेड़ आदि) के साथ-साथ मांस उत्पादित (भेड़, बकरी सहित अन्य पशुओं का भी बीमा करवा सकता है। बीमा योजना के तहत इन पशुओं का बीमा उनके अधिकतम वर्तमान बाजार मूल्य पर किया जाता है। पशुधन बीमा योजना के अंतर्गत पशुपालक कम से कम 5 पशुओं का बीमा करावा सकते है। जिसके लिए किसान, पशुपालकों को प्रीमियम का भुगतान करना होगा। इस प्रीमियम की रकम पर सरकार द्वारा सब्सिडी प्रदान की जाती है। जिसमें एपीएल श्रेणी के किसान और पशुपालकों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। वहीं, बीपीएल, एससी/एसटी के पशुपालकों को 70 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ दिया जाता है। यानि एपीएल श्रेणी के पशुपालाकों को मात्र 50 प्रतिशत ब्याज दर का भुगतान करना होता है। वहीं, बीपीएल, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के पशुपालकों को केवल 30 प्रतिशत ब्याज दर का भुगतान करना होता है। प्रीमियम ब्याज दर 1 साल के लिए 3 प्रतिशत और 3 साल के लिए 7.50 प्रतिशत तक है।
पशुपालकों को पशुओं की आसमिक मृत्यु के कारण आर्थिक हानि न उठाना पड़े इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा पशुधन बीमा योजना चलाई जा रही है। केंद्र प्रायोजित इस बीमा योजना में देसी/ संकर दुधारू मवेशियों और भैंसों का बीमा उनके अधिकतम वर्तमान बाजार मूल्य पर किया जाता है। योजना के अंतर्गत बीमा का प्रीमियम 50 से 70 प्रतिशत तक अनुदानित होता है। यह अनुदान पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है। अनुदान का लाभ अधिकतम दो पशु प्रति लाभार्थी को अधिकतम तीन साल की एक पॉलिसी के लिए मिलता है। केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित यह योजना गोवा को छोड़कर सभी राज्यों में संबंधित राज्य पशुधन विकास बोर्ड द्वारा क्रियान्वित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से लंपी जैसी जानलेवा बीमारियों के दौर में पशुपालकों को भी बड़े आर्थिक संकट से बचाया जा सकता है।
बीते कुछ महीनों में पशुओं में तेजी से बढ़ते लंपी स्किन डिजीज बीमारी से देश के कई राज्यों में पशुपालकों पशुओं की मृत्यु के कारण आर्थिक नुकसान हुआ था। इसके को ध्यान में रखते हुए सरकार इस योजना के अंतर्गत बीमा कंपनी को दिए जाने वाले प्रीमियम में पर सब्सिडी प्रदान कर रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा पशुपालन योजना में आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित हो सके। इस योजना के तहत पशुपालकों को 3 साल की पॉलिसी लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। वहीं, पशुपालक 1 साल की पॉलिसी भी लेना चाहता है, तो वह ले सकता है। बीमा कंपनियों द्वारा पशुपालकों को बीमित पशुओं पर पॉलिसी के अनुसार बीमा कवर दिया जाता है। इसमें सभी पशुओं को 3 साल की अवधि के लिए बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। यदि इस 3 साल की अवधि के दौरान पशु की मृत्यु हो जाती है तो बीमा कंपनी द्वारा पशु को मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
पशुधन बीमा योजना के अंतर्गत यदि पशु की पॉलिसी अवधि समाप्त होने से पहले बिक्री कर दी गई है तो पॉलिसी का लाभ नए मालिक को प्रदान किया जाता है। योजना के अंतर्गत बीमित पशु की मृत्यु होने के 15 दिन के अंदर मुआवजे की राशि बीमा कंपनी को प्रदान करनी होगी। बीमा कंपनियों द्वारा दावों के निष्पादन के लिए सिर्फ 4 दस्तावेज आवश्यक होंगे, जिसमें बीमा कंपनी के पास प्रथम सूचना रिपोर्ट, बीमा पॉलिसी, दावा प्रपत्र और अन्य परीक्षण रिपोर्ट है। पशुओं का बीमा करते समय कार्यकारी अधिकारी यह सुनिश्चित करते हैं दावा के निपटारे हेतु स्पष्ट प्रक्रिया का प्रावधान किया जाए तथा आवश्यक कागजों की सूची तैयार की जाए एवं पॉलिसी प्रपत्रों के साथ उसकी सूची संबंधित लाभार्थियों को भी उपलब्ध करवाई जाए। यदि पशुपालक पशुओं की मृत्यु के 15 दिन के अंदर अंदर यह चारों दस्तावेज नहीं प्रदान कर पाया तो चारों दस्तावेज प्रदान करने के 15 दिन के बाद मुआवजे की राशि दे दी जाएगी।
इच्छुक पशुपालक किसान पशुधन बीमा योजना के अंतर्गत अपने पशुओं का बीमा करवाना चाहते है, तो उन्हें सबसे पहले आपने सभी आवश्यक दस्तावेजों को लेकर बैंक में जाना होगा। इसके बाद आपको वह जाकर आवेदन फॉर्म लेना होगा। फिर आवेदन फॉर्म में पूछी गयी सभी सही जानकारी को सावधानीपूर्वक भरकर बैंक अधिकारी के पास सत्यापन के लिए जमा करना होगा। इसके अलावा ऑलाइन आवेदन के लिए सर्वप्रथम आपको डिपार्टमेंट ऑफ एनिमल हसबेंडरी एंड डेरिंग की ऑफिशियल वेबसाइट https://dahd.nic.in/hi पर जाना होगा। यहां आपके सामने होम पेज खुलकर आएगा। इस होम पेज पर आपको बीमा योजना के एप्लीकेशन फॉर्म की लिंक को ढूंढ कर उस पर क्लिक करना होगा। इसके बाद एप्लीकेशन फॉर्म में पूछी गई सभी जानकारी जैसे कि नाम, पता आदि ध्यान से भरना होगा। जानकारी भरने के बाद एप्लीकेशन फॉर्म को सबमिट बटन पर क्लिक कर सबमिट करना होगा। इस प्रकार आपकी बीमा योजना में आवेदन की प्रक्रिया पूर्ण हो जाएगी।
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