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लाख की खेती : 50 लाख से अधिक किसानों को मिला रोजगार, हो रही है लाखों की कमाई

लाख की खेती : 50 लाख से अधिक किसानों को मिला रोजगार, हो रही है लाखों की कमाई
पोस्ट - November 02, 2022 शेयर पोस्ट

लाख की वैज्ञानिक खेती के लिए माध्यम से महिला किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास

झारखंड सरकार राज्य में आर्थिक रूप कमजोर वर्ग को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य में लाख, बागवानी और वोनपज को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए सरकार महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना को चला रही है। इस योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में लाख, बागवानी और वोनपज को बढ़ावा देने पर कार्य किया जा रहा है। लाख की खेती के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों मे महिला किसानों को सशक्त बनाने के लिए प्रोत्साहित भी किया जा रहा है। ग्रामीण महिलाओं को महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना और जोहार परियोजना का लाभ दिया दिया जा रहा है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की ये महिला किसान लाख की खेती के जरिए बेहतर आजीविका की ओर बढ़ रही हैं। इसकी खेती से महिलाएं न केवल अच्छी आय अर्जित कर रही हैं, बल्कि राज्य में लाख उत्पादन के आंकड़ों में भी बदलाव ला रही हैं। बता दें कि लाख उत्पादन में झारखंड पहले स्थान पर आता है। यहा हर साल 15 से 16 हजार टन लाख का उत्पादन होता है। लाख (लाह) झारखंड के ग्रामीण आदिवासी लोगों की आमदनी का एक अहम जरिया है। यहां की आदिवासी महिलाएं लाख की खेती से आत्मनिर्भर बनी है और लाखों की कमाई ले रही हैं, सरकारी आंकडों के मुताबिक वर्तमान में लाख की खेती से झारखंड के 11 जिलों के 50 लाख से ज्यादा किसानों को रोजगार मिल रहा है। तो चलिए ट्रैक्टरगुरू के इस लेख के माध्यम से इस खबर के बारे में विस्तार से जानते है।

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महिला किसानों को किया जा रहा है प्रोत्साहित 

झारखंड में ग्रामीण महिलाओं को वनोपज आधारित आजीविका से जोड़कर आय में वृद्धि करने का उद्देश्य महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना के माध्यम से क्रियान्वित किया गया है। लाह की खेती के लिए महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना तथा जोहार परियोजना के तहत आदिवासी महिला किसानों को वैज्ञानिक तरीके से लाख की खेती सिखाई जाती है। ग्रामीण महिला किसानों को लाख यानि लाह उत्पादन हेतु तकनीकी जानकारी एवं प्रशिक्षण के साथ-साथ उत्पादों की बिक्री हेतु बाजार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। किसान उत्पादक समूहों के माध्यम से सामूहिक खेती और लाह की बिक्री की व्यवस्था की गई है। महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना के जरिए अब तक राज्य के 73 हजार से अधिक आदिवासी ग्रामीण परिवारों को लाह यानि लाख की वैज्ञानिक खेती से जोड़ा गया है, जिनमें से अधिकांश परिवार बहुत गरीब और वन क्षेत्रों के पास रहने वाले हैं। उनके द्वारा इस वर्ष लगभग 2000 मीट्रिक टन स्क्रैप लाह का उत्पादन किया गया है।

लाख की खेती से सालाना लाखों की आमदनी 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जोहार परियोजना के अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशनल सोसाइटी द्वारा ग्रामीण महिलाओं को लाख की आधुनिक खेती के लिए प्रशिक्षण दिया गया है, इसके जरिए उनकी आय बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। आज झारखंड के करीब 73 लाख से अधिक परिवार इन दोनों परियोजना से जुड़े हुए हैं और लाख की खेती कर सालाना 3 लाख रुपये की आमदनी ले रहे हैं। ग्रामीण स्तर पर लाह किसानों की मदद के लिए चयनित क्षेत्रों में महिलाओं को आजीविका वनोपज मित्र के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। आजीविका वनोपज मित्रा लाख की वैज्ञानिक खेती में ग्रामीण परिवारों की मदद करती है। वैज्ञानिक लाख की खेती राज्य के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन को बदल रही है। राज्य में महिलाओं को ट्रेनिंग देने के लिए झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी सहायक बनकर उभरी है।

राज्य भर में संग्रहण केंद्र एवं ग्रामीण सेवा केंद्र संचालित किए जा रहे हैं

रिपोर्ट् के मुताबिक राज्य में किसानों को लाख की खेती के लिए सिर्फ ट्रेनिंग ही नहीं दी जा रही, बल्कि साथ पर उन्हें लाख की बिक्री के लिए सही दाम और बाजार भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। लाख किसानों को उचित बाजार उपलब्ध कराने और उनकी फसलों की बिक्री के लिए पूरे राज्य भर में 460 संग्रहण केंद्र और 25 ग्रामीण सेवा केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन संस्थाओं को आजीविका वनोपज मित्र के रूप प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाओं द्वारा संचालित किया जा रहा है। इन संस्थाओं के माध्यम से लाख की खेती करने वाले किसान अपनी पैदावार एक स्थान पर एकत्र करते हैं और फिर एकत्रित पैदावार को ग्रामीण सेवा केंद्र के माध्यम से सही दाम पर बाजार में  बेचा जाता है। यही कारण है कि ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं का मुनाफा पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ गया है। 

लाख की खेती विलुप्त होने की कगार पर थी

बता दें कि झारखंड में पहले लाह यानि लाख की खेती पारंपरिक तरीके से की जाती थी, जो लगभग विलुप्त होने की कगार पर थी। यहां जंगल और वन क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं लाख की खेती करके रोजगार कमा रही हैं। लेकिन पहले लाख के उत्पादन को बाजार में बचने का उचित साधान और पर्याप्त ज्ञान न होने के कारण यहा के जंगल और बन क्षेत्रों में रहने वाले लोग रोजगार के लिए शहरों की तरफ पलायन करते थे। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए झारखंड सरकार ने लाख की खेती की अपार संभावनाएं को देखते हुए महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना और जौहर परियोजना चलाई है। इन परियोजनाओं के तहत ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं को वैज्ञानिक तरीके से लाख की खेती के लिए ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशनल सोसाइटी द्वारा ग्रामीण महिलाओं प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जहां पहले इन महिलाओं को रोजगार के लिए शहरों की तरफ पलायन करना होता था। वहीं आज ट्रेनिंग लेकर गांव में ही लाख की खेती कर आजीविका कमा रही हैं। ऐसे में लाख की फसल महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है।

लाख की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रही है रंजीता

झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशनल सोसाइटी के अधिकारियों के मुताबिक पश्चिमी सिंहभूम के गोइलकेरा प्रखंड के रुमकूट गांव की रंजीता देवी पिछले कुछ वर्षों से आधुनिक तकनीक के माध्यम से वैज्ञानिक पद्धति से लाह की खेती कर रही हैं। रंजीता देवी बताती है कि उन्होंने लाह की आधुनिक और वैज्ञानिक खेती के लिए आजीविका संवर्धन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) समर्थित संचित सखी मंडल से 25 दिनों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद इसके बाद लाह की उन्नत खेती करना शुरू किया। अब वो लाख की खेती से सालाना तीन लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं। साथ ही गांव की अन्य महिलाओं को प्रशिक्षित कर लाख की उन्नत खेती के लिए प्रेरित भी कर रही है।

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