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भैंस की इस नस्ल पर सरकार देती है बंपर सब्सिडी, दूध उत्पादकता 30 लीटर प्रतिदिन

भैंस की इस नस्ल पर सरकार देती है बंपर सब्सिडी,  दूध उत्पादकता 30 लीटर प्रतिदिन
पोस्ट -17 अक्टूबर 2023 शेयर पोस्ट

डेयरी फार्मिंग के लिए करें इस नस्ल की भैंस का पालन, दूध उत्पादकता 30 लीटर प्रतिदिन, सरकार भी देती है सब्सिडी

Murrah Buffalo : देश में खेती के साथ पशुपालन की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले अधिकांश परिवार खेती के साथ पशुपालन का काम करते हैं और इनसे प्राप्त दूध तथा अन्य उत्पादों का कारोबार कर अपनी आजीविका चलाते हैं। आज पशुपालन के कारोबार से अधिक लाभ कमाने के लिए हमारे किसान भाई अधिक दुग्ध उत्पादन देने वाली देशी-विदेशी नस्ल की गाय-भैंसों का पालन कर रहे हैं। किसान गायों की तुलना में भैंस का पालन करना अधिक पंसद करते हैं, क्योंकि गाय के मुकाबले भैंस अधिक दूध देती है और इसका दूध गाढ़ा भी होता है। इन्हीं कारण से डेयरी फार्मिंग के लिए भैंसों का पालन किसानों द्वारा अधिक किया जाता है। आज देश के कई राज्यों में भैंस की कई ऐसी नस्ल मौजूद है, जो अधिक दूध उत्पादकता करने में सक्षम है। भैसों की इन्हीं नस्ल में मुर्रा नस्ल की भैंस भी शामिल है। भैंस की यह नस्ल अन्य नस्ल के मुकाबले ज्यादा दुग्ध उत्पादन करती है। वहीं, हरियाणा, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और बिहार राज्य की सरकारें भैंस की मुर्रा नस्ल के पालन करने पर अपने अपने तय प्रावधानों के अनुसार किसानों को 40-50 प्रतिशत तक सब्सिडी भी देती है। अगर आप भी डेयरी  उद्योग के लिए अधिक दूध देने वाली अच्छी नस्ल की भैंस का पालन करने की सोच रहे हैं, तो भैंस की मुर्रा प्रजाति का पालन कर सकते हैं। इस पोस्ट में हम आज आपको भैंस की मुर्रा नस्ल के बारे में जानकारी देंगे।

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भैंस की मुर्रा नस्ल (Murrah Breed Buffalo)

डेयरी फार्मिंग कारोबार में पशुपालक भैंस की मुर्रा नस्ल के पालन को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि मुर्रा नस्ल की भैंस ज्यादा दूध देने वाली नस्ल है। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग बड़ी संख्या में भैंस की मुर्रा नस्ल का पालन करते हैं और इसके दूध से काफी अच्छा मुनाफा कमाते हैं। मुर्रा नस्ल भैंस की दूध उत्पादन क्षमता अन्य नस्ल की भैंसों से कहीं ज्यादा होती है। जहां भैंस की सामान्य नस्ल 8 से 10 लीटर दूध का उत्पादन प्रतिदिन करती है। वहीं, भैंस की मुर्रा नस्ल 20-25 लीटर दूध प्रतिदिन देती है। अगर, इसकी अच्छी से देखभाल और खानपान का बेहतर ध्यान रखा जाए, तो इसके दूध उत्पादन क्षमता को 30 लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाया जा सकता है। मुर्रा नस्ल की भैंस का पालन मुख्य रूप से हरियाणा, पंजाब के नाभा व पटियाला, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के पशुपालकों द्वारा किया जाता है। मुर्रा भैंस की नस्ल की कीमत कई लाख रुपए तक होती है। भैंस की मुर्रा नस्ल का वजन सामान्य नस्ल की भैंस से अधिक होता है। यह दिखने में काफी आकर्षक होती है। मुर्रा नस्ल की भैंस का सिर छोटा, सिर पर सींग घुमावदार और पूंछ लंबी होती है। इसके पूंछ और पैर पर सुनहरे रंग के बाल और कलर स्याह काला होता है। मुर्रा नस्ल की भैंस की गर्भावधि लगभग 310 दिनों की होती है। 

