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Silk Farming : सरकार ने चलाई सिल्क समग्र योजना, किसानों को मिलेगी वित्तीय सहायता

Silk Farming : सरकार ने चलाई सिल्क समग्र योजना, किसानों को मिलेगी वित्तीय सहायता
पोस्ट -12 मार्च 2024 शेयर पोस्ट

सिल्क समग्र योजना : रेशम किसानों को मिलेंगे ये विभिन्न लाभ, किसान जल्दी यहां करें आवेदन

Silk Samagra Scheme : देश में कृषि आधारित उद्योगों को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें केंद्र और राज्य सरकार द्वारा रेशम उद्योग के विकास के लिए कई तरह की योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इससे उच्च गुणवत्ता वाले रेशम (बाईवोल्टाइन) के उत्पादन में भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। देश के एकल किसान एवं रेशम उत्पादक संस्थान इसके लिए काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा क्रियान्वित की जा रही इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को वित्तीय रूप से सहायता प्रदान की जा रही है। इनमें सिल्क समग्र योजना (Silk Samagra Scheme) भी शामिल है, जिसके अंतर्गत देश में रेशम की खेती करने वाले एकल किसानों एवं उत्पादक संस्थानों को इसका लाभ मिल रहा है। इस योजना के तहत किसानों को रेशम उत्पादन एवं अन्य संबंधित गतिविधियों की सुविधाओं के लिए सहायता प्रदान की जाती है। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय द्वारा सिल्क समग्र योजना (Silk Samagra Scheme) को साल 2021 में शुरू किया गया। इस योजना का मकसद देश में रेशम उद्योग के विकास को बढ़ावा देना है। साथ ही रेशम बीज उत्पादन तथा अन्य गतिविधियों में संलग्न किसानों को रेशम उत्पादन संबंधित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

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भारत में रेशम की कुल 5 किस्मों का उत्पादन

केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के मुताबिक, विश्व का 90 प्रतिशत से भी अधिक रेशम एशिया में उत्पादित होता है। रेशम उत्पादन के मामले में भारत, चीन के बाद दूसरे स्थान पर है और भारत में प्रति वर्ष लगभग 50 हजार मीट्रिक टन रेशम का उत्पादन होता है। इसके साथ ही भारत विश्व में रेशम का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। व्यावसायिक महत्त्व के दृष्टिकोण से भारत में रेशम की कुल 5 किस्मों का उत्पादन किया जाता है, जो विभिन्न रेशम कीट प्रजातियों से प्राप्त होती है और इन्हें विभिन्न खाद्य पौधों पर पाला जाता है। रेशम की कुल 5 किस्माें में शहतूत (Mulberry), ओक टेसर (Oak Tasar), उष्णकटिबंधीय तसर (Tropical Tasar), मूगा (Muha) और एरी (Eri) शामिल हैं। गोल्डन वेलवेट रेशम दुनिया का सबसे प्रसिद्ध रेशम है, जिसका उत्पादन मात्र भारत में होता है। रेशम व्यापक (Silk Samagra) योजना के अंतर्गत भारत अन्य दूसरे देशों में कच्चे रेशम का एक्सपोर्ट (निर्यात) बढ़ाने में सफल हुआ है।

देश के इन राज्यों में किया जाता है रेशम का उत्पादन

गौरतलब है कि भारत में रेशम की कुल 5 किस्मों का वाणिज्यिक (commercial) रेशम का उत्पादन (silk production) होता है। इसमें शहतूत के अलावा रेशम के अन्य गैर-शहतूती किस्मों को सामान्य रूप में वन्या कहा जाता है। शहतूत रेशम का उत्पादन मुख्यत: भारत के कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, जम्मू और कश्मीर तथा पश्चिम बंगाल में होता है, जबकि गैर-शहतूत रेशम का उत्पादन झारखण्ड, छत्तीसगढ़, ओडिशा तथा उत्तर-पूर्वी राज्यों में किया जाता है। आज 26 रेशम उत्‍पादक और उपभोक्ता राज्‍यों में से केवल 17 के पास ही अलग विभाग या रेशम कीट पालन निदेशालय है। इनके माध्यम से कच्चा रेशम बनाने के लिए रेशम के कीटों का पालन तथा अन्य गतिविधियों के लिए समाधान उपलब्ध कराए जाते हैं। रेशम उत्‍पादन कृषि-आधारित एक कुटीर उद्योग है, जिसमें बड़ी मात्रा में रेशम प्राप्त करने के लिये रेशमकीट का पालन किया जाता है। रेशम के कीटों का पालन सेरीकल्चर कहलाता है।

सिल्क समग्र योजना के बारे में

भारत सरकार द्वारा रेशम उद्योग के विकास के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना "रेशम समग्र" संचालित की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य देश में रेशम उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार करके उत्पादन को बढ़ावा देना है। रेशम उत्पादन की विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन की पर्याप्त क्षमता को बढ़ाना है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार करना है। दलित, गरीब और पिछड़े परिवारों की महिलाओं को एक अनुकूल व्यवसाय प्रदान कर कम समय में अधिक आय का स्थाई रोजगार देना है।

किसानों और रेशम उत्पादकों को दिया जाता है प्रशिक्षण

रेशम समग्र योजना के तहत रेशम उत्पादन के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सूचना प्रौद्योगिकी का विकास किया जाता है। किसानों को सही समय पर अच्छी गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने के लिए बीज संगठन तैयार किया गया है। इस योजना के तहत किसानों और बीज उत्पादकों के लिए समन्वय और बाजार विकसित किए जाते हैं। योजना के गुणवत्ता प्रमाणन प्रणाली (क्यूसीएस) / निर्यात ब्रांड संवर्धन और प्रौद्योगिकी उन्नयन घटक के माध्यम से किसानों एवं रेशम उत्पादकों को गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए तकनीक एवं प्रशिक्षण दिया जाता है। डिजिटल इंडिया के तहत बीज उत्पादन एवं अन्य गतिविधियों में संलग्न किसानों को वेब आधारित समाधान उपलब्ध कराए जाता है। योजना के तहत किसान और बीज उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के जरिए सब्सिडी का सीधा भुगतान किया जाता है। अवसंरचना विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा 50 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित किसानों और रेशम उत्पादक लाभार्थियों को केंद्र सरकार लागत का 65 प्रतिशत अनुदान देती है। वहीं, पूर्वोत्‍तर राज्‍यों, जम्‍मू एवं कश्‍मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्‍तराखंड, झारखंड एवं छत्‍तीसगढ़ के लाभार्थियों के मामले में केंद्र सरकार लागत का 80 प्रतिशत वहन करेगी।

रेशम सम्रग योजना के लिए कैसे करें आवेदन?

भारत सरकार के केंद्रीय रेशम बोर्ड के माध्यम से संचालित रेशम समग्र योजना के तहत जो किसान आवेदन करना चाहते हैं उन्हें अपने जिला रेशम उत्पादन विभाग के कार्यालय में आवेदन करना होगा। इसके लिए किसान को अपने साथ जरूरी दस्तावेज जैसे आधार, पैन कार्ड, पहचान पत्र, बैंक खाते का विवरण के लिए बैंक पास बुक, बिजली का बिल और अन्य व्यवसायिक दस्तावेज ले जाना होगा। कार्यालय में अधिकारी से संपर्क कर रेशम समग्र योजना से संबंधित आवेदन फॉर्म प्राप्त कर उसे भरकर जमा करा दें।

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