न्यूनतम समर्थन मूल्य: एमएसपी पर अरहर, मसूर और उड़द दाल खरीदेगी सरकार, ऑनलाइन करना होगा पंजीयन

न्यूनतम समर्थन मूल्य: एमएसपी पर अरहर, मसूर और उड़द दाल खरीदेगी सरकार, ऑनलाइन करना होगा पंजीयन
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किसानों से एमएसपी पर अरहर, मसूर और उड़द दाल खरीदेगी सरकार, पोर्टल पर अभी करें पंजीयन

MSP Purchase : केंद्र सरकार प्रत्येक फसल सीजन से पहले कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइजेस (सीएसीपी) की सिफारिश पर एमएसपी तय करती है, जिनमें फसल की कुल उत्पादन लागत जैसे- मजदूरी, बीज, उर्वरक, खाद, सिंचाई समेत अन्य खर्च शामिल होते हैं। इस एमएसपी पर केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा हर फसल वर्ष में कुल 26 प्रकार की फसलों की खरीद की जाती है। इसमें अनाज, दलहन, तिलहन से लेकर व्यावसायिक फसलें जैसे कपास, गन्ना, खोपरा, कच्चा जूट आदि शामिल है। इस बीच दलहन उत्पादकों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जा सके, इसके लिए सरकार ने उत्पादकों से सीधे तुअर (अरहर), उड़द और मसूर की शत-प्रतिशत खरीदारी समर्थन मूल्य (MSP) या उससे भी अधिक दाम पर करने का फैसला किया है। किसानों को एमएसपी पर अपनी उपज बेचने में परेशानी ना हो, इसके लिए नाफेड और एनसीसीएफ द्वारा किसानों के पंजीयन के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार किया है। पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन कराकर किसान सीधे सरकार को एमएसपी पर अरहर/तुअर के अलावा उड़द और मसूर दाल भी बेच सकेंगे। 

खरीद करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध (Government is committed to buy)

बीते दिन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली के कृषि भवन में विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की। इस बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार फसल विविधीकरण सुनिश्चित करने व दलहन उत्पादन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए एमएसपी (MSP) यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum support price) पर अरहर, उड़द और मसूर की खरीद करने के लिए प्रतिबद्ध है। बता दें कि किसान कल्याण के प्रति सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में विपणन सत्र 2024-25 के लिए सभी आवश्यक खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि को मंजूरी दी थी। सरकार ने विपणन सत्र 2024-25 के लिए एमएसपी में सबसे अधिक वृद्धि तिलहन और दालों पर की है, जैसे नाइजरसीड के लिए 983 रुपए प्रति क्विंटल, तिल में 632 रुपए प्रति क्विंटल और तुअर/अरहर पर 550 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। 

किसानों को पोर्टल पर करना होगा ऑनलाइन पंजीयन (Farmers will have to register online on the portal)

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के ऑनलाइन पंजीकरण के लिए भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नेफेड) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) के माध्यम से ई-समृद्धि पोर्टल शुरू किया गया है। सरकार पोर्टल पर पंजीकृत किसानों से एमएसपी पर इन दालों की खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक किसानों को इस पोर्टल पर पंजीकरण करने के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि वे सुनिश्चित खरीद की सुविधा का फायदा उठा सकें। किसानों को इस पोर्टल पर सीधे सरकार को अपनी दलहन उपज बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण, खरीद एवं भुगतान विकल्प की सुविधा दी गई है। किसान अपना पंजीकरण करा कर सीधे सरकार को समर्थन मूल्य पर तुअर (अरहर), उड़द और मसूर दाल बेचे सकेंगे। बता दें कि नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ लिमिटेड (NCCF) 'बफर' स्टॉक (भंडार) बनाए रखने के लिए सरकार की तरफ से दालों की खरीद करने का काम करती है। 

वर्ष 2027 तक दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने का लक्ष्य (The target is to achieve self-sufficiency in the pulses sector by the year 2027)

