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अनार की नई किस्म भगवा अनार : एक हेक्टेयर में 18 हजार किलो का उत्पादन

अनार की नई किस्म भगवा अनार : एक हेक्टेयर में 18 हजार किलो का उत्पादन
पोस्ट -26 अगस्त 2023 शेयर पोस्ट

अनार की नई किस्म : विदेशों में धूम मचा रहा भगवा अनार, किसान की हो रही लाखों में इनकम

अनार पर नई नई रिसर्च होती रहती है। नई और उन्नत किस्म के अनार को मार्केट में लाया जाता है। नई किस्मों का मार्केट में लंबे समय तक क्रेज रहता है। अमेरिका और विदेशों में खासकर इसकी डिमांड रहती है। विदेशों में भारतीय अनार की मांग लगातार बढ़ रही है और यह किसानों को मालामाल कर रही है। भगवा अनार की मांग में तेजी आने का एक बड़ा कारण इसकी यूनिकनेस है। यूएई, बांग्लादेश, नेपाल, नीदरलैंड, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, बहरीन, ओमान, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में भारतीय अनार की मांग में तेजी देखी जा रही है। अब अमेरिका ने भी भारतीय अनार की मांग दर्ज कराई है, जिसके बाद वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने 8 अगस्त को ताजा अनार की पहली खेप अमेरिका को भेजी है। अनार की बढ़ती मांग का भारतीय किसान काफी फायदा उठा सकते हैं।

New Holland Tractor

ट्रैक्टर गुरु की इस पोस्ट में भगवा अनार के बारे में, इसकी खेती के बारे में और निर्यात एवं मांग की जानकारी दे रहे हैं।

भारतीय अनार की मांग इन देशों में सबसे ज्यादा 

भारतीय अनार की सबसे ज्यादा मांग ऑस्ट्रेलिया में है, जिसके बाद अमेरिका में काफी ज्यादा मांग दर्ज की गई है। इसके अलावा यूएई, बांग्लादेश, नेपाल, नीदरलैंड, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, बहरीन, ओमान में भी भारतीय अनार की मांग सबसे ज्यादा देखने को मिलती है।

ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों के साथ अब अमेरिका भारतीय अनार के लिए एक नया बाजार साबित होगा और एपीडा राज्य सरकार के साथ मिलकर भी अनार के निर्यात और ज्यादा से ज्यादा उत्पादन की योजना पर चर्चा करेगी। इसके लिए भारतीय किसानों में अनार की खेती को लेकर जागरूकता पैदा करने के लिए कई कार्यक्रम भी रखेगी। 

किसानों को कितना होगा फायदा

भारतीय अनार की मांग बढ़ने से भारत के अनार उत्पादक किसानों को काफी फायदा होगा। निर्यात से वस्तु का मूल्य बढ़ता है और इस श्रृंखला में न सिर्फ बहुत लोगों को रोजगार मिलता है। बल्कि इससे किसानों के उत्पाद की भी मांग बढ़ती है और उन्हें ज्यादा कीमत मिलती है। हाल ही में अमेरिका ने अनार की मांग दर्ज कराई है। अमेरिका में भारतीय अनारों की कीमत काफी ज्यादा मिलती है। एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने बताया कि अमेरिका में अनार के निर्यात से ज्यादा कीमत मिलेगी और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। अनार के आयातकों से उत्साहजनक प्रक्रिया देखने को मिली है। 

क्या है भगवा अनार की खासियत

भगवा अनार, लाल अनार से कई मामलों में बेहतर माना जा रहा है क्योंकि यह अनार लोगों में बीमारियों की प्रति न सिर्फ जबरदस्त इम्यून सिस्टम बनाने में सहायक है बल्कि यह काफी स्वादिष्ट भी होता है। इसे खाने वाले उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक देखने को मिली है। भगवा अनार अपनी उच्च एंटीऑक्सीडेंट सामग्री और स्वाद के गुणों की वजह से विदेशी मार्केट में लगातार फेमस हो रहा है। इस किस्म के फल बड़े आकार के होते हैं और भगवा रंग के होते हैं। चिकने और चमकदार होते हैं।

