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कृषि उद्योग लोन : फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर मिलेगी 10 लाख रुपए तक की सब्सिडी, होगा लाभ

कृषि उद्योग लोन : फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर मिलेगी 10 लाख रुपए तक की सब्सिडी, होगा लाभ
पोस्ट -27 अगस्त 2023 शेयर पोस्ट

फूड प्रोसेसिंग का बिजनेस शुरू करने के लिए किसानों को मिलेगा 10 लाख रुपए का लोन, करें आवेदन 

मध्यप्रदेश में किसानों को एग्रीकल्चर सेक्टर से जुड़े फूड प्रोसेसिंग का उद्योग लगाने पर सरकार लोन एवं सब्सिडी की सुविधा मुहैया कर रही है। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार द्वारा 1772 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाई की स्थापना करने का प्लान है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों एव स्वयं सहायता समूहों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना’ के तहत चयन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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एग्रीकल्चर सेक्टर से जुड़े फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर लोन एवं सब्सिडी की सुविधा

Prime Minister Micro Food Industry Upgradation Scheme : मध्यप्रदेश सरकार द्वारा राज्य में किसानों को कारोबारी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए राज्य में प्रधानमंत्री सूक्ष्म उद्योग उन्नयन योजना को शुरू किया गया है। जिसके तहत किसानों और स्वयं सहायता समूहों को शिवराज सरकार द्वारा एग्रीकल्चर सेक्टर से संबंधित कारोबार के सेटअप पर लोन एवं सब्सिडी की सुविधा मुहैया करवाई जा रही हैं। इससे राज्य के ग्रामीण इलाकों के लोग कृषि उत्पादाें से संबंधित सूक्ष्म फूड प्रोसेसिंग इकाईयों को स्थापित कर अपनी कमाई को बढ़ा सकते हैं। साथ ही अन्य लोगों को ग्रामीण स्तर पर ही रोजगार भी उपलब्ध करा सकेंगे। 

इसी बीच मुख्यमंत्री कार्यालय से खबर निकलकर आ रही है कि “प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना” (PM Micro Food Industry Upgradation Scheme) के तहत मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) क्षेत्र में 1772 सूक्ष्म और लघु खाद्य उद्योगों (food industries) की यूनिट जल्द ही शुरू की जाएगी। इन सूक्ष्म उद्योग इकाइयों (micro industry units) के लिए राज्य सरकार (state government) ने किसानों एवं उनके स्वयं सहायता समूहों को चयनित किया है। इस योजना के तहत चयनित हितग्राहियों को सूक्ष्म उद्योग करोबार के सेटअप के लिए बैंकों के माध्यम से लोन के लिए स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई है। साथ ही प्रदेश सरकार इकाइयों पर हितग्राहियों को आर्थिक मदद के रूप में सब्सिडी भी प्रदान करेगी। ग्रामीण इलाकों में किसानों एवं उनके सहायता समूहों को बतौर लाभार्थी चुना गया है। सरकार इन हितग्राहियों को कृषि उत्पादों के खाद्य प्रसंस्करण की छोटी इकाइयां लगाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही हैं। आईये इस पोस्ट की मदद से इस पूरी खबर के बारे में विस्तार से जानते हैं।

सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाईयों के प्राप्त हुए इतने आवेदन

मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को पीएम सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में वेयर हाउस, कोल्ड स्टोरेज, पैक हाउस, चिलिंग मिल्क प्लांट जैसे कई सूक्ष्म उद्योग (micro industry) से जोड़ा जा रहा है। इस बीच सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कहा जा रहा है कि इस योजना के तहत राज्य सरकार ने कृषि उत्पादों से संबंधित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग (micro food processing industry) की यूनिट लगाने के लिए आवेदन करने के लिए कहा गया था। जिसमें राज्य सरकार को करीब 10,664 आवेदन सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाईयों के प्राप्त हुए थे। 

