Vermicompost fertilizer Unit : किसानों को आत्मनिर्भर बनाकर राज्यों की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए खेती के साथ-साथ पशुपालन को बढ़ावा दिया जाता है। इसके साथ ही देश में रसायन मुक्त फसल उत्पादन के लिए जैविक खेती (Organic farming) को भी बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) चलाई जा रही है । इसके तहत कई राज्यों में जैविक खेती संबंधित विभिन्न घटकों के लिए किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस बीच ओडिशा में कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए सरकार द्वारा खेती के साथ-साथ पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही राज्य में जैविक खेती को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इन प्रयासों में ओडिशा सरकार द्वारा अब राज्य के गौशालाओं के संरक्षण और उनके बेहतर संचालन के लिए यहां की गौशालाओं में वर्मी कंपोस्ट (Vermicompost) खाद उत्पादन इकाई स्थापना करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए राज्य में 58 गौशालाओं और किसानों को स्वीकृति दी गई है। मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास विभाग की तरफ से वर्मी कंपोस्ट (Vermicompost) गोधन इकाईयां लगाने के लिए गौशालाओं और किसानों की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके अलावा, राज्य में कृषि क्षेत्र का विकास करने के लिए राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रुपए की सिंचाई परियोजनाओं की शुरूअता भी की गई। इसके तहत राज्य भर में सिंचाई क्षमता को बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
मत्स्य पालन एवं पशु संसाधन विकास विभाग राज्य में पशुपालन को क्षेत्र बढ़ावा देकर छोटी और सीमांत जोतों के किसानों के लिए आय और रोजगार के अवसरों की वृद्धि करने का प्रयास कर रहा है। इसी के तहत राज्य की गौशालाओं में वर्मी कंपोस्ट (Vermicompost) यूनिट की स्थापना की जा रही है। इसके लिए मत्स्य पालन (Fisheries) और पशु संसाधन विकास विभाग ओडिशा सरकार की तरफ से 10 लाख रुपए तक की आर्थिक मदद किसानों और गौशालाओं को दी जाएगी। सरकार द्वार राज्य में वर्मी कंपोस्ट गोधन यूनिट लगाने के लिए 58 गौशाआलों और किसानों को स्वीकृति भी दी गई है। हाल ही मत्स्य पालन (Fisheries) और पशु संसाधन विकास विभाग की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में कृषि और एफई, मत्स्य पालन और एआरडी विभाग के मंत्री रणेंद्र प्रताप स्वैन ने गौशालाओं और किसानों को वर्मी कंपोस्ट इकाई से संबंधित प्रमाण पत्र सौंपा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री रणेंद्र प्रताप स्वैन ने कहा कि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पशु और पशुपालकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार मवेशियों के कल्याण हेतु नई गौशालाओं की स्थापना और उनके बेहतर संचालन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। राज्य में गौशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से गौशालाओं में वर्मी कम्पोस्ट (Vermicompost) गोधन यूनिट्स लगाने के लिए भी सहायता प्रदान कर रही है। यह सहायता विभाग की तरफ से गौशालाओं को दी जाएगी। इस योजना का लाभ गौशालाओं के अलावा राज्य के पशुपालक किसान एवं दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति के सदस्य भी उठा सकते हैं। इसके तहत सहायता राशि 50 प्रतिशत या अधिकतम 10 लाख रुपए जो भी अधिक होगा दिए जाएंगे। इसके तहत मवेशियों के अपशिष्ट पदार्थों जैसे गोबर एवं मूत्र के उपयोग से वर्मी कम्पोस्ट (Vermicompost) खाद उत्पादन के लिए वर्मी कम्पोस्ट इकाइयां स्थापित करने के लिए गौशालाओं को दस लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
एक मीडिया रिपोर्ट़्स के अनुसार, कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा यह एक बेहतरीन पहल है। वर्मी कम्पोस्ट (Vermicompost) खाद का उत्पादन कर गौशालाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं और बेहतर तरीके से पशुओं का संरक्षण कर सकती हैं। इसके अलावा पशुपालक और दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां अपनी आय बढ़ा सकती हैं। राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने और भूमि के स्वास्थ्य सुधार करने में वर्मी कम्पोस्ट (Vermicompost) काफी फायदेमंद होगा। ओडिशा सरकार राज्य में नई गौशालाओं की स्थापना में सहायता करने के साथ ही पंजीकृत गौशालाओं को उनके रखरखाव के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान कर रही है। इस मकसद से राज्य सरकार द्वारा चालू वित्तीय वर्ष के दौरान लगभग 9 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त सभी 314 ब्लॉकों में मुख्यमंत्री मोबाइल पशु चिकित्सा यूनिट शुरू की गई हैं, ताकि किसानों के दरवाजे पर पशु चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जा सके। वहीं, शहरी क्षेत्रों के लिए भी पशु चिकित्सा एम्बुलेंस यूनिट प्रदान की गई हैं।
बता दें कि बीते दिनों ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक (Chief Minister Naveen Patnaik) ने 131 करोड़ रुपये की लागत से राज्य भर में कई सिंचाई परियोजनाएं की शुरूआत की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हमारी सरकार किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र का विकास करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रदेश के चार जिलों में 131 करोड़ रुपए की छह सिंचाई परियोजनाओं को लॉन्च किया। इन सिंचाई परियोजनाओं से राज्य में कृषि भूमि की सिंचाई एवं गांवों को पीने का पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इस दौरान उन्होंने कटक जिले में हडुआ बांध एवं इसकी यूजीपीएल वितरण प्रणाली की भी नींव रखी। इस बांध पर 265.24 करोड़ रुपये की लागत खर्च का अनुमान है, जबकि वितरण प्रणाली पर 195.89 करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है। इस परियोजना से जहां 86 गांवों की 8,997 एकड़ भूमि की सिंचाई होगी, वहीं कटक जिले के 293 गांवों को पेयजल उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि 6 सिंचाई परियोजनाओं में से 70.88 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कुसुमी बैराज से यूजीपीएल के तहत 9,254 एकड़ भूमि की सिंचाई के लिए पानी मिलेगा, जबकि, पाइपलाइन बिछाने की लागत 147.17 करोड़ रुपये है।
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