किसानों को सौगात, 1 हजार रुपए प्रति क्विंटल के बोनस पर सरकार खरीदेगी यह फसल
सरकार इस फसल पर किसानों को देगी 1 हजार रुपए प्रति क्विंटल का बोनस, सीधे खाते में मिलेगी राशि
Millet Farming : देश में कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां बहुत कम बारिश होती है, जिसके कारण इन क्षेत्रों में पारंपरिक फसल जैसे गेहूं, धान की खेती करने में किसानों को काफी परेशानियां भी होती है। इन इलाकों के किसानों के लिए मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती वरदान साबित हो सकती है। किसान मोटे अनाज की खेती कर इसके उत्पादन से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। खास बात यह है कि भारत सरकार द्वारा “श्री अन्न योजना” (Shree Anna) के अंतर्गत वर्तमान में मोटे अनाज और इसके उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य सरकारें इस योजना के तहत अपने स्तर पर योजनाएं बनाकर किसानों को मिलेट्स के उत्पादन के लिए प्रोत्साहन भी देती दिखाई दे रही हैं। इन सब के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के किसानों को बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मोटे अनाज यानी मिलेट्स की खेती करने वाले किसानों के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने “रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन” योजना (Rani Durgavati Shree Anna Incentive Yojana) के तहत मोटे अनाज उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन देने की ऐतिहासिक घोषणा की है। कैबिनेट में योजना के प्रस्ताव को पारित भी कर दिया गया।
सीधे किसानों (Farmers) के खाते में भेजी जाएगी राशि
बता दें कि मोटे अनाज यानी मिलेट्स वे अनाज हैं जिसके उत्पादन में किसानों को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती और यह कम पानी और कम उपजाऊ भूमि में भी आसानी से उग जाते हैं। इसकी खेती में यूरिया एवं अन्य उर्वरक की जरूरत भी नहीं पड़ती, जिसके कारण इसकी खेती से किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा भी होता है। ऐसे में राज्य के मिलेट्स उत्पादक किसानों के लिए रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना वरदान साबित होगी। इससे मोटे अनाज की खेती करने वाले किसानों को अपने उत्पादों का उचित दाम मिलेगा, जिससे राज्य के अन्य कृषकों को श्री अन्न ( मिलेट्स) उत्पादन के लिए प्रोत्साहन भी मिलेगा। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग मध्य प्रदेश के अनुसार, सरकार इस योजना के तहत मोटे अनाज जैसे कोदो-कुटकी, रागी, ज्वार, बाजरा आदि के लिए किसानों को 10 रुपए प्रति किलो के हिसाब से प्रोत्साहन राशि प्रदान की करेगी। सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली यह प्रोत्साहन राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर दी जानकारी
मध्य प्रदेश कृषि विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा, “श्रीअन्न बन रहा वरदान। मप्र में कोदो-कुटकी बन रही लाभ का धंधा।” “किसानों को कोदो-कुटकी की फसल पर 𝟏 हजार रुपए प्रति क्विंटल दी जा रही है प्रोत्साहन राशि।” रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के तहत राज्य सरकार, महासंघ द्वारा खरीद किये गये कोदो-कुटकी पर किसानों को भुगतान किए गये न्यूनतम खरीद मूल्य के अतिरिक्त सहायता राशि के रूप में किसानों के खातों में एक हजार रूपए प्रति क्विंटल डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के तहत जारी करेगी। इस योजना से श्रीअन्न (मिलेट्स) उत्पादक किसानों को अधिक से अधिक लाभान्वित करने के लिए उनकी क्षमता संवर्धन, कोदो-कुटकी की विशिष्ट पैकेजिंग एवं ब्राँडिंग गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। यह किसानों को बेहतर विपणन व्यवस्था उपलब्ध कराते हुए उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने में सहायक होगी।
शासन ने पहले ही जारी कर दिए हैं मार्गदर्शी निर्देश
शासन ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूर्व से संचालित लघु धान्य प्रसंस्करण, विपणन इत्यादि कार्यों में संलग्न एफपीओ/समूह को महासंघ के रूप में संगठित करने के लिए मार्गदर्शी निर्देश पहले ही जारी कर दिए हैं। इस श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना से प्रदेश में श्रीअन्न यानी मोटे अनाज उत्पादन से जुड़े किसान, एफपीओ/ किसान समूह को राज्य स्तरीय महासंघ के रूप में संगठित कर नवीन तकनीकी के उपयोग से कोदो-कुटकी एवं उसके प्र-संस्कृत उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान स्थापित कराने में मदद मिलेगी। एफपीओ द्वारा गठित फेडरेशन के माध्यम से श्रीअन्न के लिये वेल्यू चेन विकसित करने और कोदो-कुटकी की खेती करने वाले उत्पादक कृषकों की आय में वृद्धि करने में मदद मिलेगी।
किसान-कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा योजना का क्रियान्वयन
श्रीअन्न/कोदो-कुटकी के विपणन एवं प्रसंस्करण में कार्यरत एफपीओ महासंघ गठित किया गया है। गठित फेडरेशन श्रीअन्न के उपार्जन, भंडारण, प्रसंस्करण, ब्रॉण्ड बिल्डिंग एवं उत्पाद विकास आदि कार्य करेगा। कम्पनी अधिनियम-2013 के अंतर्गत कम्पनी के रूप में महासंघ का गठन किया गया है। योजना के लाभार्थी एफपीओ फेडरेशन के सदस्य है। इस योजना का क्रियान्वयन नोडल संस्था किसान-कल्याण तथा कृषि विकास द्वारा किया जाएगा। मॉनिटरिंग व्यवस्था को पुख्ता करने के लिये विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। योजना के क्रियान्वयन की उच्चतम स्तर पर बेहतरीन मॉनिटरिंग और समीक्षा होगी, जिससे योजना के स्टेक होल्डर्स को लाभान्वित करने की प्रक्रिया में आने वाली दिक्कतों का निराकरण किया जाएगा और उन्हें अधिक से अधिक लाभ प्रदान किया जा सकेगा।
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