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ब्लू बेरी की खेती : एक एकड़ खेत से किसानों को मिलेगी 60 लाख रुपए की कमाई

ब्लू बेरी की खेती : एक एकड़ खेत से किसानों को मिलेगी 60 लाख रुपए की कमाई
पोस्ट -28 अगस्त 2023 शेयर पोस्ट

अमेरिकन ब्लू बेरी : किसान एक हजार रुपए प्रति किलो रेट से बिकने वाली इस फसल की खेती से हो जाएंगे मालामाल

किसान पारंपरिक फसलों की खेती से हटकर ब्लू बेरी की खेतीकर एक एकड़ क्षेत्र से 60 लाख रुपए तक की कमाई कर सकते हैं। इसकी फसल इंटरनेशनल बाजारों में बिकती है। भारत में इसकी उपज प्रति किलो 1 हजार रुपए तक बिकती है। अगर किसान इसकी खेती करते हैं, तो उन्हें खेती से तगड़ा मुनाफा होगा और उनकी आय में भी इजाफा होगा। 

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blueberry farming : एक बार बुवाई के बाद 10 साल तक मिलेगा उत्पादन, बाजार भाव एक हजार रुपए किलो

blueberry Crop : देश में अब किसान परंपरागत खेती के स्थान पर नई तकनीकों से अलग तरह की फसलों की खेती का प्रयोग कर रहे हैं। आज कई राज्यों के किसान ट्रेडिशनल फसलों की खेती के साथ अलग-अलग तरह की नई-नई फसलों की खेती में भी अपने हाथ आजमा रहे हैं। किसान न सिर्फ अलग तरह की फसलों की खेती कर रहे हैं, बल्कि इससे लाखों रुपए तक का मुनाफा भी कमा रहे हैं। इन सबमें सरकारें भी किसानों की हर संभव मदद विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कर रही है। इस तरह के प्रयोग से बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों के किसानों की आय में इजाफा भी हुआ है और उनकी आर्थिक स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है। ऐसे में आज हम हमारे किसान भाईयों के लिए एक ऐसी फसल की खेती की जानकारी लेकर आए हैं। जिसकी एक एकड़ क्षेत्र में खेती कर किसान भाई करीब 60 लाख रुपए तक की कमाई कर सकते हैं। खास बात यह है कि इस फसल की कीमत बाजार में एक हजार रुपए प्रति किलो तक आसानी से मिलती है। आईए, इस खास फसल की खेती बारे में जानते हैं। 

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किसान ब्लू बेरी के उत्पादन से कमा रहे लाखों रुपए का मुनाफा

हम जिस फसल की खेती के बारे में बात कर रहे हैं वह अमेरिकन ब्लूबेरी (American Blueberry) है। यह एक ऐसी फसल है, जिसकी एक बार बुवाई करके किसान 10 साल तक ब्लूबेरी का उत्पादन ले सकते हैं। अमेरिकन ब्लूबेरी (American Blueberry) में कई सारे पोषक तत्व और विटामिन्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसका सेवन से मानव स्वास्थ्य को कई फायदे होते हैं। अमेरिकन ब्लूबेरी को सुपरफूड भी कहा जाता है। जिसके कारण इंटरनेशल मार्केट में इसकी तगड़ी डिमांड रहती है। वहीं, भारत में इसकी फसल एक हजार रुपए प्रति किलो तक बाजार में बिकती है। आमतौर भारत में किसान ब्लूबेरी की खेती नहीं करते हैं। जिसकी वजह से भारत में इसका आयात किया जाता है। लेकिन अब देश के कई इलाकों में किसान ब्लूबेरी (Blueberry) के उत्पादन से लाखों रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं। 

