देश में मोटे अनाज की खेती व उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने श्रीअन्न योजना की शुरुआत करने की घोषणा की है। सरकार की इस योजना के तहत देश में मोटे अनाज की खेती के रकबा व पैदावार को बढ़ाया जाएगा। केंद्र सरकार अपने देश को श्रीअन्न उत्पाद का ग्लोबल हब बनाने की तैयारी में है। इसके लिए हैदराबाद स्थित भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान को प्रमुख बाजरा अनुसंधान केंद्र बनाया जाएगा। श्री अन्न के तहत आने वाले अनाजों की खासियत है कि इसकी फसलों को बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत वर्तमान समय में बाजरे का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है। भारत के ही प्रस्ताव के बाद संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को 'बाजरा का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष' घोषित किया है। बाजरा के एक पौधे को अपने फसल चक्र में केवल 350 मिलीमीटर पानी की आवश्यकता होता है। इसके अतिरिक्त मोटे अनाज की फसल किसी कारण से खराब हो जाए तो वो पशुओं के चारे के काम आ जाती है। किसान भाइयों आज ट्रैक्टर गुरु की इस पोस्ट के माध्यम से आपके साथ श्री अन्न योजना से जुड़ी सभी जानकारियां साझा करेंगे।
भारत में राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और मध्य प्रदेश में सबसे अधिक मोटे अनाजों की खेती की जाती है। इसके अलावा उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में भी मोटे अनाज की खेती की जाती है।
मोटे अनाज यानी मिलेट्स को अब से श्रीअन्न के रुप में जाना जाएगा। मोटे अनाजों को देवान्न भी कहा जाता है और श्रेष्ठ अन्न भी माना जाता है। समय के साथ ज्यादातर लोग गेहूं और चावल की खेती की ओर बढ़ते चले गए, जबकि भारत में प्राचीन समय से ही बाजरा, ज्वार, रागी, कुट्टू, सामा, चीना और रामदाना जैसे कई तरह के श्री अन्न का उत्पादन किया जाता है, जो सदियों से हमारे भोजन में एक अभिन्न अंग रहे हैं और ये अनाज सेहत के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं। बजट के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी ट्वीट करते हुए कहा कि 'आज मिलेट्स पूरे विश्व में लोकप्रिय हो रहा है और इसका सर्वाधिक लाभ भारत के छोटे किसानों को मिल रहा है। अब इस 'सुपर फूड' को 'श्री अन्न' का नाम देकर मोदी सरकार नई पहचान देगी'।
मोटे अनाज की खेती करते समय इनकी फसलों का अच्छी तरह से विकास करने के लिए बेहद ही कम पानी की जरूरत होती है। अन्य फसलों के मुकाबले मोटे अनाज की खेती कम पानी वाली जमीन अथवा बंजर जमीन पर भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। बाजरे की खेती करते समय पूरी फसल को तैयार होने में सिर्फ 350 मिलीमीटर पानी की जरूरत होती है। जहां एक तरफ बाकी फसलों की खेती पानी की कमी के कारण बर्बाद हो जाती है, वहीं, मोटे अनाज की फसल खराब होने की स्थिति में ये पशुओं के चारे के रुप में खिलाने के काम आ जाती है।
पूरी दुनिया में मिलेट्स की खेती सबसे ज्यादा अफ्रीका में की जाती है, लेकिन मोटे अनाजों का सबसे अधिक उत्पादन भारत में होता हैं। निर्यात की बात करें तो अफ्रीका मिलेट्स अनाजों का सबसे बड़ा निर्यातक देश है, जबकि भारत इसके निर्यातक देश में दूसरे स्थान पर है। भारत यूएई, नेपाल, सऊदी अरब, लीबिया , मिस्र, ओमान, यमन, ट्यूनीशिया, ब्रिटेन और अमेरिका में ज्वार, बाजरा, रागी, कनेरा और कुटू का निर्यात कर रहा है। दुनियाभर में मोटे अनाजों के प्रमुख उत्पादकों की लिस्ट में चीन, माली, नाइजीरिया इथोपिया, सुडान,चाड, पाकिस्तान, बर्किना फासो, सेनेगल, तंजानिया, नेपाल, रूस, यूक्रेन, घाना, युगांडा, म्यांमार और गिनी देश शामिल हैं।
भारत में मोटे अनाजों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। पूरी दुनिया में भारत का अनुमानित मोटे अनाज का हिस्सा लगभग 41 प्रतिशत से अधिक है। एफएओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में मोटे अनाजों का उत्पादन दुनिया में 30.464 मिलियन मीट्रिक टन तक का हुआ था। इसमें से भारत में अकेले 12.49 एमएमटी का उत्पादन किया था।
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