भारत में कहां सबसे ज्यादा होता है अनार की खेती

भगवा अनार की सबसे ज्यादा खेती महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में होती है। महाराष्ट्र का यह जिला अनार के बंपर उत्पादन के लिए जाना जाता है। भारतीय अनार निर्यात में 50% योगदान महाराष्ट्र का यह जिला देता है। एपीडा देश में अन्य संभावित क्षेत्रों में अनार की खेती पर बल दे रही है ताकि निर्यात के मांग को ज्यादा से ज्यादा पूरा किया जा सके और किसानों की आय में वृद्धि हो सके। साल 2022-23 की बात करें तो यूएई, बांग्लादेश, नेपाल, नीदरलैंड, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, बहरीन, ओमान, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में भारत ने 58.36 मिलियन यूएस डॉलर मूल्य के 62,280 मीट्रिक टन अनाज का निर्यात किया है। अनार के उत्पादन में भारत दुनिया भर में 7वें स्थान पर है। वहीं अनार की खेती के कुल रकबे की बात करें तो यह रकबा करीब 2 लाख 75 हजार हेक्टेयर के आसपास है। भारत के प्रमुख अनार उत्पादक राज्यों में सबसे पहले महाराष्ट्र और उसके बाद गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और आंध्रप्रदेश जैसे राज्य हैं।

अनार की खेती कैसे करें

अनार के फल की ज्यादा मांग को देखते हुए कई किसान अनार की खेती करना चाहते हैं। अनार एक महत्वपूर्ण फसल है, जिसका उत्पादन शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्रों में होता है। अनार ठंड में 10 डिग्री से नीचे तापमान को भी सह लेता है और इस फसल की खासियत है कि यह 48 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी जीवित रह सकती है। हालांकि अगर तापमान ज्यादा हो तो फलों की गुणवत्ता बेहतर होती है। इससे फलों में मिठास बढ़ती है और फल ज्यादा रेट में बिकते हैं। वहीं अगर तापमान कम होता है या बारिश का समय होता है तो इस समय पौधों की खास देख रेख की जरूरत पड़ती है क्योंकि इससे फलों की क्वालिटी पर असर पड़ता है और फंगल रोगों का असर बढ़ता है। चलिए इस फल की खेती करने से जुड़े सभी पहलुओं को समझते हैं।

मिट्टी

अनार के उत्पादन के लिए अच्छी जल निकासी वाली, बलुई दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है। मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ ज्यादा हो तो फसल का उत्पादन भी ज्यादा होता है। मिट्टी के पीएच मान की बात करें तो मिट्टी का पीएच 6.5 से 7.5 के बीच रहे तो उचित होता है। 

सिंचाई

अनार की फसलों के लिए ड्रिप या छिड़काव वाली सिंचाई ज्यादा फायदेमंद होती है। बुआई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें, जिसके बाद गर्मियों में हर 7 दिन पर सिंचाई करें और सर्दियों में 15 से 20 दिन पर सिंचाई करना फायदेमंद हैं।

भगवा अनार की उपज और उससे कमाई

उपज की बात करें तो यह वैरायटी किसानों को प्रति पौधा 30 से 38 किलोग्राम की उपज दे सकती है। भगवा अनार सबसे ज्यादा उपज देने वाली अनार की किस्म है। प्रति हेक्टेयर 600 पौधे लगाए जा सकते हैं। इस प्रकार प्रति हेक्टेयर कुल उपज की बात करें तो 18000 किलोग्राम की उपज की जा सकती है। और किसान इसे थोक भाव में व्यापारी को भी बेचते हैं तो प्रति किलो 50 से 60 रुपए तक ले सकते हैं। इस प्रकार अनार की खेती से प्रति हेक्टेयर लगभग 10 लाख रुपए सालाना कमाई की जा सकती है। अगर 3 लाख रुपए लागत और श्रम के कम भी कर दें तो किसान को 7 लाख रुपए सालाना शुद्ध मुनाफा हो सकता है।

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