ब्लूबेरी फसल से 60 लाख रुपए तक की कमाई प्रति एकड़

ब्लूबेरी की खेती से किसानों की कमाई कई गुना तक बढ़ सकती है। यदि किसान अमेरिकन ब्लूबेरी (American Blueberry) खेती एक एकड़ जमीन क्षेत्र में करते हैं, तो इसके उत्पादन से उन्हें करीब 60 लाख रुपए तक की कमाई हो सकती है। महाराष्ट्र के महाबलेश्वर के पंचगनी के एक किसान द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, उन्होंने पारंपरिक फसलों के स्थान पर अमेरिक ब्लूबेरी (American Blueberry) की खेती शुरू की है, जिससे उनकी कमाई लाखों-करोड़ों रुपए तक बढ़ गई है। वे बताते हैं कि ब्लूबेरी की एक बार फसल लगाने पर इससे 10 साल तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप इसकी खेती एक एकड़ क्षेत्र में लगाते हैं, तो आप ब्लूबेरी के करीब 3 हजार पौधे लगा सकते हैं। प्रति ब्लूबेरी पौधे से करीब दो किलो तक ब्लूबेरी का फल लिया जा सकता है। भारत के बाजार में ब्लूबेरी फल को 1 हजार रुपए प्रति किलो के रेट से बेचा जा सकता है। ब्लूबेरी के एक एकड़ खेत से 6 हजार किलोग्राम तक उत्पादन साल में प्राप्त किया जा सकता है। जिसको बाजार में बेचकर किसान 60 लाख रुपए तक की कमाई कर सकते हैं। 

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किसान ऐसे कर सकते है ब्लूबेरी का उत्पादन

किसान करवत द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, मुख्य रूप से उत्तरी अमेरिका में उत्पादित किए जाने वाले ब्लूबेरी फल का अब भारत में भी उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। देश के कई किसानों ने इसकी खेती भी शुरू कर दी है। भारत में 42 डिग्री के तापमान में अमेरिकन ब्लूबेरी फसल की कई किस्मों की खेती किसानों द्वारा की सकती है। भारत में ब्लूबेरी के पौधे खेतों में अप्रैल और मई महीने के दौरान लगाए जाते हैं। ब्लूबेरी के पौधों की रोपाई के 10 से 12 महीने बाद ब्लूबेरी के पौधों से फल मिलना शुरू हो जाते हैं। इसके फलों की तुड़ाई फरवरी-मार्च महीने से की जा सकती है। ब्लूबेरी के पौधों से फलों की तुड़ाई जून महीने तक निरंतर की जा सकती हैं। इसके बाद मानसून के आगमन के समय ब्लूबेरी के पौधों की छंटाई की जाती है। जिसमें सितंबर-अक्टूबर महीने तक शाखाएं आने लगती हैं और उन शाखाओं पर फूल लगने शुरू हो जाते हैं। ब्लूबेरी के पौधों की रोपाई करने से पहले किसान भाई इसके लिए खेत को अच्छे तरीके से तैयार कर उसमें सिंचाई की उचित व्यवस्था के लिए ड्रिप सिंचाई तकनीक का प्रयोग कर सकते हैं। 

एपीकल्चर से बढ़ता है ब्लूबेरी का उत्पादन

किसान अंबरीष करवत बताते हैं कि उन्होंने करीब 4 साल पहले अमेरिकन ब्लूबेरी की खेती शुरू की थी। जिसे उन्होंने एक प्रयोग के तौर पर शुरू किया था। करवत पंचगनी में 3.5 एकड़ के खेत में ब्लूबेरी की खेती कर रहे हैं, जिससे वे करोड़ों रुपए की कमाई साल में ले रहे हैं। ब्लूबेरी का उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्होंने खेत में एपीकल्चर (मधुमक्खी) पालन भी शुरू किया। जिसके लिए उन्होंने ब्लूबेरी के उसी खेत में मधुमक्खी (Honey bee) के बॉक्स लगाए। खेत में  एपीकल्चर से ब्लूबेरी का उत्पादन और फल की गुणवत्ता तथा आकार पहले कहीं ज्यादा बढ़ गए। वहीं, ब्लूबेरी के फलों को कीट-व्याधी से बचाने के लिए इनसेक्ट कैचर लगाया जा सकता है। इससे कीटनाशक का लागत खर्च घटाने में मदद मिलती है। इसके अलावा, हर साल ब्लूबेरी के पौधे की छंटाई करने से उसमें लगने वाले फूल की संख्या बढ़ती है और फल की गुणवत्ता बेहतर होती है। जिससे ब्लूबेरी का अधिक उत्पादन प्राप्त करने मदद मिलती है। खास बात यह है कि कई राज्यों की सरकारें मधुमक्खी पालन (Bee keeping) करने पर किसानों को तय प्रावधानों के अनुसार अच्छा खासा अनुदान भी देती है। 

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