मुर्रा भैंस खरीदने पर 50 प्रतिशत सब्सिडी देती है मध्यप्रदेश सरकार

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग मध्यप्रदेश द्वारा मुर्रा नस्ल की भैंस के पालन के लिए किसानों और पशुपालकों को समय-समय पर आर्थिक मदद दी जाती है। हरियाणा की मुर्रा नस्ल की खरीद करने पर सरकार द्वारा सामान्य वर्ग के किसानों को 50 फीसदी और एससी-एसटी वर्ग के लिए 75 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जाती है। मुर्रा नस्ल की भैंस पर सब्सिडी देने का उद्देश्य राज्य में दूध उत्पादकता को बढ़ाना और रोजगार के नये अवसर प्रदान करना है। अगर पशुपालक मुर्रा नस्ल की भैंस पर सब्सिडी का लाभ लेना चाहते हैं, तो मध्य प्रदेश पशुधन विकास निगम की वेबसाइट पर पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा अपने जिला के पशु पालन विभाग के कार्यालय में जाकर संबंधित अधिकारियों से भी सपंर्क कर सकते हैं।

गाय-भैंस की डेयरी उद्योग लगाने पर हरियाणा सरकार देती है 50 प्रतिशत की सब्सिडी

हरियाणा में छोटे किसानों और पढ़े-लिखे युवक-युवतियों को हाईटेक और मिनी डेयरी उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाता है। इसके लिए हरियाणा सरकार हाईटेक और मिनी डेयरी योजना के अतंर्गत 10 दुधारू गाय-भैंसों की मिनी डेयरी लगाने पर लाभार्थियों को लागत खर्च पर 25 प्रतिशत की सब्सिडी और 20 से अधिक दुधारू पशुओं की डेयरी खोलने पर ब्याज में छूट भी प्रदान करती है। इसके अलावा, योजना के अतंर्गत अनुसूचित जाति और जनजाति के लाभार्थियों को 3 गाय-भैंसों की डेयरी स्थापित करने के लिए 50 प्रतिशत की सब्सिडी और 20 अधिक दुधारू पशुओं की हाईटेक डेयरी लगाने पर ब्याज में छूट सरकार की ओर से दी जाती है। सरकार की इस योजना के अतंर्गत गाय-भैंसों की डेयरी स्थापित कर सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए आवेदक को पशुपालन एवं डेयरी विभाग, हरियाणा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन करना होगा। इच्छुक आवेदक संबंधित जानकारी भी वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा अपने जिला के पशुपालन विभाग से संपर्क भी कर सकते हैं। 

बिहार में पशुपालकों को 50 से 75 प्रतिशत तक अनुदान

कृषि क्षेत्र में जोखिमों को बढ़ता देख बिहार सरकार किसानों को खेती के साथ पशुपालन क्षेत्र से जोड़ने का प्रयास कर रही है। इसके लिए पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग बिहार सरकार द्वारा राज्य में समग्र गव्य विकास योजना चलाई जा रही है। जिसमें सभी वर्गों के भूमिहीन किसान/दुग्ध उत्पादक संगठन/शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों  को 2 एवं 4 दुधारू पशुओं की डेयरी खोलने पर 50 से 75 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है। समग्र गव्य विकास योजना के अतंर्गत एससी-एसटी, ओबीसी वर्ग के लाभार्थियों को 2 एवं 4 दुधारू गाय-भैंसों की खरीदारी कर पालन करने पर 75 प्रतिशत और सामान्य वर्ग के लोगों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी सरकार की ओर से दी जाती है। साथ योजना के तहत लाथार्थियों को लोन-बीमा जैसी कई सुविधा भी डेयरी की स्थापना के लिए दी जाती है। सरकार की इस योजना का लाभ राज्य के सभी वर्ग के भूमिहीन किसान/दुग्ध उत्पादक संगठन/शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियां  उठा सकते हैं। योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए इच्छुक लाभार्थी पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग बिहार सरकार की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। इसके अलावा, अपने जिला के पशुपालन विभाग से भी संपर्क कर सकते हैं। 

उत्तर प्रदेश में गाय-भैंस पालने पर 40 प्रतिशत की सब्सिडी

उत्तर प्रदेश में किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए नंद बाबा मिशन संचालित है। इसके तहत पूरे राज्य में गौ संवर्धन योजना का संचालन कर गाय-भैंसों का पालन करने पर किसानों और पशुपालकों को 40 हजार रुपए या 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। सरकार की इस योजना लाभ राज्य में सभी वर्ग के लोग उठा सकते हैं। इस योजना उद्देश्य प्रदेश में डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने और स्वदेशी नस्ल की गाय-भैंसों के सुधार के प्रति किसानों का रुझान बढ़ाना है। आधिकारिक बयानों के मुताबिक इस योजना के अंतर्गत प्रदेश में ज्यादा दूध देने वाली देशी नस्ल की गायों की खरीद करने पर परिवहन, यात्रा के दौरान गाय का बीमा और किसान के पास आने के बाद गाय का बीमा कराने सहित विभिन्न मदों पर खर्च होने वाली राशि प्रदेश सरकार स्वयं वहन करती है। योजना के तहत गाय-भैंसों का पालन कर सब्सिडी का लाभ लेने के लिए किसानों को अपने जिला के पशुपालन विभाग से संपर्क करना होगा।

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