भारत एक कृषि प्रधान देश है। देश के लगभग हर हिस्से में खेती होती है। कृषि के क्षेत्र में लगातार आ रही नई चुनौतियों को देखते हुए सरकार निरंतर प्रयास करती रहती है। कृषि में किसानों को कोई परेशानी न हो इसके लिए विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन कर रही है। कृषि और बागवानी के कार्यक्षेत्र में आसानी हो, इसके अतिरिक्त कृषि क्षेत्र में खेती की लागत कम करने और कृषि और बागवानी क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन की शुरुआत वर्ष 2005-06 (दसवीं योजना) के दौरान की गई थी।
इस योजना के तहत केन्द्र और राज्य सरकारें दोनों आपस में मिलकर किसानों को बागवानी योजना का लाभ दे रही है। इसी क्रम में बिहार सरकार अपने राज्य के किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत ड्राई हॉर्टिकल्चर योजना लेकर आई है। जिसके तहत राज्य में बागवानी फसलों की खेती करने वाले किसानों को सब्सिडी भी दी जाएगी। राज्य के किसानों को बागवानी फसलों जैसे- आंवला, बेर, जामुन, कटहल, बेल, अनार, नींबू आदि पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा संचालित इस योजना का लाभ इच्छुक किसान आवेदन करके उठा सकते हैं। पिछले दिनों हुई बैठक में बिहार सरकार ने इस योजना के संचालन के लिए 3 करोड़ रूपए की मंजूरी दी है। राज्य में 875 हैक्टेयर में बागवानी फसलों की खेती का लक्ष्य तय किया गया है। तो आइए ट्रैक्टरगुरू के इस लेख के माध्यम से ड्राई हॉर्टिकल्चर के बारे में जानते हैं।
बिहार राज्य बागवानी मिशन के तहत सूक्ष्म सिंचाई आधारित शुष्क बागवानी योजना के तहत जिले के शुष्क जमीन को उपजाऊ बनाकर एक साथ दो फसलों की खेती करने की कवायद शुरू कर दी गई है। योजना के तहत आंवला, बेर, जामुन, बेल, कटहल एवं नींबू के साथ हाइब्रिड सब्जियों की खेती की जाएगी। इसको लेकर सूक्ष्म सिंचाई आधारित खेती करने को लेकर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, फल के पौधा एवं सब्जियों के पौधा के लिए किसानों को अलग-अलग अनुदान दिया जा रहा है। बिहार राज्य में कम पानी वाले इलाकों में ड्राई हॉर्टिकल्चर के लिए 875 हैक्टेयर में बागवानी फसलों को उगाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए बिहार सरकार द्वारा सात निश्चय-2 के तहत सूक्ष्म सिंचाई आधारित शुष्क बागवानी योजना को 2.92 करोड़ रुपये की लागत पर 3 वर्षों के लिए स्वीकृति दी गई है।
बिहार के कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने योजना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सूक्ष्म सिंचाई आधारित ड्राई हॉर्टिकल्चर स्कीम राज्य में पहले से संचालित है। योजना को संचालित करने का सरकार का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक फसलों की खेती से इतर अधिक आय देने वाली फसलों की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा गत वर्ष शुष्क बागवानी योजना के तहत 566 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तार किया गया तथा इस वर्ष 875 हेक्टेयर क्षेत्र का विस्तार किया जायेगा।
बिहार बागवानी विभाग की योजनाओं के अनुसार आंवला, बेर, जामुन, बेल, कटहल एवं नींबू के साथ हाइब्रिड सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को एक निर्धारित लागत की 50 फीसदी राशि सब्सिडी के तौर पर दी जाएगी।
योजना का कार्यान्वयन किसान अपने खेत के मेड़ पर भी करवा सकते हैं।
इस योजना का लाभ उन किसानों को देय होगा, जो अनिवार्य रूप से ड्रिप सिंचाई संस्थापित किए हों अथवा जिनके द्वारा ड्रिप सिंचाई का संस्थापन का कार्य कराया जा रहा हो।
योजना के तहत कम पानी में होने वाले शुष्क फलों के लिए 60 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तीन वार्षिक किस्तों में लागत और रोपण सामग्री के मद में होने वाले व्यय को पूरा करने के लिए अधिकतम 30 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर अथवा लागत का 50 प्रतिशत अनुदान के रूप में किसानों को दी जाएगी।
बिहार सरकार की ड्राई हॉर्टिकल्चर योजना के तहत शुष्क एवं उसर जमीन की बेहतर तरीके से सिंचाई के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत व्यक्तिगत तौर पर किसानों को ड्रिप सिंचाई अथवा मिनी स्प्रिंकलर के लिए तथा समूह आधारित खेती करने के लिए बोरवेल अथवा सामुदायिक नलकूप के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत लागत का 100 फीसदी अनुदान प्रदान किया जाएगा। इस योजना का लाभ उन किसानों को अधिक मिलेगा जो समूह में कृषि करते हैं।
मंत्री ने कहा कि फल के पौधे के बीच में 33 फीसदी जमीन खाली रह जाती है। खाली जमीन में हाइब्रिड सब्जी की खेती की जाएगी। योजना के तहत फल पौधों के बीच के खाली अंतराल के लिए इच्छानुसार, 7500 सब्जी पौधा प्रति हेक्टेयर एकीकृत उद्यान विकास योजना से किसानों की मांगों के अनुरूप उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, चंडी, नालंदा से एकीकृत उद्यान विकास योजना द्वारा संकर प्रभेद के टमाटर, बैगन, मिर्च, पत्तागोभी, फूलगोभी एवं लत्तेदार सब्जियों के पौध किसानों को दिये जाएंगे। हाइब्रिड सब्जी के प्रति पौधा की कीमत तीन रुपये है। जिसमें से किसान को पचास फीसदी अनुदान पर यानि प्रति पौधा एक रुपये 50 पैसे की दर पर मिलेगा। शुष्क बागवानी के फल पौधों के बढ़ने के पूर्व किसान सब्जी पौधों से आमदनी कर लाभ उठा सकते हैं।
बिहार के कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने योजना के बारे में जानकारी देते हुए बताया की राज्य के सभी 38 जिलों के लिए शुष्क बागवानी फसल के लिए किसानों का चयन कर इस योजना का क्रियान्वयन कराया जायेगा। जिलावार योजना संचालन हेतु 2400 कृषकों को सेंटर आफ एक्सीलेंस द्वारा प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। इस योजना के अंतर्गत किसान अधिकतम 4 हेक्टेयर तथा न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर में फलदार पौधे लगाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को सबसे पहले अपने जिले के नजदीकी राज्य उद्यान विभाग या कृषि विभाग से संपर्क कर पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा किसान को योजना की अधिक जानकरी के लिए बिहार कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://dbtagriculture.bihar.gov.in/ पर जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते है। आवेदन के जांच उपरांत सभी शर्तों को पूरा करने वाले किसानों को कार्यादेश देते हुए सेंटर आफ एक्सीलेंस, देसरी, वैशाली से फल पौधा आंवला, बेर, जामुन, कटहल, बेल, अनार, नींबू एवं मीठा नींबू आदि उपलब्ध कराया जायेगा। किसान अपनी इच्छानुसार फल पौध का चयन करने के लिए स्वतंत्र होंगे। फल पौधे की अनुदान राशि योजना की राशि से काटकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, देसरी, वैशाली को उपलब्ध कराया जायेगा।
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