कस्टम हायरिंग योजना राजस्थान : राजस्थान किसानों के लिए खुसखबरी, राजस्थान सरकार राज्य में खेती-किसानी को आधुनिकरण से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। जिसके लिए सरकार कई योजनाओं का संचालन भी कर रही है। इसी बीच राज्य में सभी किसानों तक आधुनिक कृषि यंत्र पहुंच बनाने के लिए राजस्थान सरकार राज्य के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में कस्टम हायरिंग केंद्र, कृषि यंत्र बैंक एवं हाई टेक हब सेंटर खोलने के लिए सब्सिडी दे रही है। जिससे राज्य में सभी किसानों को किराए पर महँगे कृषि उपकरण उपलब्ध कराए जा सकें, और राज्य में रोजगार के नए अवसर बनाए जा सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक कृषि यंत्र बैंक की स्थापना करने के लिए राजस्थान सरकार की ओर से क्रय विक्रय सहकारी समितियों (के.वी.एस.एस) और ग्राम सेवा सहकारी समितियों (जी.एस.एस.) को 80 प्रतिशत सब्सिडी या अधिकतम 8 लाख रुपए की सब्सिडी दी जा रही है। यह सब्सिडी कृषि यंत्रों सहित एक ट्रैक्टर खरीदने पर दी जाएगी। इसके लिए सरकार की ओर से तैयारियां भी शुरु की जा चुकी है। राज्य के सभी क्रय विक्रय सहकारी समितियों (के.वी.एस.एस) और ग्राम सेवा सहकारी समितिया (जी.एस.एस.) योजना में ऑनलाइन आवेदन कर ग्रामीण क्षेत्रों में कस्टम हायरिंग केंद्र/कृषि यंत्र बैंक और हाई टेक हब की स्थापना कर सकते है। आइए ट्रैक्टरगुरु के इस लेख के माध्यम से सरकार द्वारा कस्टम हायरिंग केंद्र/ कृषि यंत्र बैंक एवं हाई टेक हब की स्थापना पर दी जा रही है सब्सिडी के राशि, सब्सिडी के लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी और सब्सिडी के लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किस प्रकार होगा इसके बारे में जानते है।
राजस्थान सरकार द्वारा राज्य के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में कस्टम हायरिंग केंन्द्रों (custom Hiring Centers) की स्थापना की जा रही है। ताकि राज्य में सभी किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ मिल सकें। इसके लिए राजस्थान सरकार राज्य में क्रय विक्रय सहकारी समितियों (के.वी.एस.एस) और ग्राम सेवा सहकारी समितियों (जी.एस.एस.) को सब्सिडी भी दी जा रही है। इन समितियों को सब्सिडी देने का सरकार का उद्देश्य है कि राज्य में अधिक से अधिक कस्टम हायरिंग सेंटर खोले जा सकें। बता दें कि कृषि में उन्नत बीज, खाद और सिंचाई के साथ-साथ आधुनिक कृषि यंत्रों का भी अच्छा-खासा योगदान होता हैं। कृषि यंत्रों के इस्तेमाल से उत्पादन में बढ़ोतरी होती हैं। और किसानों आय बढ़ती है साथ ही उनकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी होती है। लेकिन राज्य में अधिकतर किसान छोटे और सीमांत है और इनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है इस कारण ऐसे किसान इन महँगे कृषि यंत्रों को नहीं खरीद पाते हैं। जिसका असर उनकी खेती पर पड़ता है। लेकिन अब राजस्थान के इस प्रयास से अब ऐसे किसानों को भी आधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ मिल रहा है। राज्य में छोटे किसानों के लिए ये कस्टम हायरिंग केंद्र काफी मददगार साबित हो रहे है। अब राज्य के किसान इन कस्टम हायरिंग केंद्रो से कम किराए पर ट्रैक्टर सहित कृषि यंत्र ले जा रहे है। और कृषि में लागत को कम कर अपनी आर्थिक स्थिति अच्छी बना रहे है।
राजस्थान सरकार कस्टम हायरिंग सेंटर, कृषि यंत्र बैंक और हाई टेक हब की स्थापना के लिए सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मेकेनाइजेशन योजना (2022-23) के तहत 80 प्रतिशत तक सब्सिडी या 8 लाख रुपए तक की सब्सिडी दी जाएंगी। यह सब्सिडी कृषि यंत्रों सहित एक ट्रैक्टर खरीदने के लिए दी जाएंगी। बता दें कि योजना के माध्यम से सरकार द्वारा यह सब्सिडी क्रय विक्रय सहकारी समितियों (के.वी.एस.एस) और ग्राम सेवा सहकारी समितियों (जी.एस.एस.) को 10 लाख रुपए की लागत से कस्टम हायरिंग केन्द्रों, कृषि बैंकों एवं हाई टेक हब की स्थापना पर दी जाती है।
