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फसल अवशेष कृषि यंत्रों पर सरकार दे रही 80 प्रतिशत की सब्सिडी, जानें आवेदन प्रक्रिया

फसल अवशेष कृषि यंत्रों पर सरकार दे रही 80 प्रतिशत की सब्सिडी, जानें आवेदन प्रक्रिया
पोस्ट -03 नवम्बर 2023 शेयर पोस्ट

कृषि यंत्रीकरण : किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्रों पर दिया जा रहा 80 प्रतिशत अनुदान

Agricultural Equipment List : नवंबर महीने की शुरुआत के साथ रबी फसलों की बुआई का समय शुरू हो गया है। फसलों की बुआई के लिए किसान खेतों को तैयार करने के लिए पुरानी फसल के अवशेष को जलाना शुरू कर देते हैं। जिसके चलते आसपास के इलाकों में प्रदूषण का लेवल बढ़ जाता है। खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को कम करने और पराली को अतिरिक्त आय का माध्यम बनाने के लिए विभिन्न राज्यों की सरकारों द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही है, जिसका लाभ किसानों को दिया जा रहा है। इस बीच बिहार सरकार, पराली प्रबंधन को लेकर एक्शन मूड पर है। खेतों में किसान पराली नहीं जलाए इसके लिए बिहार सरकार फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपयोगी कृषि यंत्राें पर भारी सब्सिडी दे रही है। साथ ही पराली नहीं जलाने के लिए प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए कई कार्यक्रम भी चला रही है। कृषि विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि किसान धान की पराली और खूंटी को खेतों में नहीं जलाएं। उसका उचित प्रबंधन करें। सरकार कृषि यांत्रिकरण योजना के तहत फसल अवशेष प्रबंधन के कृषि यंत्रों पर 75-80 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। इसके अलावा, पराली जलाने से होने वाले पर्यावरण नुकसान की जानकारी भी कृषि विभाग सचिव ने दी।

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किसानों को जागरूक कर रही है सरकार

सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने फसल अवशेष को जलाने पर होने वाले नुकसान के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि मजदूरों के अभाव में खासकर पटना और मगध प्रमंडल के अधिकांश जिलों के किसान भाई-बहन धान की कटनी कंबाइन हार्वेस्टर से करते हैं। कटनी के बाद धान के तने का अधिकांश भाग खेतों में ही रह जाता है। अगली फसल लगाने की जल्दी में किसान भाई बहन द्वारा इन फसल अवशेषों को खेतों में ही जला दिया जाता है। जिससे सल्फर डाई ऑक्साइड, कॉर्बन मोनो ऑक्साइड, कॉर्बन डाई ऑक्साइड गैस निकलकर वातावरण में फैलती है, इससे पर्यावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। उन्होंने कहा कि राज्य में धान की कटाई को देखते हुए सरकार धान के पुआल (पराली) के उचित प्रबंधन के लिए फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के लिए भारी अनुदान दे रही है। साथ ही किसान खेतों में पराली न जलाएं, इसके लिए कृषि विभाग चौपाल सहित नुक्कड़ नाटक के माध्यम से किसानों को जागरूक कर रहा है। संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि एक टन धान के फसल अवशेष को जलाने से लगभग साठ किलोग्राम कॉर्बन मोनो ऑक्साइड 1,460 किग्रा. कॉर्बन डाई ऑक्साइड व दो किलोग्राम सल्फर डाई ऑक्साइड गैस रिलिज होती है, जिससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है।

फसल अवशेष प्रबंधन के इन कृषि यंत्रों पर दिया जा रहा है अनुदान

कृषि विभाग के सचिव ने बताया कि बिहार सरकार द्वारा कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपयोगी कृषि यंत्रों जैसे रोटरी मल्चर, स्ट्रॉ बेलर, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस), जीरो टिलेज/सीड-कम फर्टिलाइजर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर और रोटरी स्लेशर आदि पर किसानों को 75 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत प्रावधानों के अनुसार कृषि विभाग, बिहार सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन के इन कृषि यंत्रों पर राज्य के सामान्य वर्ग के किसान भाई-बहनों को 75 प्रतिशत और अनूसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व आर्थिक रूप कमजोर वर्ग के लिए 80 प्रतिशत तक का अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। राज्य के इच्छुक किसान भाई बहन योजनान्तर्गत इन कृषि यंत्रों पर सब्सिडी का लाभ लेने के लिए कृषि विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर  सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य के किसान फसल अवशेषों को खेतों में न जलाकर उसे मिट्टी में मिला दें या उससे वर्मी कंपोस्ट खाद बनाये और पलवार तरीके से खेती करें। इससे मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा बना रहेगा और फसलों की अधिक गुणवत्तापूर्ण पैदावार बढ़ेगी। जिससे किसान भाई-बहनों की आय में इजाफा होगा।

किसानों को 110  कृषि यंत्रों पर दिया जा रहा है अनुदान

बता दें कि बिहार में खेती को आधुनिक बनाने और खेती में लगने वाले लागत व समय को कम करने के लिए कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत राज्य में वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए 110 कृषि यंत्रों पर अनुदान देने का लक्ष्य तय किया गया है। जिसमें किसानों को मैन्युअल कृषि यंत्र कीट (खुरपी, कुदाल, विडर, दांतेदार हसिया ) आदि से लेकर फसल कटाई, बुआई और फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए उपयोगी यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा यंत्रों पर यह अनुदान किसान वर्ग के अनुसार अलग-अलग तय किया गया है। इच्छुक किसान भाई योजना के तहत इन सभी कृषि यंत्रों के लिए आवेदन कृषि विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन कर सकते हैं और अनुदान संबंधित जानकारी भी वेबसाइट से ले सकते हैं।

फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्रों को सब्सिडी पर लेने के लिए कैसे करे आवेदन

बिहार राज्य सरकार द्वारा संचालित कृषि यंत्रीकरण योजना में सब्सिडी दरों पर इन कृषि यंत्रों को खरीदने के लिए पहले लाभार्थी किसान को कृषि विभाग के प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) पर रजिस्ट्रेशन कराकर आईडी नबंर लेना होगा। इसके बाद इच्छुक किसान भाई बहन योजना के तहत यंत्रों के लिए आवेदन कर सकते हैं। आईडी नंबर लेने के लिए किसान भाई सीएससी केंद्र या वसुंधरा केंद्र की मदद से अपने जरूरी दस्तावेज जैसे कृषि विभाग द्वारा भूमि स्वामित्व का प्रमाण पत्र, जाति का प्रमाण पत्र (केवल अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए), निवास प्रमाण पत्र, ट्रैक्टर की वैध आरसी, आधार कार्ड, पैन कार्ड,  बैंक खाता पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो, आधार लिंक मोबाइल नम्बर आदि से विभाग के प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) पर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। साथ योजना की विस्तृत दिशा-निर्देश एवं अन्य शर्ते की जानकारी भी ले सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने जिला के उपनिदेशक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग से  संपर्क कर सकते हैं। 

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