किसानो को धान की बुवाई पर सरकार से मिलेगी 4 हजार रुपए सब्सिडी लाभ

किसानो को धान की बुवाई पर सरकार से मिलेगी 4 हजार रुपए सब्सिडी लाभ
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किसानो को “मेरा पानी मेरी विरासत योजना” से होगी अधिक पैदावार, जल्दी करे आवेदन 

धान की सीधी बिजाई पर सब्सिडी :  देशभर के लगभग सभी हिस्सों में रबी फसलों की कटाई एवं गहाई का कार्य लगभग पूरा किया जा चुका है। इस समय किसानों के खेत खाली हो चुके हैं और कई किसानों द्वारा खेतों में जायद सीजन फसलों की बुवाई भी कर दी गई है। देश के अधिकतर हिस्सों में किसानों ने अपने खेत अभी खाली छोड़ रखे हैं। इन खाली खेतों में अब लगभग 2 महीनों के पश्चात खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई शुरू की जाएगी। खरीफ सीजन फसलों में मुख्य रूप से धान की बुवाई शुरू हो जाएगी। लेकिन पिछले कुछ सालों से देश के कई हिस्सों में लगातार गिरते भूजल स्तर ने कृषि क्षेत्र में सिंचाई की समस्या को बढ़ा दिया है। कई राज्यों में तो फसलों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी भी नहीं मिल रहा है। खरीफ सीजन फसलों की बुवाई के वक्त यह और भी बड़ी हो जाती है। ऐसे में हरियाणा सरकार ने कम पानी में धान के अच्छे उत्पादन के लिए एक अहम फैसला किया है। खरीफ फसलों की बुवाई में पानी की कोई दिक्कत न हो इसके लिए राज्य सरकार ने किसानों को धान की सीधी बिजाई करने पर 4 हजार रुपए प्रति एकड़ सब्सिडी देने का ऐलान किया है। आईये, ट्रैक्टरगुरु के इस लेख के माध्यम से हरियाणा सरकार की इसी पूरी योजना के बारे में विस्तार से जानते हैं। 

सब्सिडी के लिए किसान यहां कर सकते है संपर्क

हरियाणा में लगातार गिरते भू-जल स्तर ने किसानों के साथ-साथ सरकार की भी चिंता बढ़ा दी है। खरीफ सीजन फसलों की बुवाई के लिए किसानों को पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके। इसके लिए राज्य सरकार “मेरा पानी मेरी विरासत योजना” के अंतर्गत डीएसआर यानी धान की सीधी बिजाई विधि से बुवाई करने पर 4 हजार रुपए प्रति एकड़ की सब्सिडी दे रही है। इसके अलावा, धान सब्सिडी की खेती छोड़ने अन्य दूसरी फसलों की खेती करने पर भी सब्सिडी दी जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे गिरते भूजल के स्तर में सुधार होगा और भूमि की संरचना भी अच्छी होगी। इसके अलावा किसानों को कम पानी में अधिक पैदावार मिलेगी। दूसरी ओर कम पानी में ज्यादा से ज्यादा खेतों की सिंचाई संभव हो सके। इसके लिए किसानों को ड्रिप एवं स्प्रिंकलर इरिगेशन सिस्टम पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी भी दी जा रही है। अगर आप इन सभी पर मिलने वाली सब्सिडी का लाभ लेना चाहते हैं, तो मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, अपने जिला के कृषि विभाग से संपर्क कर पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

धान के स्थान पर अन्य फसलों की खेती के लिए दी गई थी सब्सिडी

“मेरा पानी मेरी विरासत” योजना के अंतर्गत हरियाणा सरकार ने पिछले खरीफ सीजन में गिरते भूजल स्तर से निपटने के लिए किसानों को धान की खेती छोड़ने एवं धान की सीधी बुवाई करने पर सब्सिडी देने का ऐलान किया था। इसके अलावा, धान की खेती छोड़कर दूसरी फसलों की खेती अपनाने पर भी सब्सिडी देने का फैसला किया गया था। इससे किसानों से मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर आवेदन मांगे गए थे। राज्य में जिन किसानों ने धान की खेती छोड़ दूसरी फसलों की खेती तथा धान की सीधी बुवाई की उन किसानों को कृषि अधिकारी एवं पटवारी द्वारा धान की सीधी बुवाई क्षेत्र की समीक्षा करने पर बाद सब्सिडी दी गई थी। सब्सिडी राशि किसानों के बैंक खाते में दी गई थी। 

बुवाई के दौरान 20 से 25 प्रतिशत तक पानी की बचत

हरियाणा सहित देश के विभिन्न राज्य में आने वाले महीनों में धान की बुवाई शुरू कर दी जाएगी। देश के अधिकतर राज्यों में धान की खेती परंपरागत तरीके से ही की जाती है। इसके लिए किसानों को पहले धान की नर्सरी तैयार करनी पड़ती है, जिसमें पानी की खपत कहीं अधिक होती है। इसके अलावा धान की तैयार नर्सरी की खेतों में रोपाई के दौरान भी काफी अधिक जल की आवश्यकता होती है। लेकिन धान की  परंपरागत बुवाई के स्थान पर सीधी बुवाई विधि से 20 से 25 प्रतिशत तक जल की बचत होती है। धान की सीधी बिजाई के लिए किसानों द्वारा धान के बीज को सीधे खेत में छिड़काव किया जाता है या सीड ड्रिल की मदद से बीजों को बोया जाता है। सीधी बिजाई से धान की खेती में लागत कम आती है और पानी भी कम लगता है तथा किसानों का समय भी बचता है। धान की सीधी बिजाई डीएसआर मशीन द्वारा की जा सकती हैं। बता दें कि हरियाणा राज्य में लगभग 13 लाख से अधिक हेक्टेयर के क्षेत्र में धान की फसल लगाई जाती है। 

धान की सीधी बिजाई से होने वाले फायदे

  • कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सीधी बिजाई से धान की खेती 20 से 25 प्रतिशत तक पानी की बचत हो सकती हैं। 
  • धान के खेतों की रोपाई के लिए नर्सरी तैयार नहीं करनी पड़ती है। 
  • खेतों की रोपाई में लेबर खर्च भी नहीं करना पड़ता है। 
  • सीधी बिजाई से धान की फसल की पैदावार बढ़ती है। 
  • नर्सरी रोपाई के लिए खेत में पलेवा करने के लिए अलग से पानी भी नहीं चलाना पड़ता है। 
  • नर्सरी डालने का खर्च भी बचता है। 
  • धान की दोनों ही विधि में 6 किलो बीज प्रति एकड़ ही लगता है। 
  • सीधी बिजाई से धान की बुवाई करने पर खेत की बार-बार जुताई पर पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ता है।  
  • धान की बिजाई के वक्त एक बार की सीड ड्रिल की मदद से जुताई और बुवाई एक साथ हो जाती है। 

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