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स्ट्रॉ रीपर मशीन: गौशाला संचालक को स्ट्रॉ रीपर मशीन खरीद पर सरकार से मिलेगी 90% तक की सब्सिडी

स्ट्रॉ रीपर मशीन: गौशाला संचालक को स्ट्रॉ रीपर मशीन खरीद पर सरकार से मिलेगी 90% तक की सब्सिडी
पोस्ट -27 मार्च 2023 शेयर पोस्ट

गौशाला संचालक को स्ट्रॉ रीपर मशीन पर सरकार से मिलेगी 90% सब्सिडी

देश की राजधानी दिल्ली सहित भारत के कई महानगरों में गांवों से सटी सीमा के आसपास खेतों में पराली जलाए जाने की गंभीर समस्या बनी हुई है। इससे फैलने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए कृषि विभाग ने अच्छा समाधान निकाला है। यह है पराली से भूसा बनाने की आधुनिक मशीन स्ट्रॉ रीपर। इस मशीन से पराली खरीद कर गोशालाओं में गायों के लिए भूसा तैयार किया जा सकता है। इससे गायों को चारा मिलेगा वहीं पराली खेतों में नहीं जलाई जाएगी। इस तरह की पहल मध्यप्रदेश सरकार ने की है। सरकार के गोवसंर्धन बोर्ड और कृषि विभाग मिलकर गोशालाओं में पराली से भूसा बनाने की मशीन स्ट्रॉ रीपर के लिए 90 प्रतिशत तक अनुदान देंगे। केवल 10 प्रतिशत की राशि ही गोशालाओं को खर्च करनी होगी। इस योजना में कुछ शर्ते हैं जिनकी पालना के बाद ही गोशालाएं इसका लाभ उठा पाएंगी। आइए, ट्रैक्टर गुरू की इस पोस्ट में जानते हैं क्या है स्ट्रॉ रीपर सब्सिडी योजना और कैसे मिलेगी गोशालाओं को सरकारी सहायता राशि?  इसे अवश्य पढ़ें और शेयर करें।

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ये होंगी सब्सिडी देने की शर्तें

मध्यप्रदेश सरकार की ओर से पराली से भूसा बनाने की मशीन स्ट्रॉ रीपर पर 90 फीसदी अनुदान दिए जाने की योजना में गोशालाओं के लिए सबसे पहली शर्त यह है कि 50 से ज्यादा गायें और 50 hp पावर का ट्रैक्टर इनके पास होना चाहिए। यह मशीन ट्रैक्टर से संचालित होती है। इससे पराली से भूसा बनाया जाएगा तो पराली खेतों में नहीं रहेगी। वही  गोशालाओं में गायों के लिए चारे की कमी  नहीं आएगी। वहीं तीसरा लाभ किसानों को होगा जो पराली को बेच सकेंगे।

आने वाली पराली का करें उपयोग

गोशाला संचालकों के पास यह अच्छा मौका है कि वे आगामी दिनों में जब खेतों में गेहूं की पराली आएगी तो इसे लाकर गायों के लिए भूसा तैयार कर सकते हैं। इससे सरकारी सब्सिडी का लाभ भी लिया जा सकेगा। वैसे भी खेतों में पराली जलाने से प्रदूषण फैलने के साथ ही कई प्रकार के नुकसान होते हैं। कई बार इससे हादसा भी हो सकता है।

पराली जलाने से भूसा हुआ महंगा    

खेतों में ही पराली को जला दिए जाने से भूसे की कीमत बढ़ गई है। गत वर्ष 1300 रुपये क्विंटल तक भूसा बेचा गया था। वर्तमान में भी कई राज्यों में भूसे की कीमत करीब 700 रुपये क्विंटल है। ऐसे में पराली से भूसा बनाया जाए तो गोशालाओं की गायों और अन्य पालतू पशुओं को सूखा चारा आसानी से उपलब्ध हो जाएगा।

सभी गोशालाओं को ट्रैक्टर खरीदना है जरूरी

अगर मध्यप्रदेश की योजना की बात की जाए तो इसमें स्ट्रॉ रीपर पर सब्सिडी के लिए सरकार ने ट्रैक्टर का होना अनिवार्य किया है। जबकि भोपाल में करीब 34 गोशालाओं में कुछे के पास ही खुद के ट्रैक्टर हैं। ऐसे में स्ट्रॉ रीपर के लिए कम आवेदन आ पा रहे हैं। पशु चिकत्सा सेवा के उप संचालक डा. अजय रामटेके की मानें तो जिन गोशालाओं का संचालन समितियों की ओर से किया  जा रहा है उनको 10 प्रतिशत लागत दर पर ही स्ट्रारीपर  मशीन उपलब्ध कराई जाएगी।  

किसानों को मिलेगी 50 प्रतिशत सब्सिडी

एक तरफ मध्यप्रदेश सरकार गोशालाओं को 90 प्रतिशत अनुदान देकर केवल 10 प्रतिशत लागत दर पर ही पराली से भूसा बनाने की मशीन उपलब्ध करा रही है वहीं किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इससे किसान भी पराली को खेतों में नहीं जलाएंगे। वे भी इसका भूसा बना कर इसे ज्यादा कीमत पर बेच सकते हैं। किसानों के लिए भी यह योजना एक तोहफे के समान है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय होगी।

अन्य कई उपकरणों पर भी मिलेगी सब्सिडी

पराली से भूसा बनाने के लिए मध्प्रप्रदेश सरकार किसानों को स्ट्रॉ रीपर मशीन खरीद पर दी जा रही 50 प्रतिशत की सब्सिडी के अलावा बेलर, रीपर कम, बाइंडर, मल्चर, हैप्पी सीडर आदि मशीनों पर भी सब्सिडी प्रदान कर रही है। इससे किसानों को काफी सहायता मिलेगी और पराली का भी समाधान होगा।

एक स्ट्रा रीपर करता है तीन काम

बता दें कि बाजार में किसानों के लिए हाल ही एक ऐसा स्ट्रॉ रीपर भी आ गया है जो एक साथ तीन काम कर सकता है। इससे फसल की कटाई, थ्रेसिंग और पुआल को साफ करने का काम तेजी से होता है। ऑपरेशन के दौरान इसकी घूमने वाली रील गेहूं के डंठल को बरमा की ओर ले जाती है। इसके बाद इसका बरमा और गाइड ड्रम डंठल को थ्रेसिंग सिलेंडर तक पहुंचाता हैं। यहां डंठल छोटे-छोटे टुकड़ों में कट जाता है।  यह फसल अवशेषों को अलग करने का बेहतर प्रदर्शन देता है। छोटा  टुकड़ा अवतल की सलाखों के माध्यम से गिरता है। इसमें लगे डबल ब्लोअर पुआल (भूसा) से धूल के कणों को अलग  कर पीछे जोड़ी गई ट्रॉली मे ले जाकर स्टोर करता है। 
 

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