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झारसिम मुर्गी की नस्ल से किसानों की आय में होगी दोगुना वृद्धि

झारसिम मुर्गी की नस्ल से किसानों की आय में होगी दोगुना वृद्धि
पोस्ट -11 जून 2023 शेयर पोस्ट

जानें, झारसिम नस्ल की मुर्गी की मुख्य विशेषता, अंडा उत्पादन और कमाई वृद्धि

देश के पशुपालक किसानों के बीच मुर्गीपालन एक प्रसिद्ध व्यवसाय है। देश में लाखों की संख्या में किसान मुर्गीपालन करते हैं। मुर्गीपालन एक ऐसा व्यवसाय है, जिससे अंडा, मांस और खाद तीनों का उत्पादन होता है। देश में लगातार पशुपालन अनुसंधान संस्थान में पशुओं की नई-नई विकसित प्रजाति को लेकर अनुसंधान किए जाते हैं। मुर्गियों की प्रजाति पर भी कई प्रकार के अनुसंधान किए गए जिसके परिणाम स्वरूप देश में मुर्गियों की कई उन्नत नस्लें विकसित हुई है। इन्हीं उन्नत नस्लों और प्रजातियों में से एक है, झारसिम प्रजाति। ये उन्नत प्रजाति झारखंड में विकसित हुई है। यही वजह है कि इसका नाम झार और सिम से बना है। ये मुर्गियों की एक ऐसी प्रजाति है जो किसानों की आय को दो से ढाई गुना तक बढ़ा सकती है।

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ट्रैक्टर गुरु की इस पोस्ट में हम मुर्गी की झारसिम प्रजाति, उत्पादन , कमाई, खासियत आदि की जानकारी दे रहे हैं।

कैसे मिली सफलता 

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के रांची वेटनरी कॉलेज के वैज्ञानिक डॉ सुशील प्रसाद ने करीब 7 साल पहले मुर्गी की झारसिम प्रजाति को विकसित करने में सफलता पाई। ये देश की अब तक की सबसे उन्नत प्रजातियों में से एक बनी हुई है। खासकर वैसे किसानों के लिए जो मांस और अंडा दोनों का अच्छा उत्पादन प्राप्त करना चाहते हैं। झारसिम प्रजाति मांस, अंडा और खेती के लिए खाद तीनों पर्याप्त मात्रा में दे सकती है। जो किसान मुर्गीपालन की योजना बना रहे हैं, मुर्गी के इस बेहतरीन किस्म को पालने के बारे में सोच सकते हैं। मुर्गी पालन के क्षेत्र में यह बेहतरीन खोज है। सात साल पहले ही इस प्रजाति को जारी करने की अनुमति आईसीएआर यानी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली से मिल गई। आज झारखंड और आसपास के राज्यों में बड़ी मात्रा में किसान झारसिम मुर्गी का पालन कर मुनाफा कमा रहे हैं।

कितना हो रहा है किसानों को फायदा

वैसे किसान जो सामान्य मुर्गियों का पालन करते हैं उनकी तुलना में झारसिम प्रजाति की मुर्गियों का पालन करने वाले किसान डेढ़ से दो गुना अधिक आय कर पा रहे हैं। झारसिम प्रजाति राज्य के मुर्गीपालकों के लिए वरदान साबित हुई। 

अंडा उत्पादन तीन गुना ज्यादा

कई किसान सिर्फ अंडों के लिए ही मुर्गीपालन करते हैं। यह मुर्गी साल में 180 से ज्यादा अंडे देने में सक्षम है जबकि सामान्य देशी मुर्गियों को देखा जाए तो वे मुर्गियां 50 से 60 अंडे देने में ही सक्षम होती है। इस तरह किसानों को अंडा उत्पादन के मामले में तीन गुना फायदा हो रहा है।

मांस उत्पादन डेढ़ गुना ज्यादा

मांस उत्पादन के मामले में भी सामान्य देशी मुर्गियों की अपेक्षा यह प्रजाति डेढ़ गुना ज्यादा उत्पादन कर पाती है। सामान्य देशी मुर्गी की प्रजाति जहां सालभर में 1 किलो वजन बढ़ा पाती है। वहीं झारसिम प्रजाति सवा से डेढ़ किलो वजन बढ़ा पाती है। इस प्रकार मांस उत्पादक किसानों के लिए भी मुर्गी की यह किस्म बेहतरीन विकल्प है। बता दें कि झारसिम प्रजाति की मुर्गियों का विकास झारखंड की देसी मुर्गियों पर किए गए प्रयोग से ही हुआ है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता भी सर्वश्रेष्ठ

झारसिम प्रजाति की मुर्गियां न सिर्फ अंडा और मांस के उत्पादन के मामले में सर्वश्रेष्ठ हैं, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता के मामले में भी इसका बहुत ही अच्छा प्रदर्शन रहा है। देसी प्रजाति की तुलना में इस मुर्गी की रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा है। बाहर चर कर भी ये मुर्गियां अपना भोजन पूरा कर लेती है। इसे रोग लगने की बेहद कम संभावना रहती है।

झारसिम प्रजाति के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए चार्ट

झारसिम प्रजाति की मुर्गियों के बारे में विस्तृत जानकारी को एक नजर में समझने के लिए कृपया इस चार्ट को देखें।

प्रजाति का नाम  झारसिम
किसने विकसित किया बिरला कृषि विश्वविद्यालय द्वारा
परिपक्व होने पर मुर्गी का भार 1.6 किलोग्राम से 1.8 किलोग्राम तक
अंडे देने की क्षमता 170 से 180 अंडे
अंडे का भार 52 से 55 ग्राम
पहली बार अंडा देने की आयु 175 से 180 दिन

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