अंतरिम बजट 2024 : केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी यानी गुरूवार को लोकसभा में अंतरिम बजट 2024-25 पेश किया। इस अंतरिम बजट में कृषि क्षेत्र काफी फोकस किया है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए एग्रीकल्चर सेक्टर को 1.27 लाख करोड़ रुपए दिए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 2 प्रतिशत यानी 2 हजार करोड़ रुपए अधिक है। सरकार ने पिछले साल कृषि (एग्रीकल्चर) बजट के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए दिए थे। अपने बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस अंतरिम बजट में किसानों के लिए किसी प्रकार की कोई नई बड़ी योजना की घोषण नहीं किया गया है। फिलहाल, किसान हित के लिए संचालित पुरानी योजनाओं को ही आगे बढ़ाया जा रहा है। केंद्रीय वित्तमंत्री ने कहा कि नैनो यूरिया को सफलतापूर्वक अपनाए जाने के बाद सभी कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभिन्न फसलों पर नैनो डीएपी को अपनाया जाएगा। साथ ही डेयरी किसानों को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक कार्यक्रम बनेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है परंतु देश में दुधारू पशुओं की दुग्ध उत्पादकता कम है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय पशुधन मिशन, राष्ट्रीय गोकुल मिशन और डेयरी प्रसंस्करण एवं पशुपालन के लिए अवसंरचना विकास निधि जैसी मौजूदा योजनाओं की सफलताओं पर आधारित होगा। वहीं, चुनावी वर्ष होने के चलते इस वर्ष किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत दी जाने वाली राशि को बढ़ाये जाने की उम्मीद थी, जो इस अंतरिम बजट में पूरी नहीं हुई है।
अंतरिम बजट 2024-25 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश में मत्स्य क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए 5 इंटीग्रेटेड एक्वापार्क की स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश में मछली के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। मछुआरों की सहायता करने हेतु मत्स्य क्षेत्र के लिए एक अलग विभाग की स्थापना की गई है। जिसके बाद देश में अन्तर्देशीय उत्पादन दोगुना हो गया है। साल 2013-14 से सी-फूड का निर्यात भी दोगुना हो गया है। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना से 38 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं और रोजगार के 10 लाख अवसरों का सृजन हुआ है। अंतरिम बजट 2024 में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कई है। इसके लिए पीएम मत्स्य संपदा योजना के क्रियान्वयन को बढ़ावा देने की घोषणा की गई है। उन्होंने कहा कि देश में एक्वाकल्चर उत्पादकता को प्रति हेक्टेयर 3 टन से बढ़ाकर 5 टन किया जाएगा। इसके साथ ही निर्यात को भी दोगुना कर 1 लाख करोड़ रुपए तक पहुँचाने और निकट भविष्य में 55 लाख रोजगार अवसरों का सृजन करने के लिए पीएम मत्स्य संपदा योजना के कार्यान्वयन को बढ़ावा दिया जाएगा। ब्लू इकॉनोमी 2.0 के लिए जलवायु अनुकूल मछली पालन के कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा।
मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरिम बजट 2024-25 में कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्द्धन और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कदम उठाने का वादा किया है। उन्होंने कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की तीव्र वृद्धि को सुनिश्चित करने के लिए समावेशी, आधुनिक भंडारण, पर्याप्त आपूर्ति श्रृंखला, प्राथमिक और द्वितीयक प्रसंस्करण एवं विपणन और ब्रांडिंग सहित फसल कटाई के पश्चात की गतिविधियों में निजी और सार्वजनिक निवेश को भविष्य में बढावा देने का वादा किया। केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि तिल, सोयाबीन सूरजमुखी, सरसों और मूंगफली, जैसे तिलहनों के संबंध में ‘आत्मनिर्भरता’ प्राप्त करने के लिए कार्यनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए अधिक उपज देने वाली किस्मों के लिए अनुसंधान, आधुनिक कृषि तकनीकों को व्यापक पैमाने पर अपनाने, बाजार संपर्कों, खरीद, मूल्य-वर्धन और फसल बीमा को शामिल किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि–क्षेत्र समावेशी, संतुलित, उच्चतर संवृद्धि और उत्पादकता की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को कृषक–केंद्रित नीतियां लाकर, किसानों को उनके आय अर्जन में सहायता देकर, कीमत और बीमा के माध्यम से जोखिम कवरेज देकर, स्टार्ट–अप के माध्यम से प्रौद्योगिकी और नवाचारों को बढ़ावा देकर सुगम किया गया है। वित्तमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (eName) ने 13,61 मंडियों को एकीकृत किया गया है। इससे तीन लाख करोड़ रुपए मूल्य का कारोबार हो रहा है और 1.8 करोड़ किसानों को सेवाएं मिल रही हैं। वित्तमंत्री ने कहा कि मूलभूत आवश्यकताओं के इन प्रावधानों ने ग्रामीण क्षेत्रों में वास्तविक आय में वृद्धि की है। किसानों की आर्थिक आवश्यकताओं का समाधान निकाला है और इस प्रकार से यह उपाय कृषि क्षेत्र में निरंतर वृद्धि करते हुए रोजगारों का सृजन कर रहे हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट करते हुए कहा कि किसानों का कल्याण और ग्रामीण मांग को बढ़ाना अंतरिम बजट की प्रमुख विशेषताओं में से एक है। अन्नदाता के उत्पाद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में उचित रूप से समय-समय पर वृद्धि की गई है। पीएम किसान सम्मान योजना का देशभर के अन्नदाता लाभ पा रहा हैं। पीएम-किसान सम्मान योजना के अंतर्गत हर वर्ष लगभग 11.8 करोड़ किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जबकि पीएम फसल बीमा योजना के अंतर्गत 4 करोड़ किसानों को फसल बीमा प्रदान किया गया है। वित्तमंत्री ने कहा कि कई अन्य दूसरे कार्यक्रमों के माध्यम से ‘अन्नदाता’ को देश और पूरी दुनिया के लिए अन्न पैदा करने में आर्थिक सहायता दी जा रही है।
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