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ड्रैगन मुर्गे का पालन : एक मुर्गे की बिक्री से डेढ़ लाख रुपए की कमाई

ड्रैगन मुर्गे का पालन : एक मुर्गे की बिक्री से डेढ़ लाख रुपए की कमाई
पोस्ट -17 जुलाई 2023 शेयर पोस्ट

ड्रेगन चिकन : दुनियाभर में ड्रैगन मुर्गे की डिमांड, कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश

Poultry business : देश के ग्रामीण क्षेत्र में लोग खेती के साथ-साथ बतख, बटेर और मुर्गी पालन कर अपनी आय को दोगुना कर काफी अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसे में किसान मुर्गा और मुर्गी पालन में अजीबोगरीब मुर्गे की नस्ल का पालन कर मालामाल हो सकते हैं। इस अजीबोगरीब मुर्गे की कीमत मार्केट में कीमत डेढ़ लाख रुपए से अधिक है। खास बात यह है कि इस नस्ल के मुर्गे की मांग दुनियाभर में है। 

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Poultry farming : मालामाल होने के लिए इस अजीबोगरीब मुर्गे का शुरू करें पालन

ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए खेतीबाड़ी के साथ-साथ पशुपालन एवं मुर्गी पालन जैसे सहायक व्यवसाय करते हैं। आज देश के लाखों-करोड़ों किसान परिवारों की अर्थव्यवस्था का मुख्य जरिया मुर्गी पालन बनकर उभरा है। मुर्गी पालन से किसान लाखों रुपए की आमदनी कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत भी बना रहे हैं। खास बात यह है केंद्र और राज्यों की सरकारें भी इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सस्ती ब्याज दरों पर लोन एवं लोन पर अच्छी खासी सब्सिडी भी देती है। ऐसे में किसान खेती के सहायक बिजनेस मुर्गी पालन में इस खास नस्ल के मुर्गे का पालन कर अपनी आय को बढ़ा सकते हैं। मुर्गे की यह नस्ल बाजार में कड़कनाथ से कहीं अधिक महंगी बिकती है। इस मुर्गे की कीमत मार्केट में डेढ़ लाख रुपए से अधिक है और दुनिया भर में इसकी डिमांड है।   

ऐसे में किसान भाई मुर्गी पालन में इस नस्ल के मुर्गी-मुर्गा पालन कर कुछ ही महीनों में मालामाल बन सकते हैं। अपने समिति संसाधनों के साथ किसान इसका पालन शुरू कर इससे अपनी आमदनी को बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं। आइये इस अजीबोगरी मुर्गे की नस्ल के बारे में जानते हैं।  

’डॉन्ग टाओ’ या ’ड्रैगन चिकन’ (Dong Tao' or 'Dragon Chicken')

अगर आप कृषि के सहायक व्यवसायों में मुर्गी पालन का व्यवसाय करते हैं और इससे आपको उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है, तो आप ’डॉन्ग टाओ’ या ’ड्रैगन चिकन’ का पालन कर सकते हैं। यह दुनिया का सबसे महंगे मुर्गे की नस्ल है। इस नस्ल के एक मुर्गे की कीमत में आप करीब 200 से अधिक कड़कनाथ मुर्गे ले सकते हैं। दुनिया का  सबसे महंगा मुर्गा ड्रैगन चिकन ( 'Dragon Chicken') फिलहाल केवल वियतनाम में मिलता है। लेकिन दुनियाभर में इस मुर्गे की बढ़ती डिमांड को देखते हुए वियतनाम के अलावा कुछ अन्य दूसरे देशों में लोग भी इसका पालन करने लगे हैं। हालांकि, भारत में अभी तक अधिकतर लोगों को मुर्गे की इस नस्ल के बारे में कोई जानकारी नहीं है। यानी मुर्गे की इस नस्ल से लोग अभी तक अनजान हैं। 

वियतनाम की राजधानी हनोई में होता है इसका पालन

दुनिया का सबसे महंगा मुर्गा “ड्रैगन चिकन” या “डॉन्ग टाओ” का पालन अब कई देशों में शुरू किया जा चुका है। इस अजीबोगरीब मुर्गे का पालन सबसे पहले वियतनाम की राजधानी हनोई के करीब एक मुर्गी फार्म में शरू किया गया था। ड्रैगन चिकन नस्ल के मुर्गे की सबसे बड़ी खासियत इसकी टांगे है। इस नस्ल के मुर्गे की टांगें सामान्य मुर्गों के टांगों के मुकाबले अधिक मोटी होती हैं। इनकी मोटी टांगों को देखकर यह लगेगा ही नहीं की ये मुर्गे की टांगें हैं। आज के वक्त में मार्केट में एक ड्रैगन किचन की कीमत लगभग 2 हजार डॉलर है, जिसकी भारतीय मुद्रा में वैल्यू 1,63,570 रुपए है। इस वक्त वियतनाम में भी इस मुर्गे की संख्या बहुत कम है। जिस वजह से वियतनाम के लोग सिर्फ अपने मुख्य त्यौहार ’लूनर न्यू ईयर’ के मौके पर ही इसे खाते हैं।  

ड्रैगन चिकन का पालन करने के लिए चाहिए बड़ी और खुली जगह 

अगर आप भारत में भी “डॉन्ग टाओ” यानी ड्रैगन चिकन का पालन कर इससे अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको इसके चूजे (chicks) वियतनाम से  मंगवाने पड़ेंगे। इसके बाद आप सामान्य मुर्गी या मुर्गे की तरह ही ड्रैगन चिकन का पालन शुरू कर सकते हैं। हालांकि, देसी मुर्गियों के मुकाबले इनकी खुराक थोड़ी ज्यादा होती है और इनका वजन भी अधिक होता है। जिसके कारण इनका पालन छोटी और बंद जगहों में कर पाना संभव नहीं है। इन्हें पालने के लिए आपके पास पर्याप्त थोड़ी बड़ी और खुली जगह होनी चाहिए। ड्रैगन चिकन (Dragon Chicken) का वजन कड़कनाथ के मुकाबले दो गुना अधिक होता है। इसका वजन 6 से 8 किलोग्राम या इससे अधिक हो सकता है। वियतनामी नस्ल के मुर्गे का रंग कई रंगों में होता है, जबकि इस ब्रीड की मुर्गियाें का रंग सफेद ही होता है। इस नस्ल के मुर्गियों और मुर्गे के विशालकाय होने की वजह से इन्हें ड्रैगन चिकन के नाम से जाना जाता है। डॉन्गटाओ नस्ल के मुर्ग-मुर्गियों (chickens) को पूर्णरूप से तैयार होने में लगभग सालभर या इससे भी थोड़ा अधिक वक्त लग जाता है। 

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