बता दें कि सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मेकेनाइजेशन योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में कस्टम हायरिंग केंद्र, कृषि यंत्र बैंक की स्थापना के लिए क्रय विक्रय सहकारी समितियों (के.वी.एस.एस) और ग्राम सेवा सहकारी समितियों (जी.एस.एस.) एवं विभिन्न संगठन व किसान समूहों को आर्थिक मदद उपलब्ध करवाई जा रही है। इस मिशन के माध्यम से राज्य में क्रय विक्रय सहकारी समितियों (के.वी.एस.एस), ग्राम सेवा सहकारी समितियों (जी.एस.एस.) एवं कृषक उत्पादक संगठन (एफ.पी.ओ.) आर्थिक मदद के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते है।
कस्टम हायरिंग केंद्र की स्थापना के लिए आप ई-मित्र कियोस्क की मदद से निर्धारित शुल्क देकर कस्टम हायरिंग योजना (Custom Hiring Plan) में आवेदन कर सकते हैं। उप निर्देशक, कृषि जिला परिषद कार्यालय द्वारा प्राप्त आवेदनों को रजिस्टर में एंट्रीज कर भौतिक सत्यापन किया जाएगा। किसानों को बजट की उपलब्धता की अनुरूप वरियता क्रम में नियमानुसार सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। इस योजना से जुड़ी अन्य विशेष जानकारी के लिए आप अपने संबंधित जिले के कृषि विभाग के सहायक निदेशक (कृषि अभियंत्रण)/ जिला कृषि पदाधिकारी से भी संपर्क कर सकते है।
कस्टम हायरिंग केंद्र की मदद से राज्य में सभी किसानों को कम दर पर आधुनिक कृषि यंत्र किराए पर उपलब्ध करवाए जा रहे है। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार क्रय विक्रय सहकारी समितियों (के.वी.एस.एस), ग्राम सेवा सहकारी समितियों (जी.एस.एस.) और कृषक उत्पादक संगठन (एफ.पी.ओ.) को सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मेकेनाइजेशन योजना (2022-23) के माध्यम से कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना के लिए सब्सिडी भी दे रही है। राजस्थान कृषि विभाग की ओर से ट्रैक्टर सहित ट्रैक्टर, थ्रेशर, रोटावेटर, रीपर, सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल जैसे कृषि यंत्र पर सब्सिडी दी जा रही है। कस्टम हायरिंग केंद्र की स्थापना के लिए क्रय विक्रय सहकारी समितियों (के.वी.एस.एस), ग्राम सेवा सहकारी समितियों (जी.एस.एस.) और कृषक उत्पादक संगठन (एफ.पी.ओ.) को इन कृषि यंत्रों को ट्रैक्टर सहित खरीदना होगा।
मिडिया रिपोर्टस की मानें तो राजथान के कृषि आयुक्त कानाराम का कहना है कि राजस्थान सरकार द्वारा सबमिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन योजना के माध्यम से किसानों को कम दर पर कृषि यंत्र किराए पर उपलब्ध करवाने के लिए राज्य में कस्टम हायरिंग केंद्र, कृषि यंत्र बैंक और हाई टेक हब की स्थापित कर रही है। इस मिशन के माध्मय से सरकार ने पिछले चार सालों में राज्य भर में लगभग 43 करोड़ 11 लाख रुपये की लागत से 748 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गए। जानकारी के लिए बता दें कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा राजस्थान के बजट घोषणा 2022-23 के द्वारा राज्य में राजस्थान कृषि तकनीक मिशन के तहत आगामी 2 वर्षों में जी.एस.एस. और के.वी.एस.एस के तहत 1500 कस्टम हायरिंग केंद्र, कृषि यंत्र बैंक और हाई टेक हब स्थापित करने के लिए 150 करोड़ रुपये की सब्सिडी दि जाएगी। इस मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23 में 600 कस्टम हायरिंग सेंटरों की स्थापना करने का लक्ष्य रखा गया है। उनका कहना है कि लक्ष्य के अनुरूप अब तक 500 हायरिंग केंद्र स्थापित करने की चयन प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
कस्टम हायरिंग केंद्र की स्थापना पर सब्सिडी के लिए जरुरी दस्तावेज:-
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