सरकार द्वारा इतने आवेदन किए गए स्वीकृत

सरकार द्वारा आवेदनों का वेरिफिकेशन करने के बाद फूड प्रोसेसिंग की 1772 इकाईयों को पीएम सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (Pm micro food industry upgradation scheme) के तहत स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृत आवेदनों में सबसे अधिक 116 आवेदन राज्य के ग्वालियर जिले से प्राप्त हुए हैं। वही, खरगोन क्षेत्र में 100, रीवा जिले में 47, बालाघाट में 23, टीकमगढ़ में 27 और होशंगाबाद क्षेत्र में 22 इकाइयाें की स्थापना होगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Chief Minister Shivraj Singh Chouhan) ने किसानों एवं उद्यमियों से इस योजना का लाभ उठाने के लिए अपील करते हुए कहा कि बाकि बचे आवेदनों को स्वीकृति देने के लिए विभिन्न स्तरों पर सलाह की जा रही है।    

क्या है पीएम सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना 

केंद्र सरकार देश के ग्रामीण क्षेत्रों में “प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना” संचालित कर रही है। जिसका मकसद ग्रामीण क्षेत्रों के गांव में रहने वाले किसानों और उनके समूहों को बेहतर आय का सोर्स उपलब्ध करवाने के लिए उन्हें कृषि उत्पादों से जुड़े छोटे प्रसंस्करण उद्योग से जोड़ना है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना को वर्ष 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत लाया गया था। देश के सभी इलाकों में इस योजना का क्रियान्वयन वित्तीय वर्ष 2023-24 तक किया जा रहा है। 

लाभार्थियों को मात्र 10 प्रतिशत करना होता है निवेश

केन्द्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म उद्योग उन्नयन योजना किसान/युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को कृषि क्षेत्र में फूड प्रसंस्करण इकाईयां स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता के रूप बैंको से लोन, 10 लाख रुपए तक का अनुदान सीमा के साथ व्यापार प्रशिक्षण देने का प्रावधान किया गया है। इसमें केंद्र और राज्य सरकार क्रमशः 60 : 40 के अनुपात में साझा करती है। वहीं, पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में 90:10 के अनुपात में साझा किया जाता है। इसमें लाभाथियों को अधिकतम 10 लाख रुपये की सब्सिडी के साथ सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाई की स्थापना के लिए 35 प्रतिशत क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी और अधिकतम 3 करोड़ रुपए की कैपिटल सब्सिडी कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए दिए जाने का प्रावधान है। इकाई लागत की कुल कैपिटल पर लाभार्थी को मात्र 10 प्रतिशत ही निवेश करना होता है। शेष 90 प्रतिशत राशि बैंकों से लोन के रूप में सरकार द्वारा निवेश किया जाता है। 

योजना के तहत लाभार्थियों को दी जाने वाली मदद

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने राज्य सरकारों के सहयोग से ग्रामीणों को खाद्य प्रसंस्करण के सूक्ष्म उद्योग से जोड़ने के लिए आर्थिक, वित्तीय और तकनीकी सहायता देने का काम किया है। इसमें हर राज्य में तकनीकी संस्थाओं को भी नामांकित किया गया है, जो राज्य स्तरीय तकनीकी संस्थाओं के लिए पीआईपी तैयार करने, पीआईपी को इनपुट प्रदान करने, जिला संसाधन व्यक्तियों के लिए क्षमता निर्माण प्रशिक्षण आयोजित करने, ब्रांडिंग और मार्केटिंग योजनाओं के लिए इनपुट प्रदान करने, जिला संसाधन व्यक्तियों को एडवाइस देने के लिए जिम्मेदार होंगे। इन संस्थानों की मदद से उन व्यक्तिगत इकाइयों और समूह के हितग्राहियों को कौशल प्रशिक्षण सहायता प्रदान किया जाएगा जो पूंजी निवेश करके लाभ कमाने के इच्छुक हैं। एक जिला एक उत्पाद का उत्पादन करने वाली मौजूदा प्रसंस्करण इकाइयों और समूह को भी प्रशिक्षण सहायता दी जाती है।  यह प्रशिक्षण ऑनलाइन मॉड्यूल के माध्यम से प्रदान किया जाता है। 

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