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि देश अरहर (तुर दाल), उड़द औेर मसूर इन तीनों फसलों के उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं है और वर्ष 2027 तक दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने का लक्ष्य है। उन्होंने वर्ष 2015-16 से दालों के उत्पादन में 50 फीसदी की वृद्धि करने के लिए राज्यों के प्रयासों की सराहना की और प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाने और किसानों को दालों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए अधिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने इस तथ्य की सराहना की कि देश ने मूंग और चना उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल की है। देश ने पिछले 10 वर्षों के दौरान आयात पर निर्भरता 30 प्रतिशत से घटाकर 10 फीसदी कर दी है। कृषि मंत्री ने राज्यों से केंद्र के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया, जिससे देश न केवल खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बने, बल्कि दुनिया की खाद्य टोकरी भी बने सकें। 

दलहन ग्राम योजना के बारे में दी जानकारी (Information given about Pulses Village Scheme)

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मौजूदा खरीफ वर्ष के लिए शुरू की जा रही नई आदर्श दलहन ग्राम योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मंत्री व राज्य सरकारों से अनुरोध किया कि वे चावल की फसल कटने के बाद दालों की खेती करने के लिए उपलब्ध परती भूमि का उपयोग करें। मंत्री ने राज्य सरकारों से तुअर/अरहर दाल की अंतर-फसल को भी जोरदार तरीके से अपनाने को कहा। उन्होंने कहा कि देश में दालों की पैदावार को बढ़ाने के लिए तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता को देखते हुए यह बैठक आयोजित की गई थी, ताकि आयात को कम किया जा सके।  

सरकार खरीदेगी दहलन उपज (Government will buy Dahlan produce)

बता दें कि कई बार दलहन उत्पादकों को सटोरियों की तेजी-मंदी या किसी अन्य स्थिति के कारण उपज के उचित दाम नहीं मिलते थे, जिससे उन्हें बड़ा नुकसान होता था। इसके कारण किसान दाल फसलों की खेती करना पसंद नहीं करते थे। हालांकि, सरकार अब ई-समृद्धि पोर्टल पर पंजीकृत किसानों से उनकी दाल उपज को एमएसपी पर शत-प्रतिशत खरीद कर लेती हैं। समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सीधे सरकार को दाल बेचने के लिए किसानों को पहले नाफेड और एनसीसीएफ से अपना ऑनलाइन पंजीकरण करना होता है। फसल आने पर अगर दालों का भाव समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक होता है, तो उसकी औसत (एवरेज) निकाल कर भी किसान से अधिक दाम पर उपज खरीदने का वैज्ञानिक फार्मूला तैयार किया गया है। 

कैसे करा सकते हैं पजीकरण? (How can you get registered?)

इस प्लेटफॉर्म पर तुअर दाल (Tur Dal) के बाद अब उड़द (Urad Dal) और मसूर दाल (Masoor Dal) उत्पादक किसानों के साथ-साथ मक्का उत्पादकों के लिए भी इसी तरह की सुविधा लागू की गई।  उत्पादक किसान ऑनलाइन पंजीकरण करा सरकार को सीधे दालें बेच सकते हैं। दालों की एमसएपी खरीद का भुगतान डीबीटी के माध्यम सीधे किसानों के खाते में सुनिश्चित किया जाता है।  मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, बिहार, तेलंगाना जैसे प्रमुख दाल उत्पादक राज्यों के किसान दालों के लिए अपनी भूमि के आकार का पंजीकरण ई समृद्धि पोर्टल https : // esamridhi . in / पर करा सकते हैं। किसान ई-मित्र या ग्राहक सेवा केंद्र की मदद से या स्वयं भी पोर्टल पर अपना पंजीकरण कर सकते हैं। इसके पश्चात सरकार द्वारा किसान की आधार संख्या को सत्यापित किया जाता है, उनकी यूनिक आईडी बनाई जाती है और भूमि रिकॉर्ड के साथ इसे एकीकृत किया जाता है।

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